Saturday, 17 November 2018

बरगद के पेड़ के गुणधर्म और लाभ - Properties and Benefits of Banyan Tree

जानिए बरगद के पेड़ के गुणधर्म और लाभ - Properties and Benefits of Banyan Tree, बरगद वृक्ष बहुगुणा औषधि है - Banyan Tree is Bahuguna Drug, इतिहास में है बरगद का महत्व - Importance of Banyan in History, औषधीय गुणों से समृद्ध है बरगद का पेड़ - Banyan trees rich in medicinal properties Info in Hindi .

बरगद के पेड़ के गुणधर्म और लाभ - Properties and Benefits of Banyan Tree

बरगद के पेड़ के गुण और लाभ - Properties and Benefits of Banyan Tree :

प्राकृतिक विज्ञानं में बरगद एक गुणकारी पेड़ है। जो सदियों से हमारे भारतवर्ष में महत्वपूर्ण रहा है। इतिहासोमे इस पेड़ के महत्व के बारे में बताया गया है, जो हमारे प्रकृति में औषधि और धार्मिक दोनों की एक पहचान है। भारत में, इस पेड़ के बहुत सारे धार्मिक महत्व हैं और इसके कारण, इसकी भी पूजा भी की जाती है। बरगद एक गुणकारी वृक्ष है, जिसका लैटिन नाम Ficus Benghalensis Linn है। यह वृक्ष की शाखाएं बहुत बड़ी बड़ी होती है, यह पेड़ कभी न नष्ट होने के कारण इस वृक्ष को अक्षय वट वृक्ष भी कहा जाता है। यह भारत का राष्ट्रीय पेड़ है।

बरगद का पेड़ एक बहुत ही बड़ा पेड़ होता है जिसकी शाखाये दूर दूर तक पैली होती है जिनसे प्ररोह निकलकर लटकते हुए दिखाई देते है, यह प्ररोह बढ़कर वह जमीन में लग जाते है। बरगद के फल लाल रंग के गोलाकार होते है। इसका बीज बहुत ही छोटा होता है, लेकिन इसका पेड़ बहुत बड़ा रहता है। इसकी पत्तियां चौड़ी होती हैं, और लगभग अंडाकार के आकार की होती हैं। बरगद के पत्तियों, शाखाओं और कलियों को तोड़ने से दूध की तरह रस बाहर निकलता है जिसे Latex भी कहा जाता है।


बरगद के पेड़ की रासायनिक संरचना - Chemical Composition of banyan tree :

प्रकृति के इस आयुर्वेद में, बरगद की छाल, लेटेक्स, पत्ती की कलियों के साथ-साथ पेड़ के फल, औषधि में अवयवों के रूप में उपयोग किए जाते हैं। पौधे में पाए गए कुछ सक्रिय रासायनिक घटकों में फाइटोस्टेरोलिन, केटोन, फ्लैवोनोइड्स, फ्लैवोनोल, स्टेरोल, ओन्टैसिलिक ट्राइटरपेन्स, ट्राइटरपेनोइड्स, फुरोकौमरिन, टिग्लिक एसिड और अन्य गुन शामिल होते हैं। इसकी सक्रिय रासायनिक संरचना के कारण, बरगद के पेड़ के विभिन्न औषधीय तत्वों का उपयोग होता हैं। बरगद के पेड़ की छाल में और उसके जटाओ में टैनिन एसिड 10 प्रतिशत पाया जाता हैं।

बरगद के पेड़ का वैज्ञानिक और अद्वितीय महत्व क्या है ?
• बरगद के पेड़ की छाया सीधे दिमाग को प्रभावित करती है, और मन को शांत रखती है।

• धुप काल में बरगद का पेड़ हरा रहता है, इसलिए धुप काल में इसके छाव में आराम कर सकते है।

• बरगद के पेड़ की पत्तियां दूध उत्पन्न करती हैं, जिनका अलग अलग बिमारिओ पर उपयोग होता है।

बरगद वृक्ष के गुण - Properties of Banyan Tree :

बरगद वृक्ष में बहुत गुणकारी गुणधर्म है, कफ पित्तनाशक, रक्तशोधक, शोथहर, स्तम्भन, रक्त पित्तहर, मूर्च्छा, छर्दि जैसे बिमारिओ को दूर करता है।


बरगद पेड़ के औषधीय उपचार - Banyan tree Medicinal Treatment :

रक्त की उल्टी में लाभ :

✦ रक्त की उल्टी कम करने के लिए बरगद का पेड़ बहुत ही लाभदायक है, बरगद के पेड़ की नरम शाखाओ के फांट में थोड़ासी सक्कर मिलाकर सेवन करने से रक्त की उल्टी बंद हो जाती है।

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✦ बरगद के जटाओ के अंकुरों को 6 ग्रा. की मात्रा में, जल में घोलकर छान ले और थोड़ी - थोड़ी देर बाद पिलाए इससे रक्त की उल्टी में राहत मिलती है।

दंत के विकार में लाभ :

✦ बरगद के कोमल लकड़ी की दातुन करने से पायरिया जैसा बहुत बड़ा रोग नष्ट किया जा सकता है।

✦ इसके जटा चूर्ण बनाकर उससे मंजन करने से दांत के कीड़े नष्ट होते है।

✦ यदि किसी दांत में दर्द हो रहा है और उसे निकालना है तो बरगद के दूध को लगाकर आसानी से वह दांत निकाल सकते है।

✦ बरगद की छाल, 5 ग्रा. की मात्रा में कत्था और 2 ग्रा. काली मिर्च तीनो को मिलाकर इसका चूर्ण बनाकर मंजन करे। इससे दांत हिलना, दर्द करना और मुँह का दुर्गंध दूर होता है।

व्रण के विकार में लाभ :

✦ शरीर पे फोड़े या फुन्सिया होने पर बरगद के पत्तो को गरम करके फुंसियों पर बांधने से वह जल्दी पक कर फुट जाती है।

✦ हल्के व कम व्रण पर बरगद का दूध लगाने से उसमे जल्दी ही राहत मिलती है।

✦ घाव को सूखाने के लिए बरगद के छाल का लेप बनाकर 3 दिन तक घाव पर लगाए और पट्टी बांधे इससे घाव भर जायेगा।

स्मरण शक्ति का विकास :

✦ बरगद के छाल का बारीक चूर्ण बनाकर उसमे मिश्री मिला लें, 6 - 7 ग्रा. की मात्रा में इस चूर्ण को सबेरे शाम गाय के दूध में मिलाकर पिने से स्मरण शक्ति का विकास होने लगता है।

✦ स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए यह नुस्खा आजमाते समय खट्टे पदार्थो का सेवन ना करे।

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हृदय की धड़कन :

✦ 150 ग्रा. जल में बरगद के हरे पत्तो को पीसकर उसमे थोड़ासी मिश्री मिला कर 15 दिन सबेरे - शाम पिने से ह्रदय की धड़कन में राहत है।

कर्णरोग में लाभ :

✦ बरगद के दूध की 3 - 4 बुँदे बकरी के दूध में डालकर कान के फुंसी पर लगाए इससे कृमि तथा फुंसी नष्ट होने लगती है।

✦ सरसो के तेल में बरगद के दूध की 2 - 3 बुँदे मिलाकर कान में डालने से कृमि दूर होती है।

मधुमेह में लाभ :

✦ 1 लीटर जल में बरगद के जटा और छाल का चूर्ण बनाकर पकाये, फिर इसे छानकर प्रति दिन 1 महीने तक सबेरे - शाम सेवन करें। इससे मधुमेह में राहत मिलती है। 



खुजली की समस्या : 

✦ यदि आपको लगातार खुजली हो रही हैं और यह ठीक नहीं हो रहा है, तो सबसे पहले, आधे किलो की मात्रा में बरगद की छाल लें और फिर इसे सूखाकर इसे पाउडर बना लें। 

✦ इस पाउडर को तीन लीटर पानी में रखकर रात भर वैसे ही छोड़ दे। और सुबह में आपको इस पाउडर को पानी में पकाना है। 

✦ इसके बाद, अब आपको कम से कम आधे किलो के हिसाब से सरसों का तेल डालना है। इसे तब तक पकाएं जब तक कि इसमें केवल तेल ही रहे। अब आप को इसे फ़िल्टर करके और फिर अपने शरीर को मालिश करना हैं। यह आपके खुजली की समस्या को हटा देगा।

बंद गांठ की समस्या :

✦ जो लोग गठिया से पीड़ित हैं, वे अलसी के तेल में थोड़ा बरगद का दूध मिलाकर दर्दनाक स्थान पर मालिश करें। इससे गठिया पर राहत प्राप्त होंगी।


जैसा कि हमने आपको बताया है की, यह पेड़ हमें कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है। हां, यह शरीर की थकान, बुखार, कफ और आदि समस्या को खत्म करने के लिए काम करता है। बरगद शरीर की शक्ति बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण वनस्पति है।



Note : डॉक्टर की सलाह से ही बरगद के पत्तो का दूध उपभोग करें। अत्यधिक बरगद के पेड़ का दूध सेवन करने से उल्टी हो सकती है या उल्टा परिणाम हो सकता है। इसलिए इस प्राकृतिक औषधि का उपयोग करने से पहले डॉक्टर या अच्छे चिकित्सक की सलाह जरूर ले। 

धन्यवाद। 
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