Sunday, 20 May 2018

How the engine works in vehicles - वाहनों में इंजिन कैसे काम करता है

नमस्कार दोस्तों आप सभी को पता है, जो हम दैनंदिन उपयोग में वाहनों का इस्तेमाल करते है. वो वाहन कैसे चलता है. और अगर वाहन अचानक बंद हो जाए तो क्या करे और कैसे करे, वाहनों में इंजिन कैसे काम करता है - How the engine works in vehicles, वाहनों में इंजिन का कार्य, इंजिन का परिचय कैसे करे, Engine kaise kam karta hai, Engine ke prakar kitane hai, Petrol engine aur Diesel engine ka kary kya hai. सभी जानकारी आपके भाषा में.



वाहनों में इंजिन कैसे काम करता है - How the engine works in vehicles
अब आपको इस लेक के द्वारा हम उसके बारे मे सविस्तर जानकारी बताने वाले है. जो वाहनों के इंजिन और उसके हिस्से के बारे में उपयुक्त जानकारी मिलने वाली है.

वाहनों में इंजिन कैसे काम करता है - How the engine works in vehicles :

इंजिन एक वाहनों का ऐसा घटक है जो वाहनों को चलने में मदत करता है. इंजिन की वाहनों में महत्वपूर्ण भूमिका है. यह रासायनिक ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरित करता है. इस ऊर्जा का उपयोग वाहन को चलने के लिए किया जाता है. इंधन को जलाने के और कई सारे तरीके है, जैसे की आतंरिक दहन या बाहरी दहन (Combustion) वाला इंजिन कहा जाता है. इसमें से आतंरिक दहन इंजिन वाहनों में उपयोग होता है. और बाहरी दहन इंजिन इंडस्ट्रियल पावर प्लान्ट में उपयोग किया जाता है. ऑटोमोटिव इंजिन को भी आंतरिक दहन इंजिन कहते है क्युकी आंतरिक दहन इंजिन में इंजिन के अंदर बहुत अधिक मात्रा में (High Combustion) इंधन को जलाया जाता है.


आतंरिक दहन इंजिन के मुख्य दो प्रकार आते है -

• रेसिप्रोकेटिंग इंजिन
• रोटरी इंजिन


रेसिप्रोकेटिंग इंजिन याने पिस्टन की गति ऊपर निचे और आगे पीछे जाना, लगभग ये इंजिन सभी वाहनों में उपयोग किया जाता है. इस प्रकार के इंजिन को पिस्टन इंजीन के नाम से भी जाना है. रोटरी इंजिन में स्पिन करने वाला या घुमाने वाला रोटर होता है. ये इंजिन का उपयोग रेसिंग कार या बाइक में होता है.

वाहनों में इंजिन कैसे काम करता है - How the engine works in vehicles

रेसिप्रोकेटिंग इंजिन के दो प्रकार होते है :

• स्पार्क - इग्निशन इंजिन :-

इस इंजिन में ज्यादा तर अधिक तेजी वाले इंधन का उपयोग होता है. जिससे आसानी से भाप बन सकता है, जैसे पेट्रोल या गैसोलीन. इंधन के सिलेंडर में जाने से पहले इंधन और हवा का मिश्रण कार्बोरेटर में किया जाता है. जिससे इंधन को जलने में आसानी होती है. इसके बाद जलने योग्य मिश्रण को इग्निशन सिस्टिम से बिजली का स्पार्क दिया जाता है और इंजिन स्टार्ट होता है. (How the engine works in vehicles - वाहनों में इंजिन कैसे काम करता है)

• कॉम्प्रेशन इग्निशन इंजिन :-

इस इंजीन को डिझेल इंजिन के नाम से भी जाना जाता है. जो केवल इंजिन सिलेंडर में सुद्ध हवा प्रवेश करती है, जिसे अधिक तापमान और दबाव पर कॉम्प्रेस किया जाता है. इस हवा को इतना कॉम्प्रेस किया जाता है की उसका तापमान 5380 डिग्री से. अधिक पहुँचता है. उसके बाद दिसेल को इंजिन सिलेण्डर में स्प्रे कर के इंधन को जलाया जाता है. इस प्रक्रिया में डिझेल के इंजेक्टर के द्वारा छोटे छोटे और बारीक़ कणों में रूपांतरित किया जाता है. इसलिए डिझेल इंजिन को कॉम्प्रेशन इंजिन के नाम से भी जाना जाता है.


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आतंरिक दहन इंजिन के अलग अलग हिस्से और उनका उपयोग :

सिलेंडर :-
वाहनों में इंजिन कैसे काम करता है - How the engine works in vehicles

यह एक इंजिन का मुख्य भाग है जिसमे पिस्टन की गति पैदा होती है. इसे बहुत अधिक तापमान और दबाव सहन करना होता है (लगभग 2200 डिग्री से.) क्युकी सिलेंडर के अंदर प्रत्यक्ष दहन प्रक्रिया होती है जिससे तापमान बढ़ता है. इसलिए इसकी सामग्री ऐसी होना चाहिए की ये मजबूती बनाए रखे. इसलिए आम तौर पर इसे बनाने के लिए साधारण ढलवा लोहा इस्तेमाल है, किन्तु हैवी ड्यूटी इंजिन मे मिश्र धातु स्टील का इस्तेमाल किया जाता है.

सिलेंडर हेड :-
वाहनों में इंजिन कैसे काम करता है - How the engine works in vehicles

यह इंजिन के ऊपरी भाग में होता है जिसे सिलेंडर हेड कहते है. इसमें इनलेट व्हॉल्व, एक्सस्ट व्हॉल्व और स्पार्क प्लग होता है. इनलेट व्हॉल्व से इंधन को इंजिन सिलेंडर में भेजा जाता है, और एक्सस्ट व्हॉल्व से कार्बन वायु को वातावरण में भेजा जाता है.

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पिस्टन और पिस्टन रिंग :-
पिस्टन एक इंजिन का मुख्य भाग है जिसे हम इंजिन का दिल भी कह सकते है. जिससे इंजिन कार्य करता है. पिस्टन का कार्य इस प्रकार है जो सिलेंडर में कॉम्प्रेशन स्ट्रोक के दौरान मिश्रित इंधन को कॉम्प्रेस करके ताकद को कनेक्टिंग रोड तक भेजना और पावर स्ट्रोक के दौरान क्रैंक तक भेजना होता है. पिस्टन की रिंग पिस्टन के बाहरी भाग में होती है. इससे पिस्टन और सिलेंडर के बिच की गैप में टाइट फिटिंग मिलती है. पिस्टन रिंग में मुख्यत: तीन रिंग होती है.

• ऑइल रिंग
• पिस्टन रिंग
• प्रेसर रिंग


कनेक्टिंग रॉड :-
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यह आम तौर पर गोलाकार , टी , या एच, सेक्शन के आकर का होता है. इसकी मजबूती बढाने के लिए अधिक पॉलिस की जाता है. इसके छोटे सिरे पिस्टन के साथ जोड़े जाते है और बड़े सिरे क्रैंक पिन से जुड़े रहते है. इसमें छोटे सिरे के बेअरिंग से लेकर बड़े सिरे के बेअरिंग तक ल्युब्रिकेटिंग ऑइल भेजने के लिए रास्ता होता है.

क्रैंक और क्रैंक शाफ़्ट :-
क्रैंक और क्रैंक शाफ़्ट स्टील धातु से बने रहते है जिसकी ढलाई चिकनी फिनिशिंग के साथ बनाए जाते है. इन दोनोको एक की के द्वारा जोड़े जाते है, क्रैंक शाफ़्ट को मुख्य बेअरिंग का सहारा दिया जाता है और उतार चढाव को एक सामान बनाने के लिए एक फ्लायव्हील नामक हैवी व्हील होता है. फ्लाईव्हील में पॉवर स्ट्रोक के दौरान एनर्जी स्टोर की जाती है और जब क्लच जुड़ता है तब व्हील को चलकर एनर्जी भेजी जाती है.


कार्ब्युरेटर :-
इसका कार्य इस प्रकार है की यह पेट्रोल इंजिन में इंधन और हवा को मिश्रित रूप में बनाकर एक समान पूर्ति करता है. सिलेंडर में जाने वाले मिश्रण को थ्रोटल व्हॉल्व के उपयोग से नियंत्रण किया जाता है.

स्पार्क प्लग :-
स्पार्क प्लग का कार्य इंजिन में इंधन का दबाव निर्माण होने के बाद पॉवर स्टॉक के पहले इग्नाइट करना है. जिससे इंधन जलता है और पॉवर तैयार होता है. स्पार्क प्लग को केवल पेट्रोल इंजिन में ही उपयोग किया जाता है.

फ्यूल इंजेक्शन पंप :-
यह डिझेल इंजिन में फ्यूल नोझल के जरिए से फ्यूल को उच्च दबाव देकर कॉम्प्रेशन स्ट्रोक के सिरे पर बल पूर्वक भेजता है.

फ्यूल पंप :-
इसका कार्य यह है की इंधन को बारीक़ कानो में रूपांतरित करके सिलेंडर में भेजना है. जिससे इंधन जलने में मदत मिलती है.


टिप्पणी :- इन दिनों फ्यूल इंजेक्टर का उपयोग सभी आधुनिक वाहनों में किया जाता है. और स्पार्क इग्निशन इंजिन में भी किया जाता है.

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