Saturday, 22 December 2018

जिव विज्ञान के सजीवों का परिचय - Introduction to the biology

नमस्कार दोस्तों, आपका हमारे साईट apnasandesh.com में तह दिल से स्वागत है। दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में जिव विज्ञान ( Biology ) के बारे में जानने वाले है।

जिव विज्ञान के सजीवों का परिचय - Introduction to the biology

हमारे आस-पास बहोत से जीव होते है, यह हमे भी पता है लेकिन क्या हम उनके जिंदगी के बारे में जानते है ? जैसे की मनुष्य को ही लेलो, हम मनुष्य कैसे जीते है, कैसे सोचते है। यह एक प्राकृतिक देन है जो सभी प्रकार के जीवित प्राणी तथा सजीव को जीने के लिए प्रकृति ने बनाई है। इसी प्रकार से बहोत से छोटे-छोटे जिव प्रकृति में होते है, जैसे की विषाणु ( Virus ), जीवाणु ( Bacterium ) आदि. तो दोस्तों जानते है की जिव विज्ञान के अमूल्य जीवधारी के बारे में।


जिव विज्ञान के सजीवों का परिचय - Introduction to the biology : 

जीवधारिओ का वर्गीकरण 

अगस्तु द्वारा समस्त जीवो को दो समूह में विभाजित किया गया है। लेकिन कुछ समय बाद लिनियस ने वर्गीकरण किया की जो प्रणाली सुरु की उसी से आधुनिक वर्गीकरण जिव पड़ी, इसलिए उन्हें Father of Modern Taxonomy आधुनिक वर्गिकथा का पिता कहते है। उसके बाद Whittkar ने जीवधारिओ को पांच जगत ( Part ) में विभाजित किया

➤ Monera ( मोनेरा )
➤ Protista ( प्रोटिस्टा )
➤ Plantae ( पादप )
➤ Fungi ( बुर्शी )
➤ Animal ( जंतु )


Monera ( मोनेरा ) :

इस प्रकृति में सभी प्रोकैरोटिक जिव अर्थात जीवाणु, सायनोबैक्टेरिया, अर्कीबैक्टेरिया और तत्तुमय जीवाणु इसी प्रकृति की देन है।

Prokaryotic ( प्रोकैरोटिक जिव ) :

इन जीवो के कोशिकाओ में हिस्तेन प्रोटीन नहीं होता, और पेशी ( Cell ) में न्यूल्किअस ( Nucleus ) भी नहीं होता है। उदा. दही बनाने वाले जीवाणु, मोनेरा।

लक्षण ( Symptoms ) :-

➢ यह एकपेशीय ( Unicellular ) होते है।

➢ यह स्वयः पोषी या परपोषी होते है।

➢ इसमें Nucleus नहीं होता है।

Protista ( प्रोटिस्टा ) :

इस प्रकृति में विविध प्रकार के एककोशिकाएं ( Unicellular ), जलीय ( Aquatic ), Eukytrotic - युकायरोटिक जिव सम्मलित किये गए है। किसे डबके में से पानी का बून्द लेके सूक्ष्मदर्शी ( Microscope ) में देखा जाये तो इस प्रकार के जिव दिखते है। उदा. अमीबा ( Ameba ), युग्लीना ( Uglina ) आदि।


Plantae ( पादप ) :

इस प्रकृति में सभी रंगीन बहुकोशिकाएं ( Multi-cellular ), प्रकाश परतेशी जिव ( स्वयः पोषी ) सम्मलित होते है। उदा. शैवाल ( Algae ), मांस ( mass ), पुष्पीय तथा अपुष्पीय पौधे इसी प्रकृति की देन है।

Fungi ( बुर्शी ) :

इस प्रकार में सभी यूकैरीयोटिक ( Eukytrotic ) तथा परपोषीय जिव सम्मलीत किये जाते है। जो मरे हुए जीवो के ऊपर अपना उदरनिर्वाह ( जीवन जीते है ) करते है, यह परपोषी अथवा मृतजिवि होते है।

Animal ( जंतु ) :

इस प्रकार के सभी जिव Multi-cellular यानि एक से ज्यादा पेशी ( Cell ) वाले होते है। इसमें Eukytrotic Cell वाले जिव सम्मलित किये गए है। इन में हायड्रा, जेलीफिश, मछली, सरीसृप, उभयचल, पक्षी तथा स्थनधारी जिव सम्मलित है। लेकिन वर्तमान में सभी वैज्ञानिक ( Scientist ) विटाकर इन के पंचसृस्टि को ही मानते है।

इसी वर्गीकरण के आधार पर नए Scientist आगे की खोज करते आ रहे है। इन पांचो भाग में दुनिया के सभी जिव समा जाते है। तो अब हम जानते है की सूक्ष्मजिव ( Microbe ) के बारे में।

सूक्ष्मजिव का वर्गीकरण - Classification of microbes :

जिव विज्ञान के सजीवों का परिचय - Introduction to the biology

Bacteria ( जीवाणु ) :

इसका आकार 1 𝓾m - 10 𝓾m मिलीमायकान होता है। यह एकपेशीय ( Uni - Cellular ) जीव है। यह जिव अच्छे वातावरण में में बहोत तेजी से बढ़ते है यानि इसको Suit environment मिलता है तो यह Zominote में समा हो जाते है।


Protozoa ( आदिजीव ) :

इसका आकार 200 𝓾m इतना है, यह जिव मिट्टी, जल एवं समुंदर में रहते है। और कुछ जिव तो दूसरे जीवो के शरीर में रहकर रोग तयार करते है।

Virus ( विषाणु ) :

यह जिव अबसे कम आकार वाले जिव है। Virus को जहरीला सजीव नहीं माना जाता या कहे तो इसे सजीव और निर्जीव के बिच का दर्जा दिया है। विषाणु का आकार जीवाणु के आकार से 10 -100 पट छोटे होते है। लेकिन विषाणु से ही प्राणी तथा वनस्पति में रोग होता है। 

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इस प्रकार आज हमने जाना है की दुनिया में कितने प्रकार के सजीव है, और उनको कैसे बाटा गया है। इसके आगे की जानकारी हम आपको हमारे दूसरे लेख में देंगे। हमारे दूसरे लेख में हम जानेंगे की सजीव जिव के अंदर रहने वाली पेशी ( Cell ) के बारे में,


तो दोस्तों, उम्मीद है की आपको जिव विज्ञान के सजीवों का परिचय - Introduction to the biology यह आर्टिकल पसंद आया होगा। यदि आपको यह आर्टिकल उपयोगी लगता है, तो निश्चित रूप से इस लेख को आप अपने दोस्तों एवं परिचितों के साथ साझा करें। और ऐसे ही रोचक आर्टिकल की जानकारी प्राप्ति के लिए हमसे जुड़े रहे और अपना Knowledge बढ़ाते रहे, तब तक के लिए धन्यवाद।

                                                                                                                   Author By : Sachin sir..

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