Saturday, 16 February 2019

बाबा आमटेजी की जीवनावली - Biography of Baba Amteji

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com में आपका स्वागत है। आज के आर्टिकल में हम पढ़ेंगे की बाबा आमटेजी की जीवनावली - Biography of Baba Amte ji, और उनके महत्वपूर्ण कार्यो के बारे में हम जानकारी प्राप्त करेंगे उम्मीद है की यह लेख आपको पसंद आए।

बाबा आमटेजी की जीवनावली - Biography of Baba Amteji

बाबा आमटेजी की जीवनावली - Biography of Baba Amteji (1914 -2008)

महारोगी लोगो की सेवा करने वाले बाबा उर्फ़ मुरलीधर आमटे इनका जन्म 1914 में हुआ। बाबा को बचपन में फिल्म बहुत पसंद थी। अंग्रेजी फिल्में उनके खास प्यार करती हैं। कई पत्रिकाओं के लिए, वह अवधि के लिए फिल्में लिखते थे। उनके पास ग्रेटा गार्बो और नोर्मा शचर जैसे कलाकारों के साथ पत्राचार था। बाद में, जब बाबा ने कुष्ठरोग के लिए काम शुरू किया, तो यह उल्लेखनीय था कि उन्हें अपने काम में सोमनाथ के हिस्सेदार से पहली मदद मिली। बचपन में एक स्वतंत्र स्पोर्ट्स कार बाबा को दी गई थी जब उन्होंने बचपन में कार चलाना शुरू किया था। लेकिन बाबा बहुत कम उम्र से थे।

भले ही बचपन में ऐश्वर्या चली गई थीं, उस उम्र में भी उनके पास एक सामाजिक भावना थी। इसलिए उनके कई दोस्त खेलने के लिए नीची जाति के थे। उन्हें उनके साथ खेलने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। उसके बावजूद, बाबा उनमें मिला करते थे।


बाबा आमटेजी की कॉलेज के दिनों की जीवनावली :

कॉलेज के दिनों में, बाबा ने पूरे भारत का चक्कर लगाया। बाबा, जो रवींद्रनाथ टैगोर के संगीत और कविता से प्रभावित थे, ने उनके शांतिनिकेतन का भी दौरा किया। बाबा बाबा पर टैगोर का बहुत प्रभाव था। यही प्रभाव महात्मा गांधी के साथ था, जो सेवाग्राम में एक आश्रम थे। मार्क्स और माओ के विचारों ने बाबा को भी आकर्षित किया। लेकिन उन्हें अपने विचारों को लागू करने के लिए रूस और चीन में क्रांति पसंद नहीं आई। साने गुरुजी का भी बाबा पर बहुत प्रभाव था।

ऐसी हवा में बड़े हुए बाबा ने वरोरा में अभ्यास करना शुरू किया। उसे भी चलना था। साथ ही वे सप्ताह के अंत में अपनी खेती को देखते हैं। कृषि कितनी है? लगभग 450 एकड़। यह वरोरा के पास गोराजा में खेती की गई थी। उसके बाद उन्होंने खेती शुरू की और किसानों को संगठित करना शुरू किया। सहकारी समितियों की बुनियादी बातों ने किसानों में क्षरण शुरू कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि बाबा को वार्रा के उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया। एक तरफ, बाबा के क्लब में जाने से, सार्वजनिक जीवन शुरू होने पर शिकार, टेनिस और पुल भी शुरू किया गया था। पैसा बहुत बड़ा हो रहा था। इन सब के बावजूद, बाबा आत्मा से इतने खुश नहीं थे। उन्हें लगता है कि जीवन का कुछ उद्देश्य होना चाहिए।

इसी समय, कानून का अभ्यास भी झूठ के साथ एक समीकरण है। झूठे आरोप लगाकर बाबा धन प्राप्त करना स्वीकार्य नहीं था। इसलिए उन्होंने नुकसान के लिए काम करना शुरू कर दिया। तत्वों को दूर से पानी लाने की जरूरत है। ऊंची जाति के विरोध के बावजूद बाबा ने उनके लिए सार्वजनिक चौक खोल दिए। उसके बाद, 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ और बाबा इसमें शामिल हो गए। उन्होंने वकीलों द्वारा गिरफ्तार और संगठित नेताओं से लड़ने के लिए आंदोलन शुरू किया, तब वे जेल गए।


बाद में, वकीलों का उत्साह समाप्त हो गया और वे उदास महसूस करने लगे। इस अवधि में, उन्होंने बाल बढ़ाए। एक मूक साधु की तरह लग रहा था। एक बार, जब एक नागपुर गया, तो उसने इंदु (साधनाई) को देखा और प्यार में उसका भोग देखा। लेकिन उनके ऋषि जैसे अवतार को देखकर, साधनाताई के परिवार ने उनकी निंदा की। लेकिन खास तौर पर साधनाता को भी बाबा बहुत पसंद थे। फिर उन्होंने घर से शादी करने का फैसला किया।

शादी के बाद बाबा का जीवन :

शादी के बाद भी, बाबा जीवन के लक्ष्यों को पाने में असमर्थ थे। एक दिन उसने एक कोढ़ी को देखा। उसने उस आदमी को देखा, जिसका गला घोंटा गया था, और वह घबरा गया था। लेकिन यही उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ था। वे वापस आए और उसकी सेवा की। लेकिन वह नहीं रहा। इस घटना के अगले छह महीने बाद, बाबा ने कुष्ठ रोग के लिए काम करने का फैसला किया और पत्नी ने भी इस फैसले का समर्थन किया। फिर उन्होंने आनंदवन की स्थापना शुरू की।

कुष्ठरोग पर औशोधोपचार का शोध होने के पूर्व कुष्ठरोगियों को छुआछूत की बीमारी समझकर लोग रोगियों को घर के बाहर निकाल देते या रोगी से भेदभावपूर्ण व्यवहार करते थे। ऐसे रोगी को मरना पढता या जलील भरी जिन्दगी को झेलना पढता था। जीना काफी मुश्किल हो गया था।

उस समय बाबा आमटे कुष्ठरोगियों का जीवन का पुनर्वसन करके रोगियों को नवजीवन दान दी, इन्ही के कर्मठ सफल प्रयासो से चंद्रपुर जिल्हा में कुष्ठरोगियों का “आनंदवन” का निर्माण हुआ।

रोगियों को उपचार केंद्र का निर्माण :

बाबा आमटे ने “रोगियों की सेवा को ही ईश्वर सेवा” समझकर कुष्ठरोगियों के साथ – साथ अपंग, अंध, मतिमंद, जैसे व्यक्तियों को सम्मान जनक जीवन जगते आना चाहिए इसलिए “महारोगी सेवा समिति” की स्थापना की। इस समिति के माध्यम से चंद्रपुर जिल्हे के वरोरा में “आनंदवन”, नागपुर में “अशोकवन”, मूल में सोमनाथ, नागेपल्ली में हेमलकसा, नागेपल्ली जैसे स्थानों पर अपंग व कुष्ठरोगियों के लिए उपचार केंद्र व पुनर्वसन केंद्र की निर्मिती कर सेवा देने का कार्य किया। रोगियों को सिर्फ उपचार ही नहीं बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता से जीवन जी सके, इसलिए रोगियों का आत्मविश्वास व स्वाभीमान निर्माण हो सके ऐसे विविध प्रकार के कार्यो को उपलब्ध कराया।


वहां उन्होंने कुष्ठरोगियों के लिए निवास किया। उनकी सेवा करने के लिए उपवास शुरू करें। उन्होंने इसके लिए कुष्ठ रोग का इलाज भी सीखा। आनंद की कोई सुविधा नहीं थी, उन्होंने यह नंदवन भूमि की। आनंदवन ने आत्मनिर्भर होने के लिए वहां खेती शुरू की। आनंदवन दुनिया भर के लोगों के लिए कुष्ठ रोग का एक उदाहरण है।

बाद में, बाबा बड़े होने के बाद भी चुप नहीं रहे। अस्सी के दशक के दौरान, जब भारत आतंकवाद और आतंकवाद जैसी चीजों से पीड़ित था, बाबा ने भारत को जोड़ने के लिए अरुणाचल प्रदेश से कन्याकुमारी से काशमीराव तक भारत की यात्रा की। इस तीर्थयात्रा का उद्देश्य शांति बनाने और पर्यावरण के बारे में जागरूकता पैदा करना था। 1990 में, बाबा ने आनंदवन छोड़ दिया और नर्मदा के तट पर आने लगे। उन्होंने नर्मदा आंदोलन को मजबूत करने का निर्णय लिया।

बाबा आमटे जी को मिला पुरस्कार :

बाबा आमटे के इन महान कार्यो को विविध संस्था-संघटनों ने सराहा व उनका गौरव किया। देश-विदेश से अनेको सम्मानों से उनको नवाजा गया। 1985 में फिलिफिंस से “रैमन मगसेसे” पुरस्कार से सम्मानित किया। 1986 में भारत सरकार ने “पदम विभूषण” किताब से सम्मानित किया। “भारत जोड़ो” आन्दोलन पुरे देश भर चलाया। इस बिच के दौरान उन्हें “गाँधी शांतता पुरस्कार” भी प्राप्त हुआ। ऐसे कई पुरस्कारो से उनको सम्मानित किया।

कुष्ठरोगियों को समाज के बाहर रखने पर उन्हें आधार देनेवाले महान समाज सेवक बाबा आमटे खुद लम्बी बीमार अवस्था से 9 फेब्रुवरी 2008 को अपनी अंतिम शास ली। उनकी इस अमूल्य योगदान का यह मानव समाज सदा ऋणी रहेगा।

Tags :- Technology, Technical Study, Online job, Future Tech, Internet, Online Study, Computer, Health, Science, Fashion, Design, Solar System, पौराणिक रहस्य, महान व्यक्तित्व.

संबंधित कीवर्ड :
बाबा आमटेजी की जीवनावली - Biography of Baba Amteji, बाबा आमटे जी को मिला पुरस्कार, रोगियों को उपचार केंद्र का निर्माण, शादी के बाद बाबा का जीवन, बाबा आमटेजी की कॉलेज के दिनों की जीवनावली।



दोस्तों, उम्मीद है की आपको बाबा आमटेजी की जीवनावली - Biography of Baba Amteji  यह आर्टिकल पसंद आया होगा। यदि आपको यह आर्टिकल उपयोगी लगता है, तो निश्चित रूप से इस लेख को आप अपने दोस्तों एवं परिचितों के साथ साझा करें। और ऐसे ही रोचक आर्टिकल की जानकारी प्राप्ति के लिए हम से जुड़े रहे और अपना Knowledge बढ़ाते रहे।

धन्यवाद।
                                                                                                                         Author By : सविता ...
यह भी जरुर पढ़े 

Tuesday, 12 February 2019

सकारात्मकता से समस्याओं का समाधान - Solutions to Problems with Positive

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com में आपका स्वागत है। आज के आर्टिकल में हम पढ़ेंगे की सकारात्मकता से समस्याओं का समाधान कैसे मिलता है, और अकरात्मक विचार कैसे निर्माण होते है, इसके बारे में हम इस लेख में जानकारी प्राप्त करेंगे उम्मीद है की यह लेख आपको पसंद आए।

सकारात्मकता से समस्याओं का समाधान - Solutions to Problems with Positive

सकारात्मकता से समस्याओं का समाधान - Solutions to Problems with Positive

वर्तमान युग में सामाजिक वैज्ञातिक व भौतिक क्षेत्रां में तेजी से विकास होते जा रहा है। हमारे सच्चे सुख और शांति का विकास होते जा रहा है। हमारे सच्चे सुख और शांति को इसी चकाचौंध में भुल गये। आज से सौ साल पहले इन सब चिजों का आविष्कार नही था, और हम जानते भी नही थे। इन्ही आविष्कारो से हमें नई-नई उपलब्धिया प्राप्त होती है, आधुनिक विकास में हम खुद को भुल गये है और खुद को भाग्यशाली समझ रहे है। कम्पुटर और लॅपटॉप का हमें ज्ञान नही था। लेकिन उसे भी हमने अपने में उन्नति करके जान लिया है। छोटी सी मायका्रेचिप कितना कमाल करती है, बटन दबाते ही सभी काम हो जाते है।


भौतिक साधनों से आंतरिक शक्तिया मिलेगी ?

आधुनिकता और भौतिक साधनों के बीच मनुष्य फसता और थकता जा रहा है। भौतिक साधनों के बीच मनुष्य सुख व समाधान के बीच लंबी दुरी बना ली है। सुख सुविधा के बिच फंसा मनुष्य सतुष्टता को किसी और चिज में ढुंढ रहा है। योगा, प्राणायाम, मेडीटेशन, आध्यात्म की और भारतीय संस्कृति पिछड गई है।

लेकिन कुछ ऐसे महत्वपूर्ण पच्छिमी लोग भारतीय संस्कृती और उनका लक्ष्य बढा रहा है। हम अपने आंतरिक शक्ति और क्षमता का स़्त्रोत कहा है, इसका हमें ज्ञान नही है। हम विचीत्र दुविधा में फंसे हूये है।

सकारात्मकता हमारे जिवन की आवष्यकता - Positiveness Requires Our Life :

रोज के व्यवहारीक जिवन में हम दो शब्द हमेशा सुनते है। सकारात्मकता और नकारात्मकता जिवन के लिये सकारात्मकता होना आवश्यक है, हमारे सभी समस्याओं का हल सकारात्मकता में मिलता है, खुशी मिलती है।


सवेरे से शाम तक हम सोचते है कि हमें यह करना चाहिये लेकिन हम नही करते। जो काम मुझे करना है और मैं करती हुं वह हुआ सकारात्मकता। हम सोचने पर भी नही कर पाते वह हुआ नकारात्मकता। किसी को प्रोत्साहित करने पर जोश में आवेश में किसी बहाने और कारणां से कर लेते है।

नकारात्मकता से हमारा नुकसान - Negativity causes us to lose :

एक छोटी सी कहानी से नकारात्मकता के नूकसान सामने आये है :
प्राचिन भारत में गुरूकुल हुआ करते थे। विज्ञान, गणित के भाषा के साथ-साथ व्यवहार और आध्यात्म का भी ज्ञान दिया जाता था। एक गुरूकूल में एक बालक शिक्षा ले रहा था। वह अपने गुरू का प्रिय शिष्य था। शिक्षा समाप्त होने पर वह अपने गुरू की आज्ञा लेता है। चरण स्पर्श कर आशीर्वाद मांगता है। गुरूजी आशीर्वाद देते हुये कहते है कि मैं तुमसे बहूत प्रसन्न हुॅं घर जाओ और अपने कुल का नाम रौशन करो। 


पर मेरी तुम्हारे लिये अंतिम शिक्षा है कि जब तुम योग तपस्या में लीन होंगे तो बंदरो को बिल्कूल याद नही करना। बच्चे ने गुरू का आशीर्वाद लेते हुए हामी भरी और वहा से निकल गया। बालक को गुरूजी की अंतिम शिक्षा का मर्म समझ नही आया। मनुष्य का मन बहोत ही चंचल होता है। उसे जो चिज के मना किया जाता है वो वही करता है। जैसे एक बच्चे को कहा जाये किसी चिज को हाथ न लगाये। सबका ध्यान इधर-उधर होने पर वह रखी हुई चिजों को उठाता है, दोस्तों यही तो है नकारात्मकता। जब गुरूकुल में शिक्षा ले रहे बच्चे को बंदर को याद करने मना किया गया।
सकारात्मकता से समस्याओं का समाधान - Solutions to Problems with Positive
साधना करते समय उसे वही याद आयेगा। वह सोचता है गुरूजी को बदरों ने क्या बिगाडा, मेरा क्या बिगाडा जो मैं उसे याद न करू?  गुरूजी की अंतिम शिक्षा ने बच्चे की साधना ही भंग कर दि क्योंकी उसका गुढ रहस्य वह नही समझा। तब गुरूजी ने उसे प्रेम से समझाया बंदर अर्थात ही नकारात्मकता सोच। यही नकारात्मकता व्यक्ती के मन को चंचल बना देगी।

Tags :- Technology, Technical Study, Online job, Future Tech, Internet, Online Study, Computer, Health, Science, Fashion, Design, Solar System, पौराणिक रहस्य, महान व्यक्तित्व.

संबंधित कीवर्ड :

सकारात्मकता से समस्याओं का समाधान - Solutions to Problems with Positive, भौतिक साधनों से आंतरिक शक्तिया मिलेगी-Internal powers will be provided through physical means, सकारात्मकता हमारे जिवन की आवष्यकता-Positiveness Requires Our Life, नकारात्मकता से हमारा नुकसान होता है-Negativity causes us to lose. 



दोस्तों, उम्मीद है की आपको सकारात्मकता से समस्याओं का समाधान - Solutions to Problems with Positive यह आर्टिकल पसंद आया होगा। यदि आपको यह आर्टिकल उपयोगी लगता है, तो निश्चित रूप से इस लेख को आप अपने दोस्तों एवं परिचितों के साथ साझा करें। और ऐसे ही रोचक आर्टिकल की जानकारी प्राप्ति के लिए हम से जुड़े रहे और अपना Knowledge बढ़ाते रहे।
धन्यवाद।
                                                                                                                         Author By : BK गीता ...
यह भी जरुर पढ़े 

Monday, 11 February 2019

सबसे अच्छी संपत्ति कैसे प्राप्त करें - How to get the best asset

नमस्कार दोस्तों, www.apnasandesh.com में आप सभी का स्वागत है। आज के आर्टिकल में हम पढ़ेंगे की सबसे अच्छी संपत्ति कैसे प्राप्त करें, इस लेख से किसीका जिवन परिवर्तन हो सकता है। इसिलिए मैंने यह लेख पब्लिश किया है, या कुछ अच्छा पढने को मिले।

सबसे अच्छी संपत्ति कैसे प्राप्त करें - How to get the best asset

सबसे अच्छी संपत्ति कैसे प्राप्त करें - How to get the best asset :

श्रेष्ठ कर्मो की पुंजी-
इस संसार में जिसने भी कर्मेद्रियां का आधार लिया है उसे कर्म करना ही पडता है। इस संसार में जो भी सूःख-दुःख है वह अपने ही अच्छे कर्मो से सुख बुरे कर्मा से दुख, इसलिए जिवन को कर्मप्रधान कहा जाता है। इसी सिद्धांत के आधार पर मनूष्य को अपने जिवन में सत्यता के आधार पर अपने जिवन में श्रेष्ठ  कर्म करके आध्यात्मिक मुल्यों  को बढाना अति आवष्यक है।

श्रेष्ठ कर्म कि परिभाषा-
ईश्वर जो हमें श्रेष्ठ मत देते है उसे श्रीमत कहते है। उसे अपने जिवन में अपनाने से मंसा, वाचा, कर्मणा श्रेष्ठ कर्म स्वतः होते है। जिससे जिवन में सत्यता, दिव्यता आती है और धर्म श्रेष्ठ, कर्म श्रेष्ठ बनते है।


शुभ भावना श्रेष्ठ कर्मा की सफलता की कुंजी है। सबके लिए शुभभावना रखना अत्याधिक आवष्यक है, शुभ भावना से सबके मन में आत्मिक प्रेम, आत्मिक स्नेह जागृत होता है। आत्मिक प्रेम अपनी पवित्र चुंबकिय शक्तिया से जगत के जन-जन को प्रभावित करके आपस में सभी को निकट लाती है। सदा यही मन में यही आशा होती है कि सेवा करूं तो श्रेष्ठ कर्म जमा होंगे। इस बात पर ध्यान दे की हमारे अंदर की बुराई शुभ भावना रूपी कुंजी छीन न ले। हमारे लिए कोई गलत या बुरा दृष्टिकोन रखता है। फिर भी हम उसके प्रति अपनी शुभभावना न बदले क्योंकी मनुष्यों के विचारों की तरंगे एक तरह की सजीव तरंगे वह सुक्ष्म तरंगे है जो दुसरों पर बहूत गहरा प्रभाव डालते है। शुभ सोचने से हम दुसरों को व खुद को सुख देते है, अशुभ सोचने पर खुद को व दुसरों को दुख देते है।

श्रेष्ठ संकल्प ही श्रेष्ठ कर्म के लिए आवश्यक है :

श्रेष्ठ कर्म करना है तो हमारे विचारों का संकल्पों कर प्रवाह सदा श्रेष्ठ तथा महान हो। जैसे उसके विचार की तंरगे संकल्पो की तंरगे होती है वैसे ही उसका जीवन होता है अर्थात उसके जिवन का प्रतिबिंब। जैसे एक बिज में एक पेड उत्पन्न करने की क्षमता होती है वैसे ही श्रेष्ठ संकल्पो के बीज में एक असीम शक्ति होती है जो श्रेष्ठ कर्मो की रचना होती है। इसिलिए सदा मन में शुभ व पवित्र संकल्पो की रचना करने की आदत रहें। जब मन में कोई कार्य करने के लिए उमंग तथा स्पूर्ति भरा संकल्प चलता है तो उसे तुरंत प्रयोग में लाए, तुंरत काम करने में अपनी योग्यतायें, शक्तिया जमा रहती है यही आदत हो तो मनुष्य जरूर अच्छे कर्म प्राप्त कर सकता है।

श्रेष्ठ कर्म के लिए वाचा भी श्रेष्ठ :

बोलचाल व्यवहार से मनुष्य के व्यक्तित्व की परख होती है। इसके लिए कम बोलना प्रभावशाली होता है, यही बोल अपने व्यक्तित्व का प्रभाव बढाती है। देखाजाय तो व्यर्थ बोल बोलने से हमारे मानसिक तथा शारीरिक शक्ति का पतन होता है। मन और बोल का आपस में बहुत गहरा प्रभाव पडता है। इसीलिए सजीव प्राणी व्यर्थ बोलने लगता है, इसके कारण मन दुःखी व कमजोर होता है। जिसका परिणाम अलौकिक उन्नती के स्तर को निचे लाता है।


श्रेष्ठ भावना श्रेष्ठ कर्म के लिए आवष्यक :

हमेशा सभी मनुष्य के लिए उंची व श्रेष्ठ भावना रख कर्म करते रहिये। हमे कोई सफलता की सिढी से निचे खिंचने की कोशिस करता है फिर भी हम उसका भला ही करें,यह सदा याद रखना है। हमारे लिए जो कांटा बोता है उसके लिए भी हमें शुभ भावना रखना है। क्योंकी हम दुःखहर्ता, सुःखकर्ता शिवपिता की संतान है। हमें दुसरों का दुःख हरना है।

जब हम दुसरे के लिए बुरा सोचते है तो सबसे पहले उसका असर हमारे मन पर होता है। ऐसा कर्म करते हम दुःख की लहर अनुभव करते है। संसार मे अपने दयालुता का प्रयोग करना दुःखी व्यक्ती को सुअवसर मिलना कृतार्थ पाने वाला होता है, ऐसे व्यक्ती के हम कृतज्ञ है।

ऐसे श्रेष्ठ करने से हमे आंतरिक ख़ुशी मिलती है। दुसरों के मन से हमें दुवायें मिलती है। परमात्मा जब इस धरती पर आते है तब हमे दुवायें जमा करने का युग होता है, श्रेष्ठ कर्म करने से हम श्रेष्ठ आत्मा बन जाते है। सभी का भला करने से हमारा भला होता है।

विकट परिस्थ्ति में श्रेष्ठ कर्म की पुंजी साथ आती है। कहावत है कि हम खाली हाथ जायेंगे, पर यह सत्य नही है। हमारे साथ हमारे श्रेष्ठ कर्म जाते है, उन्ही कर्मो से नई तकदीर बनती है, नया जन्म मिलता है। यह अविनाशी सत्य है कि कर्म सदा हमारा पिछा करता है।


कर्म श्रेष्ठ हो या कम दर्जे के हो वह परछाई की तरह हमेशा साथ रहते है। जीवन में कर्म की प्रधानता पर गुढ विश्वास रख श्रेष्ठ कर्मो की पुंजी बढाते रहने से जीवन में कल्याण है। यह पुंजी ही अविनाशी चलनेवाली संपदा है, जो अंत तक हमारे साथ रहती है। उदा. के तौर पर हम अचानक संकट में फंस गये, दुर दुर तक कोई सहायता करने वाला नही होता हमारे पुण्य कर्म ही हमारी सहायता करते है।

श्रेष्ठ कर्म की पुंजी भगवान से माफी दिलायेगी :

कहते है कि हमारे कर्मो का लेखा जोखा भगवान के पास होता है। जिन मनुष्यों के खाते में श्रेष्ठ कर्मा की पुंजी अथाह होती है। भगवान उन्हे छोटी मोटी गलती की माफी करता है। जिनके पास पाप कर्मो की पुंजी होती है, उन्हे भग्वान के घर से सजायें खाकर आना पडता है। तब उन्हें अपने किये हुये पाप कर्मा का अत्यंत दुःख होता है, पछाताप के आंसु रोते है। पछाताप की अग्नि वह खुन के आंसु रोते रहते है। हे मनुष्यों सावधान होकर अपना अमुल्य समय शक्तिरूपी खजाना जमा करने में जुटे रहो।

सबसे अच्छी संपत्ति कैसे प्राप्त करें - How to get the best asset

श्रेष्ठ भाग्य बनता है श्रेष्ठ कर्म करने से :

जहा श्रेष्ठ विचार नही, संकल्प नही, वहां श्रेष्ठ संस्कार नही, अर्थात उस परिवार में दुःख और अशांति का माहौल बना रहता है। जहा विचार श्रेष्ठ वहां संस्कार का मिलन होता है, जो महात्मायें दिल से दुसरों की सेवा करता है। पुण्य कर्म जमा करने से महादानी आत्माओं की महीमा होती है। अभी हमारे किये पुण्य किसी ना किसी रूप में हमें सहयोग अवश्य पदान करती है। परिवर्तन की शक्ति से सर्वश्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प ले जिससे सर्वात्तम धन श्रेष्ठ कर्म को वृद्धी को पायेगा।

Tags :- Technology, Technical Study, Online job, Future Tech, Internet, Online Study, Computer, Health, Science, Fashion, Design, Solar System, पौराणिक रहस्य.

संबंधित कीवर्ड :

सबसे अच्छी संपत्ति कैसे प्राप्त करें - How to get the best asset, श्रेष्ठ कर्म कि परिभाषा क्या है, श्रेष्ठ भावना श्रेष्ठ कर्म के लिए आवष्यक है, श्रेष्ठ कर्म के लिए वाचा भी श्रेष्ठ, श्रेष्ठ भाग्य बनता है श्रेष्ठ कर्म करने से.



दोस्तों, उम्मीद है की आपको सबसे अच्छी संपत्ति कैसे प्राप्त करें - How to get the best asset यह आर्टिकल पसंद आया होगा। यदि आपको यह आर्टिकल उपयोगी लगता है, तो निश्चित रूप से इस लेख को आप अपने दोस्तों एवं परिचितों के साथ साझा करें। और ऐसे ही रोचक आर्टिकल की जानकारी प्राप्ति के लिए हम से जुड़े रहे और अपना Knowledge बढ़ाते रहे।

धन्यवाद।
                                                                                                                         Author By : BK गीता...
यह भी जरुर पढ़े 

Sunday, 10 February 2019

निलु फुले जी की जीवनावली - Biography of Nilu Phule ji

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com में आपका स्वागत है। आज के आर्टिकल में हम पढ़ेंगे की निलु फुले जी की जीवनावली - Biography of Nilu Phule ji, और उनके महत्वपूर्ण कार्यो के बारे में हम जानकारी प्राप्त करेंगे उम्मीद है की यह लेख आपको पसंद आए।

निलु फुले जी की जीवनावली - Biography of Nilu Phule ji


निलु फुले जी की जीवनावली - Biography of Nilu Phule ji (1930 – 2009)

नीलकंठ कृष्णा जी उर्फ़ निलुभाऊ फुले सुरुवात में वे अल्पकाल के संघ शाखा के साथी थे। उसमे मुस्लिम, ईसाई, धार्मिक मित्रों का इसमें स्वागत नहीं किया जाता है। जैसे ही ऐसा हुआ, संघ छोड़कर, वह राष्ट्र सेवा दल में शामिल हो गए। वह समय स्वतन्त्रता आन्दोलन का था। भारत को आजादी मिलते ही भारतीय सामाजिक सांस्कृतिक संघटनों ने धर्म, जात, वर्गविर्हित, समाज निर्माण का काम की सुरुवात अपने कन्दो पर ली। निलुभाऊ ने नाट्य, चित्रपट क्षेत्र में अपने सयंत अभिनव से अपने स्वतंत्र पहचान को बनाया। और साथ –साथ अपने आन्दोलन का दामन भी छोड़ा नहीं।

निलुभाऊ के अभिनय करने का उद्देश्य समाज सुधारणा और प्रगतिशील सोच को निर्माण करना था। पदानुक्रम, लड़ना, झगड़ना,उत्पीडन और संघ के शक्ति का दुरूपयोग करनेवाले हुकूमत का मूलतः विरोध किया।



निलु फुले जी का जन्म - Born of Nilu Phule ji :

नीलू फुले इनका जन्म 1930 में पुणे खडककम क्षेत्र के बोरात वार्ड में हुआ। जैसे तैसे 9 वी तक शिक्षा ली और राष्ट्र सेवा दल में शामिल हो गए। स्वतंत्रता के आन्दोलन में उनका सक्रिय सहभाग रहा। जब महात्मा गांधी को 1945 में आगाखान पैलेस से मुक्त कर उनका प्रकृति उपचार के लिए आश्रम में लाये थे तब सेवा दल के सैनिक के रूप में काम किये। 1957 में संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन शुरू किया गया उस आन्दोलन में भी सक्रीय कार्यकर्ता के रूप में भाग लिया था। पुणे के कानूनी विभाग में मेडिकल कृति के रूप में नौकरी भी कि।

राष्ट्र सेवा दल के कल्पकट को उनके जीवन में एक नया मोड़ मिला। इस टीम के माध्यम से विभिन्न नाटक अस्तित्व में आए। नीलू फुले ने बड़े ही उत्साह के साथ इसमें सहभाग लिया था। इस मराठी कलापथक में "पुढारी पाहिजे" (ले. पु. देशपांडे)," कुणाचा कुणाला मेंळ नाही", "बिन बियांचे झाड़ " (ले. व्यंकटेश माडगूळकर ), लाल चीनच्या आक्रमणाचा फार्स ( ले. दादा कोंडके ) इस प्रकार के लोकनाट्य में मनपूर्वक काम किया। इस कलापथक में राम नगरकर व दादा कोंडके ने भरपूर सहयोग किया।

निलु फुले जी की फिल्म जगत में सुरुवात - Nilu Phule ji starts in film industry :

नीलू फुले नाटको में काम करते करते 1968 में फिल्म जगत में भी अपने अभिनय की सुरुवात की। उनका पहला मराठी फिल्म “एक गाव बारा भानगडी” यह था। “सामना”, “सिंहासन”, “पिंजरा”, “सोंगाड्या”, “थापाड्या”, “चोरीचा मामला”, “लक्षमी पुढचे पाउल”, ‘’ जैत रे जैत”, “सेनानी साने गुरूजी” ऐसे मराठी फिल्म जगत में अपने दर्जेदार अभिनय से फिल्म जगत को समृद्ध किया। नीलू फुले मराठी फिल्मो में ही नहीं बल्कि हिंदी फिल्मो में भी अभिनय किया। कलाकार दिलीपकुमार के साथ “मशाल”, अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ “कूली”, में अनुपम खेर के साथ “सारांश”, आदि फिल्मो में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


“ सखाराम बाईनडर”, “सूर्यास्त”, “जंगली कबूतर”, “बेबी”, “राजकारण गेल चुलीत”, “लवंगी मिर्ची कोल्हापुरची”, “मी लाडकी मैना तुमची”, आदि नाटको में नीलू फुले जी की अविस्मर्णीय भूमिका की थी।

मराठी फिल्मो के खलनायक, तालेवार पुढारी, साखरसम्राट, जैसे फिल्मो में ऐसी भूमिका निभाई है। बहुत से लोग मानते हैं कि उन्हें वास्तविक जीवन में खलनायक होना चाहिए। परन्तु उनके निजी जीवन में इसके विपरीत ही भूमिका थी। सामाजिक विषमता से दुःख महसूस करते थे, जैसे में गए वैसे बन जाते थे। मेहनती, पारिश्रमिक लोगो के घर अक्सर जाते व बाते करते थे।

उन्हें सत्ता, पैसा व प्रसिद्धी जैसे चीजो का कोई मोह नहीं था। सरकारी पुरस्कारों को उन्होंने हमेशा नकारा था। फिल्म जगत में बड़े कलाकारों को बड़ी रक्कम मिलती थी व वह के फिल्मो में कामगार लोगो को काफी न्यूनतम मजूरी मिलती थी। इस बात को समझ आने पर उन्होंने एक संघटना बनाई। दुसरो के हक्को के संघर्ष के लिए कभी भी हिचकिचाए नहीं, समाज हित ही उनके जीवन का समाधानी आधार था।

निलु फुले जी का सामाजिक कार्य - Social work of Nilu Phule ji :

समाजवादी पार्टी में सक्रीय थे, 1975 ते 1977 आपातकालीन समय में गुप्त प्रचारपत्र के वितरण में उनका सहभाग था। 1977 में जनता दल व 1989 के चुनाव में जनता दल, व बहुजन महासंघ के प्रचार में अग्रभागी थे। इस प्रकार गोवा मुक्ति संग्राम, संयुक्त महाराष्ट्र आन्दोलन, आपातकालीन विरुद्ध आन्दोलन, महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति, ऐसे सभी जन आन्दोलन में उनका सक्रीय सहभाग था। वह सामाजिक कार्यो के लिए व सेवाभावी संस्थानों को अपने कमाई का कुछ हिस्सा दान करते थे।


आदिवासी सामूहिक नृत्य, धनगर के शुभकामनाये, कोळी के नृत्य इत्यादि लोककला को ही नहीं बल्कि उन कलाकारियो को रंगमंच में लाने का कार्य किया। उनके लिए रंगमंच बनाया। फुले-शाहू –आंबेडकर विचारधाराओं को सांस्कृतिक कार्यकर्मो के माध्यम से लोकजीवन में लाने का प्रयास किया।

उनके जीवन पर डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर, महात्मा फुले, महात्मा गांधी, डॉ. राममनोहर लोहिया, इनके विचारो का काफी प्रभाव पढ़ा। डॉ राममनोहर लोहिया जन्म शताब्दी समिति के अध्यक्ष के रूप में अंत समय तक कार्यरत थे।

Tags :- Technology, Technical Study, Online job, Future Tech, Internet, Online Study, Computer, Health, Science, Fashion, Design, Solar System, पौराणिक रहस्य, महान व्यक्तित्व.

संबंधित कीवर्ड :

निलु फुले जी की जीवनावली - Biography of Nilu Phule ji, निलु फुले जी का जन्म - Born of Nilu Phule ji, निलु फुले जी का सामाजिक कार्य - Social work of Nilu Phule ji, निलु फुले जी की फिल्म जगत में सुरुवात - Nilu Phule ji starts in film industry.


दोस्तों, उम्मीद है की आपको निलु फुले जी की जीवनावली - Biography of Nilu Phule ji  यह आर्टिकल पसंद आया होगा। यदि आपको यह आर्टिकल उपयोगी लगता है, तो निश्चित रूप से इस लेख को आप अपने दोस्तों एवं परिचितों के साथ साझा करें। और ऐसे ही रोचक आर्टिकल की जानकारी प्राप्ति के लिए हम से जुड़े रहे और अपना Knowledge बढ़ाते रहे।
धन्यवाद।
                                                                                                                         Author By : सविता ...
यह भी जरुर पढ़े 

आध्यात्मिकता का रहस्य - The mystery of spirituality

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com में आपका स्वागत है। आज के आर्टिकल में हम पढ़ेंगे की आध्यात्मिकता का रहस्य क्या होता है, और आध्यात्मिकता का रहस्य क्यों महत्वपूर्ण है, इसके बारे में हम जानकारी प्राप्त करेंगे उम्मीद है की यह लेख आपको पसंद आए।

आध्यात्मिकता का रहस्य - The mystery of spirituality

आध्यात्मिकता का रहस्य - The mystery of spirituality :

प्रिय पाठकों,
आत्मा, परमात्मा और प्रकृती का ज्ञान ही आध्यात्म है। आत्मा, परमात्मा, संपुर्ण सृष्टि जगत तीनों लोंको और ब्रम्हांड का ज्ञान ही आध्यात्म है। आध्यात्म अर्थात आत्मा, परमात्मा का संपुर्ण संबध, संपुर्ण जगत का ज्ञान ही आध्यात्म है। आध्यात्म से हमें शक्ति मिलती हैं, परमात्मा का दिया सत्य ज्ञान ही हमें सपुर्ण अनुभुती प्राप्त कराता है। आध्यात्मिकता से हमारे अदंर अच्छे मॅनर्स आते है। आध्यात्म हमारी जिवन की उन्नती का आधार है, फाउंडेशन है। आध्यात्मिकता की कमी से आंतरिक गुण समाप्त हुए है। आध्यात्मिकता की कमी से समाज धर्म भ्रष्ट, कर्म भ्रष्ट बन गया हैं। हमारे विचारों में दिव्यता नही, समानता नही,तो मनुष्य का जिवन दुःखी, अषांत बन गया। आज हम धन, व्यक्ती, वस्तुओं सबंधो में अपने सच्चे सुख और शांति को ढुंढते है और नही मिला तो हम दुःखी होते है।


धन, व्यक्ती, वस्तुओं सबंधो में हम आध्यात्मिकता ढुंढते है तो दिन प्रति दिन उसमें गिरावट आती है उन्नती नही आती है। आध्यात्मिकता के सत्य ज्ञान को हम जिवन में लाते है तो उन्नती, प्राप्त होती है और सबंधों में मधुरता आती हैं।

विश्व में जो भी धर्म है या धार्मिक संस्थायें है उनमें एक ही धर्म आता है, वह एक ही धर्म कहलाता है। वहा एक ही धर्म का प्रचार किया जाता है, और एक ही धर्म के बारे में शिक्षा दी जाती है। और कोई धर्म उसमें समावेश नही करता है।

आध्यात्मिकता में सर्व धर्म, सर्व धर्म की आत्मायें, सर्व धर्म स्थापक, मठ, पंथ, प्रांत, समाज, साधु-सन्यासी, ऋषि-मुनी, देवतायें, विश्व की सर्व आत्मायें चाहे वह मनुष्यों की आत्मायें हो या फिर पशु-पक्षी, जानवरों की आत्मायें हों सभी उसमें आते है। उसे कहते हैं आध्यात्मिकता। आत्मा और परमात्मा के बारे में बताया जाता है।

शरत भूमि सबसे प्राचीन भूमि है। शरत में ही 33 कोटी देवताओ का गायन हैं। यही कारण है की पच्छिमी देश के लोंग शरत की और आकर्षित हो रहे है। पर आज का मनुष्य अपने आतंरिक सुःख को भूल गया है। हमारे अंदर आध्यात्मिकता की कमी से हम अपनी शक्तिओ को भूल गये। आध्यात्मिकता अर्थात आत्मा के उपर अध्यन। आध्यात्मिकता से हमारे निजी गुण बढते हैं। पहले हम बच्चों को शिक्षित करने के लिए शिक्षा दी जाती थी, आज का समाज सुशिक्षित हो गया पर सुसस्ंकृत नही हुआ। आध्यात्मिकता से ही मुल्यनिष्ठ समाज का निर्माण हो सकता है।

आध्यात्मिकता की जरूरत - Spirituality needs :

हम सभी जानते है कि आध्यात्मिकता की जरूरत आज सबको है। युवा, बजूर्ग आज सब दुःखी और अशांत रहते हैं। लेकिन समाज में युवाओं को ही आध्यात्मिकता की आवश्यकता नहीं बल्कि सभी को हैं। प्रायः देखा जाय तो आज सभीकों जरूरत हैं।


✦ युवा अपने जिवन में आध्यात्म को लाता है तो वह सभी क्षेत्रों में उन्नती को प्राप्त कर सकता है। आध्यात्म से युवा अपने मॅनर्स से सभी कार्या, क्षत्रां प्रसि़द्ध में आगे बढ सकते है। आध्यात्म हमारे जिवन के उत्थान का एक रास्ता है।

✦ युवा पीढी अपने जिवन में साकार या आचरण में लाता है सदाही आजिवन उन्नती होगी। आध्यात्मिकता को जानने, समझने से भी महत्त्वपूर्ण है उसको धारण करना, धारण करने से उसका अनूभव हम कर सकते है।

✦ धारण करने से ही प्रत्यक्ष होता है, और उसका सुख प्राप्त होता है। धारणा करने से ही हमारे अंदर गुण आते है। हमारा जिवन परिवर्तन होता है। हमारा जिवन परिवर्तन होने से दुसरों को भी ख़ुशी बांट सकते है। व्यवहार में सबंध में अपना पन आता है, दुसरों के लिए एक आदर का भाव जागृत होता है।

✦ आध्यात्मिकता से हमारा जिवन संतुलनमय होता है। आध्यात्मिकता जिवन में सत्यता लाता है। आध्यात्मिकता से दृष्टी, वृत्ती में शवना में श्रेष्ठता लाता है। नारायण अर्थात कोई दुसना नही तो श्रेष्ठ आचरण करने वाला। आध्यात्मिकता से हमारे अंदर पवित्रता, दिव्यता, श्रेष्ठता, डिवीनटी, रॉयल्टी, नम्रता, अंतर्मुखता, गभिंरता इन सब गुणां से हमारा जिवन होता हैं।

✦ आध्यात्मिकता से हम दुसरों के लिए भी शुभ भावना और शुभ कामना की दृष्टि बन जाती है। आध्यात्मिकता से हमारा जिवन धर्म श्रेष्ठ, कर्म श्रेष्ठ बनता है। आध्यात्मिकता आत्मा को परमात्मा से जोडती है। हमारा लक्ष्य सामने होता है, हमारे जिवन में एक उद्देस होता है।

✦ आध्यात्मिकता से हमारे संस्कार परिवर्तन होता है। आध्यामिकता से ही मुल्यनिष्ठ समाज का निर्माण का समाज होता है। आध्यात्मिकता का ज्ञान आत्मा से जूडा है।

आध्यात्मिकता से आत्मा के संस्कार अनूसार प्रकृती परिवर्तन होती है। हमारी दृष्टि, वृत्ति परिवर्तन होती है। उदाहरण के रूप में जैसा अन्न वैसा मन, जैसा मन होगा वैसा विचार, जैसा विचार वैसा बोल, जैसा विचार विचार वैसा माहौल, जैसा माहौल वैसा समाज, जैसा समाज वैसा देश। जैसे हमारी बुद्धी संकल्प, विचार करती है वैसा वायुमंडल बनता है।


भारत की महिमा - Glorification of India :

प्राचिन भारत सर्व सुखों से भरपुर था, वहां रहनेवाले सर्व मनुष्य दैवीगुणां से भरपुर थे। 33 कोटी देवीदेवताओं का गायन हैं। इसलिए भारत के लिए गाया जाता हैं जहां डाल डाल पर सोने की चिडीयॉ करती है बसेरा...... भारत देश पुरातन वर्ष में सभी संपन्न थे। किसी चिज की कमी नही थी, प्रकृती भी हमारी सहयोगी थी। मनुष्यों में आपसी भाईचारा और प्रेम था। भारत को ही देवभुमी कहा जाता हैं। भारत में ही साधुसंत महात्माओं का जन्म हुआ हैं। भारत में ही ऋषि मुनियां ने शस्त्र बनाये है और तपस्या भुमी कहा जाता है।

तात्पर्य ये है वर्तमान समय में आवष्यकता है आध्यात्मिकता को पहचानने की और उसको अपने जिवन में लाने की। आध्यात्मिकता न होने से हम पतन की और जा रहे है। आध्यात्मिकता से सर्वांगिण विकास किया जा सकता है। आपसी प्रेम भाईचारा को बढाकर सौहार्दमय वातावरण बनाकर देश की एकता को मजबुत कीया जा सकता है।

आज हम परमात्मा को पाने के लिए न जाने कितने जप, तप, व्रत नियम आदि किये पर अब तक हम उससे दूर रहे।
आध्यात्मिकता का रहस्य - The mystery of spirituality
आज हमारे अंदर आध्यात्मिकता को लाना बहोत जरूरी हैं। आध्यात्मिकता से ही एक नये सशक्त समाज का निर्माण होगा।

Tags :- Technology, Technical Study, Online job, Future Tech, Internet, Online Study, Computer, Health, Science, Fashion, Design, Solar System, पौराणिक रहस्य.

संबंधित कीवर्ड :

आध्यात्मिकता का रहस्य - The mystery of spirituality, भारत की महिमा - Glorification of India,
आध्यात्मिकता की जरूरत - Spirituality needs, आध्यात्मिकता क्या है. 





दोस्तों, उम्मीद है की आपको आध्यात्मिकता का रहस्य - The mystery of spirituality यह आर्टिकल पसंद आया होगा। यदि आपको यह आर्टिकल उपयोगी लगता है, तो निश्चित रूप से इस लेख को आप अपने दोस्तों एवं परिचितों के साथ साझा करें। और ऐसे ही रोचक आर्टिकल की जानकारी प्राप्ति के लिए हम से जुड़े रहे और अपना Knowledge बढ़ाते रहे।

धन्यवाद।

                                                                                                                         Author By : BK गीता...
यह भी जरुर पढ़े 

Sunday, 3 February 2019

रोजाना पैदल चलने से होंगे यह लाभ - This benefit will be done daily by walking

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com में आप सभी का स्वागत है। दोस्तों, मै BK गीता आज इस लेख के माध्यम से ''रोजाना पैदल चलने से होने वाले लाभ'' और उसके महत्व के बारे में बताने जा रही हु, उम्मीद है की यह लेख आपको पसंद आये।

  रोजाना पैदल चलने से होंगे यह लाभ - This benefit will be done daily by walking

रोजाना पैदल चलने से होंगे यह लाभ - This benefit will be done daily by walking

प्रिय पाठको,
आजकल रोजमर्रा की दौडधुप की जिंदगी में हम जैसे की पैदल चलना ही भुल गये है। ऑफिस के कामकाज से थकहार के आते है तो हम ज्यादातर वाहन साधनों का ही सहारा लेते है। बुजुर्गो का मानना है कि पैदल चलना सेहत के लिए अच्छा होता है। पहले इतने साधन भी नही होते थे फिर भी लोंग मीलो मिल पैदल जाते थे। रोज 30/45 मिनिट पैदल चलना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। देखा गया है कि साधनों का उपयोग करने वाले लोंगो से पैदल चलने वाले लोंग ज्यादातर तंदुरूस्त होते है। बिना पैसा खर्च किये बिना प्रशिक्षण के हम इसका फायदा ले सकते है।

शोधकर्ताओं का मानना है की पैदल चलने से अनेक फायदे होते है। सभी को पता है की पैदल चलने के अनेक फायदे है लेकिन हम ही पैदल चलना पसंद नहीं करते है। लेकिन आज के लाइफस्टाइल में पैदल चलना बेहद ही जरुरी है। शोधकर्ताओं के अध्ययन से पता चला है की गति से पैदल चलने वाले व्यक्ति डिप्रेशन से मुक्त होते है।


शोधकर्ता के अनुसार बुजुर्ग व्यक्ति को चलना यह अधिक पसंद या लोकप्रिय है। यह व्यायाम एक भी पैसा खर्च नही करता है।

चलने के फायदे - Benefits of walking :

✦ रोज 30/60 मि़ पैदल चलने से हार्ड अटॅक की शक्यता कम होती है।

✦ दिन में 30 मि पैदल चलने से डिप्रेशन में जाने की 36 टक्के संभावना कम हो जाती है।

✦ हफ्ते में दो घंटा पैदल चलने से ब्रेन स्ट्रोक होने की संभावना 30 टक्के कम हो जाती है।

✦ पैदल चलने से एक ही बार में शारीरिक व मानसिक व्यायाम होता है।

✦ हड्डिया में डी जिवनसत्व के लिए सवेरे की कोमल धुप बहोत जरूरी है, इसलिए हर दिन सवेरे पैदल चलना शरीर के लिए वेहद ही लाभकारी है।

✦ सवेरे पैदल चलने से वायुमेंडल के शुद्ध ऑक्सिजन लाभ मिलता है, जिससे हमें बहोत फायदा होता है।

✦ दिनभर काम करने से तन-मन में आनेवाली थकान भि पैदल चलने से मिट जाती है।

✦ चलने से तनाव और थकान, चिडचिडापन दुर हो जाता है, पैदल चलने से मानसिक संतुलन बना रहता है।

✦ पैदल चलने से निंद भी अच्छी आती है।

✦ मन के एकाग्रता व चिंतन के लिए चलना फायदेशीर बताया गया है।

✦ रोज एक घंटा चलने से घुटनों का दर्द कम हो जाता है, ऐसा शोधकर्ताओं का मानना है।

✦ वजन कम करने के लिए यह व्यायाम भि उत्तम बताया गया है।


✦ चलने से पचन क्रिया सुधारता है, पचन क्रिया के विकार भि कम होते है।

✦ रोज 30 मि पैदल चलने से आयु 3 साल बढती है, ऐसा वैज्ञानिको का मानना है।

✦ पैदल चलने से जिवन में उमंग उत्साह बढता है, कामकाज में मन लगा रहता है।

✦ नियमित चलने से कुछ विशिष्ठ प्रकार के कॅन्सर से बचाव होता है।

✦ रोज चलने से रोगप्रतिकारक शक्ति मजबुत होने में मदद मिलती है।

✦ नियमित चलने से पिठ का दर्द, हृदय का रोग, मधुमेह, हाय ब्लडप्रेशर, सांस लेने में तकलिफ है तो उसे कंट्रोल किया जा सकता है।

✦ नियमित चलने से फुफुस की कार्यक्षमता बढती है।

✦ नियमित चलने से हड्डियों की मजबुती बढती है।

✦ नियमित चलने से घुटनों के उपर की पैरों की हडिडयों, पांव की हड्डिया मजबुत होती है।

✦ ऑंखों में मोतियाबिंदु की शक्यता कम होती है।

✦ नियमित चलने की आदत से हृदय विकारों से मृत्यु का प्रमाण 37 टक्का कम होता है।

✦ जल्दी-जल्दी चलने से हृदय की गती बढती है।

✦ नियमित चलने से चयापचय ग्रंथि में सुधार आता है, अंर्तस्त्रावी ग्रंथि का कार्य सुधारता है।


✦ रोज 30/40 मि पैदल चलने से मधुमेह की संभावना 20 टक्का कम होती है।

✦ नियमित एक घंटा चलने से वजन कम करने में मदद मिलती है।

✦ पैदल चलने से शरीर की गर्मि कम होती है।

✦ चलने से शरीर अत्याधिक बढी हुई चर्बी कम होने में लाभदाई सिद्ध होता है।

✦ नियमित चलना यही अच्छे स्वस्थ के लिए बहोत जरूरी है।

आजकल पैदल चलने के फायदो के बारे में बहोत से लोंगो में जागरूकता आई हैं। सवेरे सवेरे बहोत लोग पैदल चलते हुये दिखाई देते है।

कृपया यह मैसेज सबको भेजे।

  रोजाना पैदल चलने से होंगे यह लाभ - This benefit will be done daily by walking

Tags :- Technology, Technical Study, Online job, Future Tech, Internet, Online Study, Computer, Health, Science, Fashion, Design, Solar System, पौराणिक रहस्य.

संबंधित कीवर्ड :
रोजाना पैदल चलने से होने वाले लाभ - Walks daily, रोजाना पैदल चलने से होंगे यह लाभ - This benefit will be done daily by walking, पैदल चलने से होने वाले फायदे - Benefits of Walking, पैदल चलना सेहत के लिए लाभकारी है - Walking is beneficial for health. 


दोस्तों, उम्मीद है की आपको रोजाना पैदल चलने से होंगे यह लाभ - This benefit will be done daily by walking यह आर्टिकल पसंद आया होगा। यदि आपको यह आर्टिकल उपयोगी लगता है, तो निश्चित रूप से इस लेख को आप अपने दोस्तों एवं परिचितों के साथ साझा करें। और ऐसे ही रोचक आर्टिकल की जानकारी प्राप्ति के लिए हम से जुड़े रहे और अपना Knowledge बढ़ाते रहे।

धन्यवाद।

                                                                                                                         Author By : BK गीता...
यह भी जरुर पढ़े 

Popular Posts