Wednesday, 5 September 2018

कहाणी अरुणिमा की - Story of Arunima


नमष्कार दोस्तों आज आप गुगलपर देखेंगे तो '' माउंट एव्हरेस्ट '' सैर करने वाली दिव्यांग महिला और माउंट एव्हरेस्ट सैर करने वाली प्रथम दिव्यांग भारतीय ऐसा जिसे माना जाता है वह अरुणिमा सिन्हा है। लेकिन सायद ही आपको पता होगा की अरुणिमा सिन्हा जनम सेही दिव्यांग नहीं है। तो दोस्तों चलिए अब हम वह कहानी जानते है जहा '' माउंट एव्हरेस्ट '' सैर करने वाली लड़की अरुणिमा सिन्हा दिव्यांग नहीं थी।
कहाणी अरुणिमा की -Story of Arunima

कहाणी अरुणिमा की -Story of Arunima

लखनऊ से 200 किमी दूरीपर आंबेडकरनगर यह अरुणिमा जी का गांव है। जहा उनका जन्म 20 जुलाई 1988 में हुआ। उनके घर में उनकी माँ , छोटा भाई , बड़ी बहन रहती थी। जब वह छोटी थी तभी उनके पिताजी का देहांत हो गया था। उनके पिता सेना में इंजीनियर हुआ करते थे। अरुणिमा जी की बड़ी बहन की शादी हो गई थी और बड़ी बहन के पति उनके घर के मुखिया थे। खेलकूदपर बहुत प्यार करने वाले परिवार में अरुणिमा सिन्हा का जन्म हुआ , यही उनका सौभाग्य था। अरुणिमा सिन्हा को बचपन से ही खेल में बहुत लगाव था। फुटबाल और व्हॉलीबाल की नॅशनल चैम्पियनशिप मिलने के बाद ( CISF ) सीआयएसएफ की नौकरी मिलती है , यह सलाह बड़ी बहन के पति ने दी और अरुणिमा ने उनकी सलाह आदरपूर्वक मानी। और व्हॉलीबाल की नॅशनल चैम्पियनशिप जितने के बाद उसी के अनुसार अरुणिमा ने अर्ज किया और कॉल लेटर भी आ गया था। लेकिन फॉर्म में उनकी जन्म तारीख गलत आ गई थी। यह गलती सुधारने के लिए अरुणिमा सिन्हा को दिल्ली जाना जरुरी था।


अरुणिमा का खिलाडी जमीर 

11 एप्रिल 2011 को लखनऊ स्टेशन भीड़ से भरा था। अरुणिमा जी दिल्ली जाने के लिए पद्मावती एक्सप्रेस में कार्नर के शीट पर बैठ गई। रेलगाड़ी अपने गति पर आई तभी कुछ चोर लोगो पर अरुणिमा का ध्यान गया। उनके खिलाडी जमीर ने अरुणिमा को चोरो के सामने झुकने नहीं दिया और अरुणिमा चोरो से लढने लगी। लेकिन चोर चार थे और चोरोने अरुणिमा को चलते रेल्वे से फेक दिया। पाससे जानेवाली रेल्वे पर अरुणिमा गिर गई और वह रेल्वे से उनके पाँव की दुरवस्था हो गई। उस रात वह लगभग सात घंटे रेल्वे पट्टरीपर कोई मदत करेगा इस उम्मीद से पड़ी रही। उस अवस्था में अरुणिमा सिन्हा का दिमाग यहां से कैसे निकले यह सोच रहा था। तभी कुछ सफाई कामगार वहा आए और बरेली गाँव के हॉस्पिटल में अड्मिट किया गया। और वहा अरुणिमा का इलाज हुआ लेकिन यह घटना की खबर आस पास फ़ैल गई। कुछ कहा सुनी अरुणिमा के पास तिकीट नहीं था इसलिए अरुणिमा रेल्वे से कूद गई , अरुणिमा ने ख़ुदकुशी करने का प्रयास किया ऐसी बुरी खबरे प्रसार माध्यम से फ़ैल गई थी। अरुणिमा और उनके परिवार ने सच बताने की बहुत कोशिस की लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं था।


उसी समय अरुणिमा ने प्रण लिया की लोग आज मुझे बोल रहे है , मेरी तरफ उंगलिया उठा रहे , उन्हें बोलने दे , एक दिन मेंरा भी आएगा। अपने दिव्यांग शरीर को देखते हुए निराश न होते हुए अपने मन को कठोर किया। लोगोंको दिखाना था वह कमजोर नहीं है। इसी जिद्द से अरुणिमा ने अपने मन को बढ़ावा दिया। और दोस्तों आप जानते हो की अरुणिमा जी की सफलता कैसे प्राप्त की।

शरीर पर चोट आने के वजह से उनके दिमाग पर भी असर हुआ था। लेकिए इस कठिन अवस्था में भी अरुणिमाजी ने हार नहीं मानी। इतना सब कुछ होने के बाद भी नियमित उपचार होने के बाद वह अपने पैर पर चलने लगी।

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अरुणिमा का प्रसिक्षण और सफलता 

कुछ समय बाद अरुणिमा जी का नेहरू गिरीभ्रमण प्रशिक्षण केंद्र में प्रसिक्षण हुआ। वहा उन्हें डेढ़ साल के आस पास प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण केंद्र में सभी लोग निरोगी थे और अरुणिमा दिव्यांग थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और प्रशिक्षण चालू रखा। एव्हरेस्ट पर चढने के लिए कुछ कठिन टप्पा ( कैम्प  चार ) पास करना होता है। जैसे बेसकैंप , इस कैम्प में जादातर मौत की संभावना होती है इसी लिए इसे '' डेथ झोन '' के नाम से भी जानते है। लेकिन अरुणिमा इन परीक्षाओ में भी सबसे आगे रहती थी।

कहाणी अरुणिमा की -Story of Arunima
21 में 2013 को लढाई कैम्प का आखरी टप्पा था लेकिन कुदरत को भी कुछ और ही मंजूर था अरुणिमा जी का ऑक्सीजन का साठा कम होने के कगार में था लेकिन अरुणिमा ने हौसला रखा ' Now or Never ' अब कुछ भी हो जाय अरुणिमा हार मानने वाली नहीं है और वह एव्हरेस्ट पर पहुंच गई। और बचा हुआ ऑक्सीजन मास्क निकाल कर फोटोग्राफर को ऐतिहासिक क्षण जिन्दा रखने के लिए फोटो खिचवाई। आखिर एक दिव्यांग ने भारत का ध्वज एव्हरेस्ट पर जाकर उचा किया।

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दोस्तों हम जीवन में क्या कर रहे है यह जरूरी नहीं , लेकिन यह कमाई अपने आप को सफल इंसान बनाती है , ऐसा मुझे लगता है। हम सामने वाले के साथ कैसा बर्ताव करते है यह देखकर हम एक आदर्श इंसान है या नहीं यह पहचान हो जाती है। लेकिन अगर इंसान मन की शक्ति पहचान कर उसे आत्मसात करता है तो वह सबसे बलवान है।
धन्यवाद.....


                                                                                                                           Author by Laxmi...
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