Thursday, 24 May 2018

घर बैठे इन्व्हर्टर कैसे लगाए - How to apply sitting inverter in the house

घर बैठे इन्व्हर्टर कैसे लगाए - How to apply sitting inverter in the house
             दोस्तों आप सभी के घर में इलेक्ट्रिकल उपकरण है, यह सभी उपकरण विद्युत धारा पर निश्चित है। कही बार घर में कुछ महत्वपूर्ण काम हो तभी विद्युत करंट बंद हो जाता है। इस समय विद्युत करंट सप्लाय कैसे करे, विद्युत मोटर कैसे चालु करे, और अन्य विद्युत उपकरणों को विद्युत सप्लाय कैसे दे यह सब हम इस लेख से जानने वाले है। सभी इलेक्ट्रिकल उपकरणों को उपयोग में लाते समय सभी सेफ्टी का उपयोग करना जरुरी है। जैसे सेफ्टी हैंड दस्ताने, टेस्टर, आदि का उपयोग करे। हमारे जीवन में इलेक्ट्रिकल उपकरण महत्वपूर्ण है। तो सभी उपकरणों के बारे में जानना जरुरी है, जैसे विद्युत पंप और इन्व्हर्टर की रचना, इन्व्हर्टर को उपयोग में लाने के तंत्र, परिचय डी. ओ. एल. स्टार्टर, आदि।


 इन्व्हर्टर :-

यह एक इलेक्ट्रिकल सर्किट पैनल है। जो बैटरी से आने वाले डी. सी. वोल्टेज को यह ए. सी. वोल्टेज में कन्व्हर्ट करके घर में उपयोगी आने वाले करंट से साथ रूपांतर करता है। और बैटरी की चार्जिंग कम होने पर उसे एक इलेक्ट्रिक सर्किट पैनल से चार्जिंग किया जाता है। उसे बैटरी चार्जर बोलते है।  जब मुख्य विद्युत सर्किट से विद्युत आना बंद होता है तभी घर के अन्य विद्युत उपकरणों को चलाने के लिए हम ज्यादा तर इन्व्हर्टर का उपयोग करते है। जब विद्युत सर्किट से डी. सी. वोल्टेज को ए. सी. वोल्टेज में कन्वर्ट के लिए हमें इन्व्हर्टर का उपयोग करना पड़ता है।

इन्व्हर्टर और बैटरी की जोड़नी :-


इन्व्हर्टर + बैटरी + बैटरी के साथ एक पर्यायी विद्युत सर्किट सिस्टम तैयार होती है। लेकिन जब आपके घर से विद्युत करंट बंद हो जाए तो तुरंत यह सुरु नहीं हो सकता , उस हर बार आपको चालू करना पड़ेगा। इसे ऑफ़लाइन सिस्टम कहते है।

 जब मुख्य विद्युत सप्लाय बंद हो जाये तो उसे उसी समय या अपने आप चालू करना है तो इन्व्हर्टर + बैटरी + ब्याटरी चार्जर के साथ में मेन्स फेल्युअर सेंसिंग सर्किट का उपयोग करे। मेंस फेल्युअर सेंसिंग सर्किट मुख्य विद्युत प्रवाह का निरक्षण करता है। और टूटे हुए विद्युत प्रवाह को अपने आप याने इन्व्हर्टर + बैटरी + ब्याटरीचार्जर + मेंस फेल्युअर सेंसिंग सर्किट के साथ विद्युत प्रवाह को बनाने में मदत करता है। और घर कामो में विद्युत करंट सप्लाय होता है।

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➢  इन्व्हर्टर की क्षमता :

( 400 -800 -1000 -2000 व्ही. ए. आदि  )
चलने वाले उपकरण -  लाइट, पंखा, टी.व्ही. आदि उपकरण

➢  इन्व्हर्टर का काम :

 यह एक ऐसा यूनिट है जो सम्पूर्ण एक पॉवर सोर्स का एक भाग है। जिसके माध्यम से कई सारे विद्युत प्रवाह निर्माण होते है और वह UPS के माध्यम से अन्य उपकरणों को पॉवर सप्लाय करता है। जब मुख्य पावर अप्लाय से पावर कट होता है तो यह डी सी. करंट को ए सी में कन्वर्ट करता है।

➢  इन्व्हर्टर और बैटरी की देखभाल :

अच्छे काम का प्रदर्शन के लिए इन्व्हर्टर की देखभाल करना जरुरी है। इसे सकारात्मक देखभाल कह शकते है। इन्व्हर्टर एक अलग अलग दो भागो का एक घटक है जो बैटरी से ऊर्जा के स्त्रोत को इलेक्ट्रॉनक सर्किट के मदत से उपयोग में लाया जाता है।


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➢  इन्व्हर्टर :

 धूल विद्युत उपकरणों की महा शत्रु है ,  धूल से गीलापन आने से Short Circuit हो सकता है।  इसलिय नियमित उसके बॉक्स की सफाई करना जरुरी है। बॉक्स के अंदरूनी भाग में कुलिंग फैन की आवश्यकता है।  जिसके माध्यम से इन्व्हर्टर को गरम होने बचा ले। सभी समय कपडे से धूल और मिटटी के बारीक़ कण व्हाकुम क्लीनर से क्लीन करवा ले।

➢  कनेक्शन : 

सभी प्रकार के वायरिंग कनेक्शन तपासे और जरुरत है तो स्क्रू के माध्यम से उसे टाइट करे।

➢  बैटरी : 

बैटरी के अलग अलग टर्मिनल ( पोसिटिव , निगेटिव ) को हमेसा अछे कपडे से साफ़ करे।  कुछ तंत्रज्ञान UPS में इलेक्ट्रोलाइट फील बैटरी का उपयोग किया जाता है, उसे नियमित देखभाल की आवश्यकता रहती है।

➢  तापमान : 

बैटरी का तापमान समय समय पर जाचे।

➢  टर्मिनल : 

टर्मिनल पे ऑक्सिडेशन के वजह से सफेद थर जम जाता है। इसलिए समय समय पर उसे जाचे।

➢  लेव्हल : 

इलेक्ट्रोलाइट लेव्हल समय पर तपासे। बैटरी का इलेक्ट्रोलाइट का लेव्हल कम हुआ तो उसे सही समय पर डिस्टिल पानी भरवा ले और सही तरीके से जाचे।

➢  बैटरी वोल्टेज : 

वोल्ट मीटर के माध्यम से बैटरी का वोल्टेज गिने और उसे निश्चित करके रखे।


Maintenance Record :- 

     सभी maintenance की तारीख एक बुक पे नोंद करे।
तारीख :-
बैटरी संख्या :-
बैटरी वोल्टेज :-

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