Wednesday, 14 November 2018

जल और मिट्टी को कैसे बचाए - How to save water and soil

मनुष्य पेड़, प्राणी तथा सजीव परिसंस्था के सरक्षण के महत्व को समझ गया है। इसीलिए वह पर्यावरण बचाव के लिए अधिक से अधिक मेहनत कर रहा है। मनुष्य समझ गया की उसका जीवन प्राणी, पेड़, अजैविक पदार्थ, तथा एक स्वच्छ वातावरण ( Clean Environment ) पर आधारित है।

जल और मिट्टी को कैसे बचाएं - How to save water and soil

मृदा हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह उल्लेखनीय है कि एक से.मी. मिट्टी के निर्माण के लिए हजारों साल लगते हैं, और हमारे कुप्रबंध या प्राकृतिक कारणों से, बहुत ज्यादा मिट्टी बहुत कम समय में बर्बाद हो जाती है या यह नदी, धाराओं और महासागरों में क्षरण से बर्बाद हो जाती है।

यह दिखाता है कि जीवन संभव है जहां स्वच्छ पानी, शुद्ध हवा और पोषक तत्व युक्त समृद्ध मिट्टी ( Soil ) उपज के लिए उपलब्ध है। समय के साथ सभ्यताओं का विकास हुआ, मानव आबादी बढ़ी और हमारे बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों की कीमतें बढ़ने लगीं। मानव द्वारा वर्तमान पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए, पानी को नलाने और मिट्टी से अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यावरण ( Environment ) के संबंध में इसे बचाने के लिए प्रयास नहीं किए गए हैं। इसके लिए आधुनिक जीवन शैली ( Modern Life Style ) और औद्योगिक क्रांति ( Industrial Revolution ) भी जिम्मेदार है। जिसके वजह से प्रकृति में जल और मिट्टी की कमी हो रही है। इसलिए लोगों ने मिट्टी और जल संरक्षण, अभयारण्यों ( Sanctuary ) का निर्माण, जानवरों और जीवित जीवों की रक्षा के लिए परियोजनाएं ( Projects ) बनाई हैं।


जल और मिट्टी को कैसे बचाए - How to save water and soil :

जल अलग अलग प्रकार से मिलने वाली प्राकृतिक संपत्ति ( Natural property ) है, यह सभी जानते है। जलचक्र के कारण सभी सजीव प्राणी को उपयोग करने के लिए उपयुक्त जल मिलता है। लेकिन कुछ कुछ जगह जल की समस्या निर्माण होती ही है।

भारत खेती करने वाला शहर है, भारत में खेती या अन्य व्यवसाय के लिए पानी की जरुरत है। लेकिन अधिक से अधिक जगह बारिश के जल पर आश्रित रहते है। परंतु किसी जगह अधिक बारिश तो किसी जगह कम बारिश ऐसी स्तिथि निर्माण होती है। बारिस के इस ऋतु में मान्सून के बदलाव से वर्षा होती है। लेकिन जल का इस्तेमाल हर दिन बढ़ते जा रहा है।

जल और मृदा के अतिरिकी उपयोग से इनकी लेवल कम होने लगी है। कारखानों से निकलने वाला दूषित जल ( Contaminated water ), निर्माण होने वाली दूषित मृदा ( Contaminate soil ), दूषित वातावरण ( Contaminated environment ), और मनुष्य के असाधारण काम जैसे परिणामो से आज प्रकृति में प्रदूषण होने लगा है।

जल प्रबंधन - Water Management 

पानी का स्तर लगभग 70 प्रतिशत पृथ्वी को ढकता है, लेकिन केवल 3 प्रतिशत साफ पानी है। इनमें से 2 प्रतिशत ध्रुवीय बर्फ ( Polar Ice ) इलाके में हैं, और केवल 1 प्रतिशत पानी नदियों, झीलों और भूमिगत जलीय जल में उपयोग योग्य है। इसका उपयोग केवल पिने के लिए किया जा सकता है। 

दुनिया भर में, 70 प्रतिशत पानी खेती के लिए उपयोग किया जाता है, कारखानों के लिए लगभग 25 प्रतिशत और घरेलू काम के लिए 5 प्रतिशत। हालांकि, अंतर यह है कि विभिन्न देशों और औद्योगिक देशों ( Industrial Countries ) में इसे कारखानों का सबसे बड़ा प्रतिशत उपयोग करते हैं। हिंदुस्तान 90 प्रतिशत कृषि भूमि का उपयोग करता है, कारखानों का लगभग 7 प्रतिशत और घरेलू काम के लिए 3 प्रतिशत उपयोग होता है। 



अध्ययनों से पता चलता है कि एक आदमी को पीने और सफाई के लिए प्रतिदिन अधिकतम 25  से 50 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। प्रकृति की अनिश्चितता के कारण, वर्षा जल को बचाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय,

➤ पानी की कमी और गंदगी को कम करें :   

जल भंडारण के मामले में विभिन्न कारणों से पानी की सटीक आवश्यकता की पहचान करना पहला कदम है। 
❖ जल के रक्षा के लिए शासकीय उपाय योजना का पालन करना जरुरी है।
❖ जल की जीतनी जरूरत है उतना ही उपयोग करे।
❖ संभवतः बारिस के पानी को बचाने का प्रयास करे।
❖ पानी का उपयोग करते समय पर्यावरण का भी ध्यान रखे।
❖ खेती के लिए ड्रिप सिंचाई ( Drip Irrigation ) का प्रयोग करें।

अपशिष्ट ( Waste Water ) रीसाइक्लिंग के लिए उपाय :

Waste Water का पुन: उपयोग यह भी एक प्रकार का जल सवर्धन है। 
❖ उद्योग में केवल पानी का उपयोग जितना जरूरी है उतना ही किया जाना चाहिए।
❖ कारखानों के जल का शुद्धिकरण करके ही जल को बाहर निकाले इससे जल प्रदूषण कम होगा।
❖ कारखाने से निकला हुआ शुद्ध जल का उपयोग खेती के लिए किया जा सकता है इससे पानी की बचत होती है।
❖ Waste Water का शुद्धिकरण करके उसे दुबारा उपयोग में ला सकते है, जो जल सवर्धन के लिए महत्वपूर्ण है।

➤ पानी के स्तर को बढ़ाने के ( Increase Water Level ) उपाय :

पानी के स्तर को बढ़ाने के लिए बारिश के पानी को विभिन्न साधनों से जमीन में स्टोर करना महत्वपूर्ण है।
❖ भुजल के स्तर को बढ़ाने के लिए जमीन खोलीकरण या बांध तैयार करे।
❖ भूगर्भ में जल की लेवल बढ़ाने के लिए बारिश के पानी का उपयोग करे।


❃ कुछ पानी भंडारण तकनीकें - Some water storage techniques  

ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन ( Rain water harvesting in rural areas  ) :

ग्रामीण क्षेत्रों में जल सवर्धन के लिए नई नई तकनीक का उपयोग करते आ रहे है। छोटे छोटे बांध पर जल का सवर्धन, घर की छत के पानी को जमा करके भूजल भंडारण करना आदि जैसे Project ग्रामीण क्षेत्रों में विकशित हुए है। खेती के लिए टपकन सिंचाई ( Drip Irrigation ) का उपयोग करना, बारिश के पानी को बचाने के लिए बड़े बड़े तालाब खोलीकरण, इत्यादि तकनीकों से भूजल का स्तर बढ़ा सकते है। 
उदा. दक्षिण भारत और विदर्भ में सिंचाई के लिए बांध बनाने की तकनीक विकसित की गई है। इसी कारण यह परंपरागत तकनीक ( Conventional technique ) खेती के लिए उपयोगी साबित हुई है। 

शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन ( Rain water harvesting in urban areas ) :

बड़े बड़े शहरों में बारिश के पानी को बचाना याने एक महत्वपूर्ण कार्य है। महानगरों, शहरों में बारिश के इसी पानी को छतो से बचाया जाता है और उसे शुद्ध करके उपयोग में लाया जाता है।
उदा. चेन्नई, दिल्ही, मुंबई, आदि शहरों में छतो पर के पानी को बचाया जाता है। घर के छतो का पानी गटर में जाने के बजाय वह टाकी में भंडारण किया जाता है। उसके बाद उसे उपयोग में या रिचार्ज पिट के माध्यम से जमीन स्थित किया जाता है। इसी तरह के Project से शहरों के बाढ़ को कम किया जाता है।


 मृदा प्रबंधन - Soil management  

मृदा पर्यावरण का एक और महत्वपूर्ण घटक है। फसलों और फसलों की आबादी काफी हद तक मिट्टी के फलियों पर निर्भर करती है। मृदा क्षरण विभिन्न कारणों से हो सकता है, हवा, बहने वाले पानी, तरंगों आदि  कारणों से मिट्टी का कटाव प्राकृतिक रूप से होता है। मानव के कार्य से भी मिट्टी के कटाव की मात्रा में वृद्धि हुई है। जंगलो के विनाश के वजह से, बहते जल के कारण मृदा कम होने लगी है। बढ़ती हुई आबादी, प्रदूषण, रासायनिक खतो का उपयोग, आदि के वजह से मिटटी का गुणधर्म कम हो रहा है। इसीलिए मानव मृदा प्रबंधन के लिए उपाय योजना और अलग अलग पद्धति का उपयोग कर रहा है।

➣ खेती में मृदा संवर्धन ( Soil Promotion in Farming )
➣ पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा संरक्षण ( Soil conservation in mountainous areas )
➣ शहर में मृदा संवर्धन ( Soil Promotion in the City )

बेशक, जल और मृदा  संरक्षण आज के समाज की सर्वोच्च चिंता होनी चाहिए, क्योंकि उदार प्रकृति ने निरंतर हवा, पानी, प्रकाश का उपहार देकर हमें मजबूर किया है, लेकिन स्वार्थी मनुष्य सबकुछ भूल रहा है और प्रकृति के प्राकृतिक संतुलन को खराब कर रहा है। इसीलिए सभी को निवेदन ....
जल और मिट्टी को कैसे बचाएं - How to save water and soil

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