Saturday, 19 May 2018

वाहन चलाने के नियम, पंजीकरण और ड्रायविंग लाइसेंस - Vehicle driving rules, registration and driving license

वाहन चलाने के नियम, पंजीकरण और ड्रायविंग लाइसेंस - Vehicle driving rules, registration and driving license
वाहन चलने के नियमों की संकल्पना का मूल विचार यातायात को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाता है। वाहन चलाने के नियम बहुत महत्वपूर्ण है सरकार ने नागरिको के लिए वाहन चलाने के नियम बनाए गए है।  नियमो का पालन प्रत्येक व्यक्ति , नागरिक को करना चाहिए।  यदि आप इसका उल्लघन करते है तो आपको जुर्माना देना होगा या अदालत के सामने पेश होना होगा।

 नियम और उनके नियमो की संख्या के साथ जुर्माने का विवरण :-

वाहन चलाने के नियम, पंजीकरण और ड्रायविंग लाइसेंस - Vehicle driving rules, registration and driving license

पंजीकरण  - Registration :- 

जब एक वाहन को खरीदा जाता है तो राज्य परिवहन कार्यालय में इसका पंजीकरण किया जाता है।  सभी जिलों में सड़क परिवहन कार्यालय ( RTO ) होता है।  यह आर.टी.ओ. सड़क पर चलने वाले वाहनों को एक पंजीकरण संख्या देता है ।  प्रत्येक वाहन  पंजीकरण प्लेट लगाईं जाती है , जिसे सामान्य तौर पर नंबर प्लेट कहते है ।  इन नंबर प्लेटो को वाहन के आगे या पीछे लगाया जाता है।


पंजीकरण के नियम और प्रक्रिया :-

कोई भी व्यक्ति किसी मोटर वाहन को या मोटर वाहन मालिक अपने वाहन को किसी सार्वजनिक या अन्य स्थान पर तब तक नहीं चला सकता , जब तक वह भारतीय मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अध्याय 4 के अनुसार अपने वाहन का पंजीकरण नहीं करता।

पंजीकरण कहा कराया जाए ? 

 मोटर वाहन के प्रत्येक मालिक को पंजीकरण प्राधिकारी द्वारा अपने वाहन का पंजीकरण करना होगा , जिनके अधिकार क्षेत्र में उसका निवास या व्यापार का स्थान है।  जहा सामान्य तौर पर वाहन को रखा जाता है।

अस्थायी पंजीकरण क्या है ? 

अस्थायी पंजीकरण का आवेदन केंद्रीय मोटर वाहन नियम , 1989  के प्रपत्र 20  में  कराया जाएगा , जो पंजीकरण के लिए तय किया गया है और अधिनियम के तहत पंजीकरण करने वाले प्राधिकारी या परिवहन आयुक्त द्वारा मान्यता प्राप्त नए मोटर वाहनों की बिक्री करने वाले डीलर द्वारा इस पर  ''अस्थायी'' अंकित किया जाएगा।

यह अनिवार्य नहीं है की इस प्रपत्र में  23 से 32 तक  भरा जाए , इसके बावजूद की यह एक परिवहन वाहन है।

स्थायी पंजीकरण क्या है ? 

 मोटर वाहन के पंजीकरण का आवेदन पंजीकरण प्राधिकारी में उक्त वाहन प्रदायगी की तिथि के 7 दिनों के अंदर प्रपत्र 20 में किया जाए जिसमे यात्रा की अवधि शामिल नहीं है और इसके साथ प्रपत्र 21 में बिक्री प्रमाणपत्र होना चाहिए।
सड़क पर चलने के लिए उपयुक्त होने का प्रमाणपत्र प्रपत्र 22 में विनिर्माता की और से ( बॉडी के निर्माता की और से प्रपत्र 22 )

    ➤  वैध बीमा प्रमाणपत्र
    ➤  पते का प्रमाण ( राशन कार्ड , बिजली बिल इत्यादि.......... )
    ➤  ट्रेलर या सेमी ट्रेलर के मामले में एसटीइए की अनुमोदन प्रती
    ➤  पूर्व सेना वाहन होने के मामले में प्रपत्र 21 में संबधित प्राधिकारियों की और से मूल बिक्री प्रमाणपत्र
    ➤  प्रदूषण नियत्रण अधीन प्रमाणपत्र
    ➤  आयात किए गए वाहनों के मामले में सिमा शुल्क समाशोधन प्रमाणपत्र
    ➤  सीएमवी नियमो के नियम 81 में निर्दिष्ट उपयुक्त शुल्क
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ड्राइविंग लाईसेंस ( Driving License )

जैसे की आप जानते है की वाहन चलने के लिए एक व्यक्ति या चालक के पास उसे चलाने का एक वैध दस्तावेज ( प्रमाणपत्र ) होना चाहिए।  इस दस्तावेज को ड्राइविंग लाइसेंस कहते है।  हम कह सकते है की यह ड्रायवर का लाइसेंस / ड्रायविंग लाइसेंस है।  यह अधिकारिक दस्तावेज है जिसमे बताया जाता है की यह व्यक्ति एक मोटर वाहन , जैसे मोटर साइकल , कार , ट्रक या बस को सार्वजनिक सडको पर चला सकता है।  सभी वाहनों को चलने की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है, जबकि ५० सीसी से कम क्षमता वाली मोटर साइकल को 16 वर्ष की आयु में चलाया जा सकता है।

मोटर वाहन अधिनियम , 1988 के अनुसार एक वैध ड्राइविंग लाइसेंस सार्वजनिक सडको पर कोई मोटर वाहन चलने के लिए अनिवार्य है।


  ➤  ड्राइविंग लाइसेंस मोटर वाहन निरीक्षक के कार्यालय में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (  RTO ) द्वारा
        व्यक्ति के वाहन चलाने की परीक्षा पास करने में और आवश्यक आयु सिध्द हो जाने पर जारी किया
        जाता है।
  ➤  भारत में ड्राइविंग लाइसेंस मोटर साइकल के लाइसेंस , लाईट मोटर वाहन ( LMV ) लायसेंस तथा
        हैवी  मोटर वाहन ( HMV ) लाइसेंस में बांटे जाते है।
  ➤  सीखने वाले व्यक्ति का लाइसेंस मोटर सैध्दांतिक परीक्षा पास करने के बाद जारी किया जाता है।
  ➤  ड्राइविंग लाइसेंस का विधान सड़क विनियमन के नियम और मोटर वाहन अधिनियम , 1988 के
         माध्यम से तय किया जाता है।
   ➤  वाहन के ड्राइवर को वाहन चलते समय लाइसेंस की मूल प्रति अपने साथ रखनी जरुरी  है।


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भारत में ड्राइविंग लाइसेंस के प्रकार -Types of Driving License in India

किसी सार्वजनिक स्थान पर मोटर चलने के लिए एक प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य है।  प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस का अर्थ एक व्यक्ति को उस विशेष श्रेणी के वाहन चलाने का अधिकार प्रदान करना। आर टी ओ कार्यालयों द्वारा अलग अलग प्रकार के लाइसेंस जारी किए जाते है।

लर्निग ड्राइविंग लाइसेंस :-                                                                                                   

                         यह अस्थायी लाइसेंस है जो जारी होने की तिथि से 6 माह तक होती है। इसे मूल रूप से मोटर वाहनों को चलना सीखने के लिए जारी किया जाता है।                                                                          


पर्मानेंट ड्राइविंग लाइसेंस :-

                          यह लाइसेंस जारी किया जाता है जो लर्निंग लाइसेंस जारी करने की तिथि से 30 दिन बाद ( 180 दिन के अंदर आवेदन करने के लिए  ) इसे पाने के पात्र बन जाते है।  ऐसा माना जाता है की एक व्यक्ति को पर्मानेंट ड्राइविंग लाइसेंस तभी मिलती है जब वह वाहन की प्रणाली , उसे चलाने , यातायात के नियमो और विनियमों से अछि तरह परिचित है।              
                     
इस लिए पिछली पोस्ट में यातायात नियमों के बारे में जाना है।       
                                       

डुप्लीकेट ड्राइविंग लाइसेंस :-                                                                                 

यह लाइसेंस खो जाने या चोरी हो जाने पर जारी किया जाता है। इसमें प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज है।  खोए हुए लाइसेंस की एफ.आई.आर. ( F. I. R. ), आर.टी.ओ. कार्यालय से चालन समाशोधन की रिपोर्ट ( वाणिज्यिक लाइसेंस नविकरण के मामले में ) और एल.एल.डी. से आवेदन पत्र।  इन विवरणों का सत्यापन प्राधिकरण द्वारा अपने रिकार्ड के साथ किया जाता है।  यहाँ लाइसेंस की अवधि भी पिछली लाइसेंस के समान होती है।  यदि लाइसेंस खो जाता है और 6 माह बाद इसकी अवधि समाप्त हो जाती है , तो इसके लिए परिवहन विभाग के मुख्यालय से अनुमति की जरुरत होती है।

अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस  :-

                          मोटर लाइसेंस प्राधिकरण द्वारा अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस भी जारी किया जाता है।  इस लाइसेंस की वैधता एक वर्ष की होती है। देश में आने वाले व्यक्ति को एक वर्ष की अवधि के अंदर वहां  से अपना लाइसेंस लेना होता है।  पते के प्रमाण और जन्म प्रमाणपत्र के अलावा इसके लिए वैध पासपोर्ट और वैध वीजा के साथ आवेदन किया जा  सकता है।

मोटर साइकल या टू व्हीलर लाइसेंस :- 

                       क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण ( आर.टी.ओ.) द्वारा टू व्हीलर लाइसेंस दिया जाता है , जिससे केवल बाइक , स्कूटर और मोपेड जैसे टू व्हीलर वाहनों को चलाने की अनुमति होती है।

लाइट मोटर वाहन लाइसेंस ( L. M. V. )  :- 

                        लाइट मोटर वाहन लाइसेंस जैसे ऑटो रिक्शा , मोटर, कार , जीप , टैक्सी , थ्री व्हीलर , डिलीवरी वैन अदि को चलाने के लिए लाइसेंस दिया जाता है।

हैवी मोटर वाहन लिइसेन्स ( H. M. V.) :-

                        हैवी मोटर वाहन लाइसेंस जैसे ट्रक , बस , टूरिस्ट कोच , क्रेन ,अदि को चलाने के लिए लाइसेंस दिया जाता है।  एक व्यक्ति के पास HMV लाइसेंस होने पर वह हलके वाहन चला सकता है , किन्तु LMV लाइसेंस रखसने वाला व्यक्ति भारी वहां नहीं चला सकता है। 


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