Sunday, 29 July 2018

भारतीय ध्वज की बनावट ( संरचना ) - The structure of our Indian flag

मेरे प्यारे मित्र आप सभी को नमस्कार, हमारे पृथ्वी पर अन्य प्रकार के देश है। सभी देश वाशियो को अपने अपने देश के प्रति प्यार होता है। सभी देशो की पहचान राष्ट्रिय ध्वज से होती है। उसी तरह भारत में राष्ट्रिय ध्वज तिरंगा है। दोस्तों आपको राष्ट्रिय झंडे, तथा झंडे को कैसे फरहाना और राष्ट्रिय गान क्या है यह जानना है। तो चलिए दोस्तों हमे जो जानकारी मिली उसी के आधार पर आपको इस आर्टिकल में अपने देश का ध्वज और राष्ट्रिय गान कैसे तैयार किया इसके बारे में बताने जा रहे है।भारतीय ध्वज की बनावट ( संरचना ) - The structure of our Indian flag

हमारे भारतीय ध्वज की बनावट ( संरचना ) - The structure of our Indian flag

अपना भारत देश 15 अगस्त 1947 में स्वतंत्र हुआ आप सभी जानते हो। लेकिन आप सभी को बता दे की भारत में इससे पहले अधिकतर लोग जिस झंडे को अपना राष्ट्रिय ध्वज मानते थे उसमे तिन रंग थे। पहिला रंग - केसरिया था, दूसरा रंग - सफ़ेद, और तीसरा रंग - हरा था। और इस झंडे के सफ़ेद रंग के पट्टी पर चर्खे की बनावट थी। इस झंडे को संघटित राजनीतिक दल काँग्रेस ने सन 1931 में अपनाया था। भारत स्वतंत्र होने पर इस झंडे में परिवर्तन किया गया, भारत के सविधान ने इसे स्वीकृत किया। इसमें सिर्फ सफ़ेद पट्टी के उपर बने चर्खे के जगह पर चक्र को स्थान दिया गया। भारत स्वतंत्र होने पर परवर्तित झंडे को 22 अगस्त सन 1947 में प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू जी के द्वारा फरहाया गया।


भारतीय राष्ट्र ध्वज की लम्बाई - चौड़ाई 3 : 2 में है, अर्थात लम्बाई अगर 1 ½ मीटर है तो चौड़ाई 1 मीटर और यदि लम्बाई 3 मीटर है तो चौड़ाई 2 मीटर दी गई  है । रास्ट्रीय ध्वज की तीनो पट्टियों की चौड़ाई एक दुसरे से समान्तर होती है।

रंगों का महत्व :

भारतीय झंडे में सबसे ऊपर केसरिया रंग होता है, इस केसरिया रंग का मतलब साहस और बलिदान है। बिच में सफेद रंग होता है, इस रंग का मतलब शांति और सत्य है। और सबसे निचे हरा रंग होता है जो निष्ठा और शौर्य अथवा विश्वास और प्रेम का प्रतिक है। इसके बिच सफेद रंग के पट्टी पर चौबीस तीलियों वाला चक्र है जो सम्राट अशोक ने शांति, अहिंसा, न्याय और धर्म के सिद्धांतो को अपने साम्राज्य में स्तापित किया था, यह चक्र उसी का सकेत देता है। इसलिए इसे अशोक चक्र के नाम से भी जानते है।

दोस्तों हमारे भारत का झंडा हमें साहसी बनता है, हमें प्रेरित करता है की देश के प्रति निष्ठा और प्रेम भाव बनाए रखता है। हमें शांति और सचाई के रस्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। हम कभी न हार माने हमें अपने कार्य के प्रति आदर हो और सदभावना के साथ चौबीसों घंटे करशील रहे यह बताता है।

झंडे को फरहाना :

झंडे को फरहाने से पहले आपको इन बातो की मालूमात होनी चाहिए, झंडा फरहाते समय उसमे उपयोग होने वाले चीजो के बारे में जानना जरुरी है।
☛  झंडा जिस खम्बे या बल्ली पर फरहाया जाता है उसे '' ध्वज - स्तंभ '' कहते है।
☛  ध्वज स्तंभ के उपरी हिस्से को '' स्तंभ -शिखर '' के नाम से जानते है।
☛  स्तंभ - शिखर के निचे 5-6 से.मी. पर लोहे या लकड़ी की घिर्री लगी होती है।
☛  ध्वज स्तंभ पर जमीन से लगभग 1 ½  मी. की उचाई पर लोहे के हुक होते है जो एक दुसरे से विपरीत होते
        है। यह हुक साधारणतः एक दुसरे से 15 से.मी. के फासले पर होते है।
☛  ध्वज स्तंभ की लम्बी रस्सी या मोटी दोरी होती है जिसे स्तंभ - डोर कहते है। इस डोर के एक सिरे पर नेत्र गाठ और दुसरे सिरे पर गिल्ली होती है।

ध्वज को फरहाते समय ध्यान रखे, ध्वज के उपरी हिस्से याने स्तंभ शिखर पर लगी घिर्री के भीतर से नेत्र गाठ वाली रस्सी याने स्तंभ - डोर निकल कर निचे की ओर लाए। स्तंभ डोर के सिरों को बराबर कर नेत्र गाठ में गिल्ली डाल दीजिए, एसा करने से स्तंभ डोर के दोनों सिरे एक दुसरे के साथ फस जाएँगे। इन सिरों को फसाकर ध्वज - स्तंभ पर लगे हुको में अंग्रेजी की संख्या 8 के आकार में लपेट लीजिए।

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किसी भी तरह के झंडे के उपरी किनारे ( हिस्से ) को शिखर और निचले किनारे को आधार कहते है। झंडे का जो किनारा ध्वज - सूत्र के साथ जुड़ा होता है और स्तंभ के पास होता है उसे उठान ( HOIST ) और जो किनारा स्तंभ के प्रे फरहाया करता है उसे उडान कहते है। उठान के उपरी भाग को शिखरकोण और निचले भाग को पदकोण तथा उडान के उपरी भाग को अग्र शिखरकोण और निचले भाग को अग्र पदकोण कहते है।
भारतीय ध्वज की बनावट ( संरचना ) - The structure of our Indian flag
1. शिखर कोण
2. पद कोण
3. अग्र शिखर कोण
4. अग्र पद कोण
5. गिल्ली
6. ध्वज - सूत्र
7. नेत्र - सांठ
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राष्ट्रिय गान :

जिस तरह देश का राष्ट्रिय ध्वज होता है उसी तरह राष्ट्रिय गान होता है। और राष्ट्रिय गान एक ख़ास राग से गाया जाता है। जिस तरह राष्ट्रिय ध्वज का सम्मान करते है, उसी तरह राष्ट्रिय गान का भी सम्मान किया जाता है।
भारत सन 15 अगस्त 1947 को आझाद हुआ उसके पहले वन्दे मातरम् को हम अपना राष्ट्रिय गान मानते थे। बकिम चन्द्र चैटर्जी लिखित वन्दे मातरम् हमारे देश के हजारो लोग गुलामी के समय गाते हुए सहीद हुए। देश के स्वतंत्र संग्राम में वन्दे मातरम् गाने का अपना ही एक महत्व था। लेकिन इस गान का राग गाते समय कठिन था इस लिए जब देश आझाद हुआ तब " जन - गन - मन " को राष्ट्रिय गान संबोधा गया। रविन्द्रनाथ टागोर जी के इस गान का राग सरल था।

जन गन मन अधिनायक जय हे
भारत भाग्य विधाता
पंजाब, सिंधु, गुजरात, मराठा
द्राविड, उत्कल, वंगा
विंध्य, हिमाचल, यमुना, गंगा
उच्छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे
तव शुभ आशीष मांगे,
गाहे तव जय गाथा
जन गन मंगल दायक जय हे
भारत भाग्य विधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय, जय, जय, जय हे


अहरह तव आव्हान प्रचारित
सुनी तव उदार वाणी
हिन्दू, बौध्द, सिख, जैन, पारसिक
मुसलमान, ख्रिस्तानी
पूरब पश्चिम आसे
तव सिंहासन पासे
प्रेमहार हाय गाथा
जनगणएक्यविधायक जय हे
भारत भाग्य विधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय, जय, जय, जय हे

पतनअभ्युदयबंधुर पंथा
युग युग धावित यात्री
तुम चिर सारथी तव रथचक्रे
मुखरित पथ दिन रात्री
दारुण विप्लव माजे
तव शंखध्वनी बाजे
संकट दू:खत्राता
जनगणपथपरिचायक जय हे
भारत भाग्य विधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय, जय, जय, जय हे

घोरतिमिरघननिबिड निशीथे
पीड़ित मुर्छित देसे
जागृत छील तव अविचल मंगल
नत नयने अनिमेषे
दू:स्वप्ने आतंके
रक्षा करीले अंके
स्नेहमयी तुमि माता
जनगणदू:खत्रायक जय हे
भारत भाग्य विधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय, जय, जय, जय हे

रात्र प्रभातिल उदिल रविच्छ्वी
पूर्व उदयगिरि भाले
गाहे विहिंगम पुण्य समीरण
नवजीवन रस ढाले
तव करुणारुण रागे
निद्रित भारत जागे
तव चरने नत माथा
जय हे , जय हे , जय जय जय हे
भारत भाग्य विधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय, जय, जय, जय हे

सावधानी  की बाते :

आप सभी को पता है राष्ट्रिय झंडे के साथ राष्ट्रिय गान का भी सम्मान किया जाता है। इसलिए सावधानी बरते, राष्ट्रिय गान या राग को किसी भी समय गाना या बजाना नही चाहिए। उसे विशेष समारोह के अवसर पर आदर के साथ सावधान स्थिति में खड़े होकर गाना चाहिए। किसी सिनेमा घरो , खेल के मैदान या शाला और अन्य जगह पर जब राष्ट्रिय गान की सुरुआत हो तो उसे आदर के सम्मान देना जरुरी है। और जरुरी बात राष्ट्रिय गान के निश्चित राग में अन्य दुसरे गाने को नही गाना चाहिए क्योकि इस तरह से भी राष्ट्रिय गान का निरादार होता है।



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