Wednesday, 24 October 2018

एक्यूप्रेशर का सिद्धांत क्या है - What is the principle of Acupressure

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एक्यूप्रेशर का सिद्धांत क्या है - What is the principle of Acupressure

एक्यूप्रेशर शब्द का अर्थ है दबाव। मानवी शरीर में अन्य प्रकार के विशेष बिंदु होते है जिसपर दबाव डालकर रोगो का निवारण कर सकते है, जिसे वैज्ञानिको ने एक्यूप्रेशर नाम निश्चित किया है। इस एक्यूप्रेशर पद्धति से चमत्कारी रूप में शरीर के विशिष्ठ बिंदुओं पर दबाव देकर रोगों का निवारण किया जाता है।


एक्यूप्रेशर का सिद्धांत क्या है - What is the principle of acupressure

एक्यूप्रेशर का सिद्धांत मानवी शरीर के रोगो का उपचार शारीरिक एव भावनात्मक रूप से संगठित मानकर किया जाता है। दूसरा मुख्य सिद्धांत है की शरीर के रक्तसंचार प्रक्रिया, स्नायु, एव ग्रंथियो का मुख्य केंद्र बिंदु हथेली एव पैरो पर विभिन्न स्थानों के बिंदु पर दबाव देकर वहां से ऊर्जा को प्रेषित कर समस्त स्नायु, ग्रंथियों को आरोग्य प्रदान किया जाता है।

असंतुलित आहार से मानवी शरीर में तथा शरीर के संबधित नियमो का उल्लघन से शरीर में अशांति फ़ैल जाती है और शरीर में अस्थिरता निर्माण होने लगती है, हाथ - पैर की हड्डियो में बदलाव, मास पेशिया मंद पड़ जाना, शरीर के अंग में रक्त संचार कम होना, रक्त में जमा रासायनिक तत्व, अपद्रव्य आदि जैसे तत्व जोड़ो के आस पास जमा होने लगते है, जिससे शरीर में रोग पैदा होने लगते है। शरीर के जिन अंगो की क्रियाशीलता कम होने लगती है वैसे ही हाथ के और पैर के एक्यूप्रेशर पर कुछ क्रिस्टल जमा होने लगता है। जिसके कारण शरीर में रक्त प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता।

शरीर में Bio-Electricity का महत्व - Importance of Bio-Electricity in the body :

एक्यूप्रेशर के माध्यम से इन बिंदुओं पर दबाव देकर क्रिस्टल को नष्ट किया जाता है जिससे रक्त प्रवाह के नियमित होने पर शरीर निरोगी हो जाता है। इसके अलावा हमारे शरीर में अन्य पंच तत्व समवाय है। पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु, और आकाश इन पंच तत्व से शरीर में Bio-Electricity का संचार होता है। जब किसी समय इन तत्वों में से किसी में भी अगर बदलाव आए तो शरीर के सम्बन्धित अंगो में रोगो का संचार होने लगता है। अर्थात शरीर से Electricity leak होने से रोगप्रतिरोधक शक्ति कम होने लगती है। जब हम एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर निश्चित समय दबाव देकर कार्य करे तो Electricity leak होना बंद हो जाती है। Electricity leakage के बंद होने से शरीर में सम्बंधित शक्ति का संचार नियमित हो जाता है और रोग दूर होने गलते है।


Acupressure से शरीर में होने वाले बदलाव - Acupressure changes in body :

➢ एक्यूप्रेशर से Nervous System में होने वाले विकृतियों को दूर करने में पूर्णतः सहयोगी है।

➢ एक्यूप्रेशर से पिट्यूटरी, थायरॉइड, पीनियल पेन्क्रियाज जैसे आदि ग्रंथियों के कार्यो में नियमित सुधार होने लगता है।

➢ एक्यूप्रेशर से शरीर के Internal Organs सामान्य रूप से कार्य करने लगते है।

➢ एक्यूप्रेशर शरीर के सभी Muscular Tissues में लचक पैदा करता है, जिससे शरीर ओर भी Strong बनता है।

➢ एक्यूप्रेशर शरीर के Bones तथा महत्वपूर्ण भागो में आने वाले विकृतियों को दूर करता है।

➢ एक्यूप्रेशर शरीर के ऊर्जा शक्ति को जागृत कर शरीर में स्पूर्ति पैदा करती है।

➢ एक्यूप्रेशर के द्वारा शरीर में होने वाले अनावश्यक तत्वों को बाहर निकालकर आंतरिक रोग निरोधक शक्ति को पैदा करता है।

Acupressure से करे रोगो का उपचार - Treatment of diseases by Acupressure :

यह एक नैसर्गिक चिकित्सा पद्धति है जिसके माध्यम से रोगो का उपचार सफलता पूर्वक किया जा सकता है। इस पद्धति से विभिन्न प्रतिबिम्ब केन्द्रो पर दबाव देकर आसानी से पता लगाया जा सकता है की शरीर के कौन कौन से अंग अपना कार्य नहीं कर रहे। एक्यूप्रेशर का उपचार एक महत्वपूर्ण घटक है जो इंसानी शरीर में होने वाले रोगो को दूर करने में मदत करता है। पेट का रोग, मस्तिक का रोग, मधुमेह आदि जैसे रोगो पर एक्यूप्रेशर के माध्यम से छुटकारा पा सकते है। आयुर्वेद में बताया है किसी भी इंसानी शरीर के रोगो का निवारण करने की शक्ति शरीर के भीतर ही छुपी होती है बस उसे पहचानकर जागृत करना होता और यह कार्य एक्यूप्रेशर करता है। शरीर में निर्माण होने वाले Electricity को सही तरीके से उपयोग में लाकर Human Body को रोगो से बचाव करता है।

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Acupressure बिंदुओं की संख्या - Number of acupressure points :

चीन में डा. चु. लि. एन. द्वारा लिखित ''चेनचियु सु एह'' ( अर्वाचीन एक्यूप्रेशर ) ग्रन्थ है जिसमे एक्यूप्रेशर के बारे लिखा गया है। इस ग्रन्थ के आधार पर एक्यूप्रेशर के 669 बिंदुओं की संख्या दी गई है। तो कुछ ग्रंथो में 1000 के आस पास बिंदु दर्शाए गए है। लेकिन वैज्ञानिको के हिसाब से प्रति दिन के प्रयोग में मुख्य रूप से 100 - 150 बिंदु ही महत्वपूर्ण माने जाते है। इस बिंदु पर दबाव देकर रोगी के रोग में सुधारना की जाती है। विज्ञानं में एक्यूप्रेशर के बारे बताया गया है। जो इंसानी शरीर को प्राकर्तिक रूप से निरोगी बनाने में सक्षम है।

एक्यूप्रेशर बिंदु और प्रेशर देने की तरीका - Acupressure point and method of pressure :

∎ एक्यूप्रेशर एक महत्वपूर्ण घटक है जिसे अँगुलिया, अँगूठा, प्लास्टिक अथवा लकड़ी के माध्यम से उपयुक्त रोग में सुधारना किया जा सकता है।

∎ एक्यूप्रेशर बिंदु पर दबाव देकर हाथ एवं पैरो की रक्तवाहिकाओं में संग्रहित उपद्रव क्रिस्टल को धीरे धीरे अपने निश्चित जगह से पसीने के द्वारा शरीर के बाहर निकल जाते है।

∎ एक्यूप्रेशर का उपयोग करते समय अधिक दबाव देने के लिए एक अंगूठे पर दूसरा अंगूठा रख के प्रेशर दे सकते है।


∎ एक्यूप्रेशर हर दिन की नियमावली है जिसे प्रति दिन उपयोग करना है, इसे कुछ दिन निरंतर करने से रोग पूरी तरह दूर होने लगते है।

∎ एक्यूप्रेशर बिंदु पर दबाव देते वक्त ध्यान रखे, दबाव देते समय न तो बहुत कम और न तो बहुत अधिक जोर से दबाव डाले लेकिन मध्यम बल का प्रयोग करते हुए प्रेशर देना चाहिए।

∎ जिस बिंदु पर दबाव देने से वह दर्द करे तो समझ लेना की उसमे कोई रोग या विकार है।

एक्यूप्रेशर उपयोग का समय - Acupressure time of use :

एक्यूप्रेशर का उपयोग संभवतः खाना खाने के पहले करना चाहिए। क्युकी खाना खाते वक्त शरीर की ऊर्जा भोजन पाचन में लग जाती है। इसलिए एक्यूप्रेशर का उपयोग खाने पहले करते है। या खाने के 3 - 4 घंटे के बाद एक्यूप्रेशर का उपयोग कर सकते है। शुबह योगा करते समय एक्यूप्रेशर का प्रयोग कर सहते है। हल्का दुग्ध या फल खाने के बाद भी एक्यूप्रेशर का उपयोग किया जा सकता है।

दोस्तों आपको बता दे की एक्यूप्रेशर एक भारतीय विद्या है। पौराणिक ग्रंथो में इसका उल्लेख किया है। जब प्राचीन भारतीय गहरी मालिश करते थे, हाथ और पैर चेहरे तथा शरीर के कुछ सामान्य अंगो पर दबाव डालकर यह क्रिया करते थे जिसके कारण रोग दूर होने लगते थे। भारतीय संस्कृति में स्त्री पुरुष कई सालो से अंगुलियाँ पहनते आ रहे है। यह एक एक्यूप्रेशर का घटक है। भारतीय ग्रंथो एक्यूप्रेशर का प्रयोग के बारे में और चिकत्सक, योग विद्या आदि के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त है। 

दोस्तों उम्मीद है की यह जानकारी आपको पसंद आएगी, लेकिन यह उपचार करने से पहले किसी अच्छे चिकित्सक या योग गुरु का सुझाव ले यह ओर भी आपके शरीर के लिए फायदेमंद होगा।
धन्यवाद ....

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