Friday, 25 May 2018

इलेक्ट्रिक पंप की मूल जानकारी - Basic Information of Electric Pump

इलेक्ट्रिक पंप की मूल जानकारी - Basic Information of Electric Pump
            दोस्तों आज हम इस लेख से आपको विद्युत पंप के बारे में जानकारी देने वाले है। घर काम, उची इमारते, औद्योगिक क्षेत्रों, और सेतकाम आदि में हम विद्युत पंप का उपयोग करते है।  पंप के माध्यम से कई द्रव पदार्थ और वायु पदार्थ यांत्रिकी माध्यम से खींचे जाते है। पंप की कार्य पद्धत मुख्य रूप से विद्युत ऊर्जा पे निर्भर है। उदा. Electrical Energy, Technical Energy, Engine, पवन ऊर्जा , Technical प्रणाली से कुहे का जल ( पानी )  निकलना , तलाव की सुद्धिकरण , कार इंडस्ट्रीज एरेशन के लिए , तेल भरने के लिए।  आदि कामो के लिए विद्युत पंप का उपयोग किया जाता है।



विद्युत पंप के अलग अलग भाग : 

 ➦  केसिंग ( Casing ) : 

           यह ऐसी प्रणाली है की जिस के माध्यम से बाहरी अवगुणो को सरक्षण देता है।

 ➦  मोटर : 

           पंप को पावर देने वाला एकमात्र एकक।
           AC और DC यह मोटर के ऊर्जा स्त्रोत है।

 ➦  इमपेलर : 

           यह एक पंप की गोलाकार चकती है ,इस के माध्यम से द्रव पदार्थ को गति मिलती है।

 ➦  शाफ़्ट : 

           यह इमपेलर मोटर से जुड़ा रहता है , इसलिए पंप को पावर मिलता है।

 ➦  व्हॉल्व : 

           पंप से द्रव पदार्थ को वहन करने के लिए नियंत्रित करता है।


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विद्युत पंप के प्रकार : 

पिस्टन पंप : 

        पिस्टन पंप एक  प्रणाली है जिसे आप सभी जानते है।  पिस्टन पंप याने हैंड पंप है , जिसे हम बोअरवेल के नाम से जानते है।  ऐसे पंप विद्युत मोटर, डिझेल इंजिन, हवा का दबाव आदि घटको से उपयोग में लाए जाते है।
इलेक्ट्रिक पंप की मूल जानकारी - Basic Information of Electric Pump

पिस्टन पंप के भाग : - 

➤  सिलेंडर - 

    मजबूती के लिए बाहर से लोहे का उपयोग और करोझन से बचने के लिए  अंदर से पीतल की कोटिंग होती है।

➤  पिस्टन -

   यह घटक सिलेंडर में दाहे - बाहे या ऊपर - निचेहोता है।  इस के माध्यम से पानी को जमीन से ऊपर लाया जाता है।

➤  व्हॉल्व -

     इस सिस्टिम से पानी का प्रवाह एक ही दिशा में होता है, अगर दिशा बदले तो यह लॉक हो जाता है।

विशेष गुण :- 


  ऐसे पंप कम गति पर चलते है। इसलिए इसे हैंड पंप के नाम से जानते है।

  सिलेंडर को पानी में एक बड़े से रॉड पाइप के अंदर से ऊपर एक मोटर या हैंडल को जोड़ते है। इसलिए यह
    ( 200 - 300 फिट ) निचेसे पानी को ऊपर लाने में मदत होती है।

  ऐसे पंप को प्राइमिंग ( पहलेसे पानी भरना ) की जरुरत नहीं होती।


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सेंट्रीफ्यूगल पंप :

      गोल घूमने वाले पंखो से पानी बाहर की और फेका जाता है , बिच की पोली जगह से बहार के पानी को खींचा जाता है , और दोनों फ़ोर्स को एक दिशा में सर्कुलेट किया जाता है।
इलेक्ट्रिक पंप की मूल जानकारी - Basic Information of Electric Pump

रचना : 

       सेंट्रीफ्यूगल पंप सेंट्रीफ्यूगल के सिद्धांतो पे चलता है। सेंट्रीफ्यूगल पंप के केसिंग पर इमपेलर लगा होता है। पानी खींचने के लिए इनकमिंग बाजु से सक्शन पाइप लगया जाता है। हर बार प्राइमिंग रोकने के लिए सक्शन के ऐड को फुट व्हॉल्व लगा होता है। पंप बंद होने पर पानी के बहाव को रोक देता है। याने दुबारा पंप ऑन करने पर पानी भरना नहीं पड़ता। पानी को ऊपर लेन के लिए आउट लेट पाइप का उपयोग करते है। पंप को यांत्रिक शक्ति देने के लिए इलेक्ट्रिक मोटर लगाई जाती है।



विशेष गूण : - 


प्राइमिंग - 

• शुरुआत में हवा का दाब कम होने से पानी को पंप में डालना पड़ता है , और फिर दबाव ज्यादा होने से पानी
    बाहर खींचा जाता है।

• यह पंप का रोटेशन अधिक गति में होना चाहिए , इसलिए मोटर या इंजिन हमेसा उपयोग में लाया जाता है।

• सक्शन पाइप के निचे फुट व्हॉल्व लगाने से , पानी लॉक हो जाता है और दुबारा पंप चालू करने में आसानी
    जाती है।

सबमर्सिबल पंप : 

                 दोस्तों सबमर्सिबल पम्प के बारे में आप सभी जानते है। यह एक पानी के अंदर उपयोग में आने वाला स्त्रोत है। यह जमीन के अंदर के पानी को ऊपर लाने की विशेषता रखता है। आज के दिन में सभी जगह सबमर्शिबल पंप का उपयोग किया जा रहा है। यह पंप में पानी के खिचाव के लिए नए इम्पेलर का इस्तेमाल किया जाता है। पंप में अलग अलग स्टेज होते है जिस के माध्यम से निचे का पानी ऊपरी हिसे में जल्दी आता है।


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