Sunday, 4 November 2018

बबूल के गुणधर्म और लाभ - Properties & Benefits of Acacia

जानिए बबूल के गुणधर्म और लाभ - Properties & Benefits of Acacia, जानिए बबूल एक महत्वपूर्ण वनस्पति - Know Acacia is an important vegetation, बबूल से होने वाले फायदे - Acacia benefits Info in Hindi.

बबूल के गुणधर्म और लाभ - Properties & Benefits of Acacia

बबूल एक महत्वपूर्ण वनस्पति है जो ज्यादातर रेगिस्तान में पाए जाने वाला वृक्ष है। बबूल नाम से सभी लोग परिचित है लेकिन इसके गोनो के बारे में सायद ही कुछ लोग ही जानते होंगे। बबूल के पेड़ की पत्तियाँ छोटी रहती है और कांटे होते है। बबूल के महत्वपूर्ण गुण की वजह से बबूल के वृक्ष की खेती करते है। बबूल के पेड़ का वर्णन गर्मी के मौसम फूलो से भरपूर और सर्दियों के मौसम फलियाँ लगती है। बबूल की छाल तथा गोंद व्यवसाय के लिए प्रसिद्ध द्रव्य है। बबूल का कुलनाम Mimosaceae है, तो अंग्रेजी में Babul या Acacia Tree के नाम से जानते है।


बबूल के गुणधर्म - Acacia properties

बबूल के पेड़ का महत्व सम्पूर्ण भारतवर्ष में है। यह एक बहुगुणी वनस्पति है जिसके बहुत सारे गुणधर्म है। कफ पित्ताशय, रक्त पित्ताशय, आदि रोगो पर उपयोगी वनस्पति है। इसकी छाल और गोंद का उपयोग आयुर्वेद में मेडिसिन बनाने के काम में आता है। यह वनस्पति बहुगुणी होकर सभी रोगो को दूर करने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है। और प्रकृति ऐसा वरदान है जिसमे सभी रोगो से लड़ने की शक्ति है। 

बबूल के पेड़ का परिचय - Introduction to Acacia Tree :

बबूल का पेड़ प्राकृतिक रूप से औषधी गुणों से भरपूर है। बबूल के पेड़ की लम्बाई अधिक होने के कारण कांड त्वक गाढे भूरे रंग और रूखे दरार से युक्त, नई शाखाये चिकनी , और तीक्ष्ण टोकदार काटो से भरपूर होता है। बबूल के पुष्प आकषित होते ह,  बबूल के फली में 8 – 12 चपटे बिज होते है। बबूल की लकड़ी जलते समय बहुत ही सुभ माना जाता है। बबूल के फली में 15 – 20 प्रतिशत टैनिन पाया जाता है और छाल में 7 – 12 प्रतिशत कषाय द्रव्य पाया जाता है। बबूल के पेड़ से निकलने वाला गोंद बेहत ही प्रसिद्द है।


बबूल पेड़ के औषधी गुण - Medicinal properties of Acacia tree :

➤ बबूल के मुलायम पतों को पीसकर उसका रस दूध के साथ आखो पर डालने से आखो की पीड़ा या सुजन दूर हो जाती है।

➤ बबूल के छाल को पीसकर मध्यम गरम पानी में मिलाकर गरारे करने से लाभ होता है।

➤ बबूल फली और बादाम दोनों के छिलके की राख बनाकर नमक में मिलाकर प्रति दिन सुबह शाम मंजन करने से दंत के रोग दूर होते है।

➤ बबूल की गोंद बेहत ही लाभदायक है इसे खाने से शरीर को लाभ मिलता है।

➤ बबूल के कोमल टहनियों को दातुन बनाकर उससे दंत घिसे इससे दंत निरोगी बनाते है।

➤ दंत सड़ने के बीमारी को दूर करने के लिए बेहत ही लाभदायक है बबूल इसके क्वाथ से दिन में दो बार कुल्हा करने से दंत सडना बंद हो जाता है।

➤ बबूल के किसी भी घटक जैसे छाल, पत्ते, पुष्प, फली, गोंद, आदि का उपयोग कर अनेक रोग दूर कर सकते है।

➤ बबूल के पत्तियों का रस छाछ में मिलाकर पिने से प्रतेक प्रकार के अतिसार में लाभ मिलता है।

➤ पानी के साथ बबूल के पत्तों को पीसकर उसे पिने से मोटापा शरीर से दूर कर सकते है। 



➤ अगर ज्यादा अतिसार हो तो बबूल के कोमल कोंपले जीरे और अनार के कलियों के साथ 100 – 150 ग्राम पानी में पीसकर उसे हर दिन 2 चम्मच पिने से यह रोग कम हो जाता है।

➤ बबूल के पुष्पों का चूर्ण बनाकर उसमे मिश्री मिलाकर हर दिन तिन बार फंकी लेने से पीलिया रोग में राहत मिलती है।

➤ कंठ रोग दूर करने के लिए बबूल के पत्ते, छाल और बड की छाल तीनो को सामान मात्रा में एक गिलास पानी में भिगो दे और तैयार मिश्र का कुल्हा करके कंठ रोग नष्ट करे।

➤ बबूल के 10 – 15 कोपलों को रात में आसमान के निचे एक गिलास पानी में भिगोकर रखे फिर सबेरे उसे निथार कर पिने से पेसाब में जलन के रोग दूर होते है।

➤ खुनी दस्त को दूर करने के लिए बबूल के कोमल पत्तियों का रस बनाकर शहद के साथ 2-3 बार पिने से राहत मिलती है।

➤ बबूल के 10 ग्राम गोंद को 50 – 60 ग्राम पानी में भिगोकर उसे छानकर पिने से रक्त अतिसार दूर होता है।

➤ दाद के राहत के लिए बबूल के पुलों को सिरके में पीसकर दाद पर लगाने से आराम होता है।

➤ कमर दर्द के लिए बबूल की फली, छाल, और गोंद तीनो को समभाग मिलाकर पिस ले और फिर दिन में तिन बार सेवन करे इससे कमर दर्द दूर होने लगता है।

➤ बबूल के पत्तो का लेप लगाकर जख्म को भरता है और सुजन भी दूर करता है।

➤ पसीने से छुटकारा पाने के लिए बबूल के पत्ते और हरद को बराबर मात्रा में मिलाकर उसे पिस ले और फिर पुरे शरीर को मालिस करे, कुछ देर बाद स्नान करे यह करने से पसीने में राहत मिलेगी।

➤ शहद और बकरी के दूध में 6 ग्राम बबूल का पाउडर मिलाकर पिने से यह तीन दिनों के भीतर टूटी हुई हड्डी जुड़ जाती है।



➤ बबूल के बीज पीसकर और इसे शहद के साथ तीन दिनों तक ले कर, हड्डी फ्रैक्चर हटा दिया जाता है और हड्डियां थंडरबॉल्ट की तरह मजबूत हो जाती हैं।

➤ सरसों के तेल में बबूल की डालिया और इसे आग पर रखें। यह पकने के बाद, इसे आग से बाहर निकालें और इसे फ़िल्टर करें। कान में इस तेल की 2 बूंदें डालने से कान से मवाद निकलना ठीक हो जाता है।

➤ पानी के साथ बबूल की मुलायम पत्तियों को पीसकर और इसके साथ में 4-5 काली मिर्च जोड़ें और सुबह और शाम को फ़िल्टर करके सेवन करे इससे मधुमेह रोग में राहत मिलती है।

बबूल एक महत्वपूर्ण वनस्पति है। बबूल का अधिक मात्रा में सेवन करना हानिकारक हो सकता है इसलिए इसका उपयोग करने से पहले अच्छे चिकित्सक या डॉक्टर की सलाह जरुर ले यह आपके लिए ओर भी लाभदायक होगा।  

धन्यवाद .........                                                                                                             
                                                                                                                                    Author By Savita
यह भी जरुर पढ़े 

Article By

He is CEO and Founder of www.apnasandesh.com. He writes on this blog about Tech, Automobile, Technology, Education, Electrical, Nature and Stories. He do share on this blog regularly. If you want learn more about him then read About Us page

Popular Posts