Monday, 12 November 2018

पर्यावरण संबंधी परेशानियाँ - Environmental problem

पर्यावरण के परेशानिओ का कारण क्या है ? अगर ऐसेही ही पर्यावरण में समस्या निर्माण होने लगी तो आने वाले समय में भविष्य की दुनिया ( World of the future ) का क्या होगा ? इस तरह के प्रश्न निर्माण होने लगे है।

पर्यावरण संबंधी परेशानियाँ - Environmental problem

जंगल के बरबादी से पर्यावरण में कई सारे समस्याओ का निर्माण हुआ है। निजी सड़के, केंद्र सरकार और राज्य सरकार के स्थानिक संस्था, बड़े बड़े महामार्ग ( Major highways ), अभयारण्य ( Sanctuary ), राष्ट्रिय उद्यान ( National Park ), ऐसे विकास होते आ रहे है। ऐसे सभी प्रकार के विकासो के लिए भूमि एक महत्वपूर्ण घटक है। लेकिन इसी विकासो के कारण पर्यावरण में उपस्थित जंगलो का नाश होते आ रहा है जो पर्यावरण की बहुत बड़ी समस्या बन गई है। भारत में सन १९४७ से १९९५ तक पर्यावरण संबंधी बहुत बड़ी परेशानियाँ निर्माण हुई थी। दोस्तों इस आर्टिकल में पर्यावरण के समस्याओ के बारे में जानने वाले है।


पर्यावरण संबंधी परेशानियाँ - Environmental problem :

प्रकृति एक पर्यावरण की देन है जिसमे पुरातन वर्ष से मानव अपने लिए पर्यावर्णीय साधन सामग्री ( Environmental instrument ) का उपयोग करते आ रहा है। लेकिन कई सारे परेशानियाँ प्रकृति में निर्माण होने लगे है। मानव निर्मित उत्पादन, कारखाने, जंगल की कटाई, ऐसे विविध कारणों से पर्यावरण में बदलाव होते आ रहे है। इस बदलाव में पुनर्वसन ( Rehab ), पुनर्स्थापना ( Restoration ), प्राकृतिक साधनसंपत्ति ( Natural resources ), ऊर्जा और उसके स्त्रोत आदि जैसे परिणाम निर्माण होने लगे है। इस बदलाव प्रक्रिया से पर्यावरण में प्राकृतिक साधनो का नास होने लगा, जंगल नष्ट होने लगे, प्राणी कम होने लगे, और भूतल का प्राणवायु ( Oxygen ) भी कम होने लगा जो मानव के लिए अति महत्वपूर्ण है।

प्राकृतिक संसाधनों की कमी - Depletion of natural resources :

 पर्यावरण में पेड़ो के निर्माण और उसके विकास के लिए सूरज के किरणों की ऊर्जा, कार्बन डाय ऑक्साइड, और अन्य पोषण तत्वों की जरुरत होती है बचे हुए अन्य पिष्टमय पदार्थो ( Waste Material ) के रूप में रखे जाता है। अलग अलग परिसंस्था जिसमे विविध प्रकार के पेड़ो का समूह दिखते हुए नजर आते है। इस परिसंस्था में अलग अलग प्रजाति के वृक्षों का समवेश रहता है। वनस्पति याने उत्पादक और उसे मिलने वाले विविध प्रकार के पोषण द्रव्ये, अजैविक घटक परिसंस्था के उत्पादन प्रक्रिया में असमतोल ( Imbalance ) परिणाम लाते है। इसी कारण प्रकृति में प्राकृतिक रूप से विनास होने लगता है।


जंगल की साधनसंपत्ति - Forest resources :

वन्य परिसंस्था सभी प्रकार के सजीव प्राणी को बेशुमार अच्छे गुणों की आपूर्ति करते है। उसके अलावा वातावरण और भू - जल चक्र, इनपर भी परिणाम करता है। जंगल के इस परिसंस्था की उत्पादकता उसके उपयोग करने की पद्धत और उपयोग करने वाला घटक दोनों पर निर्भर है। उदा. जंगल में रहने वाला मनुष्य जो जंगल के साधनसामग्री पर अपना जीवन व्यतीत करता है। जंगल में उत्पादित घास, कंदमूल, हरे हरे पत्तिया, आदि।

मनुष्य के विकास, बढ़ता हुआ प्रदुषण, अद्योगीकरण, बड़े बड़े प्रकल्प, संसाधनो का अधिक उपयोग आदि के वजह से प्राकृतिक परिसंस्था का नास होते जा रहा है। इसके अलावा मेडिकल उपचारो तथा आरोग्य प्रशासकीय के साधन और अपशिष्ट पदार्थ ( Waste Material ) . उदा. औषधीय गूनो वाली वनस्पति, फल जैसे वनस्पति का अधिक रोपण करना और उसका व्यवसाय करना यह पर्यावरणीय परिसंस्था पर परिणाम लाता है। मनुष्य अपने जीनव में प्राकृतिक साधनो का उपयोग करते आ रहा है जो इसका सीधा परिणाम पर्यावरणीय परिसंस्था पर होता आ रहा है।

स्थानीय लोगों की Income में कमी - Lack of local people's income :

जंगल और जंगल के पास रहने वाले मनुष्य अपना जीवन व्यतीत करने के लिए जंगल के साधनसामग्री का उपयोग करते आ रहे है। जंगल में रहने वाले मनुष्य अधिकतर भूमिहीन होते है, उनकी रोजी रोटी का जरिया जंगल ही है। अगर किसी प्राकृतिक सामग्री का विनाश होने लगता है तो उसका परिणाम सभी जीवित प्राणी पर होने लगता है। इसका सबसे बड़ा उदा. जंगल की कमी, इसी के कारण सभी सजीव सृस्टि पर दूरगामी परिणाम होने लगता है।
➤ जंगल की कमी के कारण जिव सृस्टि का विनाश होते जा रहा है।
➤ पर्यावरण में प्राकृतिक साधनो की कमी हो रही है।
➤ इसी के बदलाव से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।
➤ जंगली मनुष्य की जीवन क्रिया में बदलाव आ रहे है।
➤ खाजगी क्षेत्रों में लकड़ी को इंधन स्वरूप जलने के लिए उपयोग कर पर्यावरण का समतोल ढिलमिल ( अस्थिर ) कर रहे है, जो पर्यावरण के लिए कठिनाई का एक रूप है।


प्रकृति में असंतुलन - Imbalance in nature :

सभी प्रकार के जीवनावश्यक वस्तुकी की निर्मिति, वायु, जल, पोषणद्रव्य, हरितगृह वायु, मिट्टी की नमी कम करना, जैसे सभी कारणों के लिए जंगल महत्वपूर्ण है। सभी सजीव प्राणी इस प्राकृतिक साधनो पर आपना जीवन जी रहे है अगर इसी जंगल के साधनो का विनाश होते गया तो संपूर्ण जीवन पर इसका प्रभाव होगा। इसीलिए प्राकृतिक प्रणालिओं को पुनःजीवित करने के लिए अधिक परिश्रम करना होगा, इसके लिए अधिक समय और संपूर्ण ज्ञान की अधिकतर जरूरत होगी। तभी प्राकृतिक खजाने को असंतुलित होने से बचा सकते है।
प्रकृति को संतुलित बनाये -
∎ पेड़ो का सवर्धन करे,
∎ जल सवर्धन करे,
∎ मृदा सवर्धन करे,
∎ प्रदुषण कम करने के लिए अवश्य प्रयास करे,
∎ वातावरण में दुर्गंध ना फैलाये,
∎ प्राकृतिक साधनो का बचाव करे,
∎ बिजली की बचत करे,
अन्य प्रकार के घटको के माध्यम से पर्यावरण को बचाये जिससे प्रदुषण ना हो और प्रकृति पर कोई प्रभाव ना पड़े याने प्रकृति संतुलित हो सकती है। लेकिन इसके लिए सभी को ईमानदारी से यह सुभ कार्य करना होगा तभी पर्यावरण को बचा सकते है।

जैव विविधता का विनाश - Destruction of biodiversity :

प्रदूषण के कारण जंगल के औषधीय गुन गायब हो रहे है। इसका परिणाम अन्य प्रजाति पर भी हो रहा है, वनस्पति, सस्तन प्राणी, पक्षी, और अन्य जंगली जीवित प्राणी जिनकी संख्या कम हो रही है। इसका परिणाम सीधा पर्यावरण के जैव विविधता पर हो रहा है। लेकिन प्रदुषण के प्रकोप से जीवित प्राणी पर नहि बल्कि सभी वनस्पति, औषधीय वस्तु इनपर परिणाम हो रहा है। औषधीय वनस्पति के कमी से औषधि निर्माण उद्योग में परिणाम होगा। अथवा किसी भी प्रकार के प्रदुषण से सभी प्रकार की प्रजाति और परिसंस्था पर Effect होगा जिसके कारण संपूर्ण प्रकृति संकट आ सकती है।


गलत योजना, विशिष्ट वन उत्पादन, प्रदूषण इत्यादि के स्रोतों से उत्पादकता की कमी के कारण स्रोतों की उत्पादकता को कम कर देती है। यह प्रक्रिया बहुत लंबे समय से चल रही है, उत्पादन की समानता में कमी का परिणाम स्रोत पर निर्भर लोगों की वित्तीय ( Financial ) स्थिति पर है। इन संसाधनों पर निर्भर उद्योगों को वित्तीय ( Financial ) नुकसान उठाना पड़ता है। जैव विविधता में गिरावट और पारिस्थितिकी तंत्र का असंतुलन होता है। जो मानव को इन गतिविधि की प्रकृति को समझना महत्वपूर्ण है, जो उत्पादकता को नष्ट कर देता है। यह समझाते हुए कि प्राकृतिक साधनो को बचाने के लिए प्रशासन और हमे अधिक से अधिक प्रयाश करने होंगे।

धन्यवाद.....
पर्यावरण संबंधी परेशानियाँ - Environmental problem
 यह भी जरुर पढ़े 

Article By

He is CEO and Founder of www.apnasandesh.com. He writes on this blog about Tech, Automobile, Technology, Education, Electrical, Nature and Stories. He do share on this blog regularly. If you want learn more about him then read About Us page

Popular Posts