Sunday, 10 February 2019

आध्यात्मिकता का रहस्य - The mystery of spirituality

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com में आपका स्वागत है। आज के आर्टिकल में हम पढ़ेंगे की आध्यात्मिकता का रहस्य क्या होता है, और आध्यात्मिकता का रहस्य क्यों महत्वपूर्ण है, इसके बारे में हम जानकारी प्राप्त करेंगे उम्मीद है की यह लेख आपको पसंद आए।

आध्यात्मिकता का रहस्य - The mystery of spirituality

आध्यात्मिकता का रहस्य - The mystery of spirituality :

प्रिय पाठकों,
आत्मा, परमात्मा और प्रकृती का ज्ञान ही आध्यात्म है। आत्मा, परमात्मा, संपुर्ण सृष्टि जगत तीनों लोंको और ब्रम्हांड का ज्ञान ही आध्यात्म है। आध्यात्म अर्थात आत्मा, परमात्मा का संपुर्ण संबध, संपुर्ण जगत का ज्ञान ही आध्यात्म है। आध्यात्म से हमें शक्ति मिलती हैं, परमात्मा का दिया सत्य ज्ञान ही हमें सपुर्ण अनुभुती प्राप्त कराता है। आध्यात्मिकता से हमारे अदंर अच्छे मॅनर्स आते है। आध्यात्म हमारी जिवन की उन्नती का आधार है, फाउंडेशन है। आध्यात्मिकता की कमी से आंतरिक गुण समाप्त हुए है। आध्यात्मिकता की कमी से समाज धर्म भ्रष्ट, कर्म भ्रष्ट बन गया हैं। हमारे विचारों में दिव्यता नही, समानता नही,तो मनुष्य का जिवन दुःखी, अषांत बन गया। आज हम धन, व्यक्ती, वस्तुओं सबंधो में अपने सच्चे सुख और शांति को ढुंढते है और नही मिला तो हम दुःखी होते है।


धन, व्यक्ती, वस्तुओं सबंधो में हम आध्यात्मिकता ढुंढते है तो दिन प्रति दिन उसमें गिरावट आती है उन्नती नही आती है। आध्यात्मिकता के सत्य ज्ञान को हम जिवन में लाते है तो उन्नती, प्राप्त होती है और सबंधों में मधुरता आती हैं।

विश्व में जो भी धर्म है या धार्मिक संस्थायें है उनमें एक ही धर्म आता है, वह एक ही धर्म कहलाता है। वहा एक ही धर्म का प्रचार किया जाता है, और एक ही धर्म के बारे में शिक्षा दी जाती है। और कोई धर्म उसमें समावेश नही करता है।

आध्यात्मिकता में सर्व धर्म, सर्व धर्म की आत्मायें, सर्व धर्म स्थापक, मठ, पंथ, प्रांत, समाज, साधु-सन्यासी, ऋषि-मुनी, देवतायें, विश्व की सर्व आत्मायें चाहे वह मनुष्यों की आत्मायें हो या फिर पशु-पक्षी, जानवरों की आत्मायें हों सभी उसमें आते है। उसे कहते हैं आध्यात्मिकता। आत्मा और परमात्मा के बारे में बताया जाता है।

शरत भूमि सबसे प्राचीन भूमि है। शरत में ही 33 कोटी देवताओ का गायन हैं। यही कारण है की पच्छिमी देश के लोंग शरत की और आकर्षित हो रहे है। पर आज का मनुष्य अपने आतंरिक सुःख को भूल गया है। हमारे अंदर आध्यात्मिकता की कमी से हम अपनी शक्तिओ को भूल गये। आध्यात्मिकता अर्थात आत्मा के उपर अध्यन। आध्यात्मिकता से हमारे निजी गुण बढते हैं। पहले हम बच्चों को शिक्षित करने के लिए शिक्षा दी जाती थी, आज का समाज सुशिक्षित हो गया पर सुसस्ंकृत नही हुआ। आध्यात्मिकता से ही मुल्यनिष्ठ समाज का निर्माण हो सकता है।

आध्यात्मिकता की जरूरत - Spirituality needs :

हम सभी जानते है कि आध्यात्मिकता की जरूरत आज सबको है। युवा, बजूर्ग आज सब दुःखी और अशांत रहते हैं। लेकिन समाज में युवाओं को ही आध्यात्मिकता की आवश्यकता नहीं बल्कि सभी को हैं। प्रायः देखा जाय तो आज सभीकों जरूरत हैं।


✦ युवा अपने जिवन में आध्यात्म को लाता है तो वह सभी क्षेत्रों में उन्नती को प्राप्त कर सकता है। आध्यात्म से युवा अपने मॅनर्स से सभी कार्या, क्षत्रां प्रसि़द्ध में आगे बढ सकते है। आध्यात्म हमारे जिवन के उत्थान का एक रास्ता है।

✦ युवा पीढी अपने जिवन में साकार या आचरण में लाता है सदाही आजिवन उन्नती होगी। आध्यात्मिकता को जानने, समझने से भी महत्त्वपूर्ण है उसको धारण करना, धारण करने से उसका अनूभव हम कर सकते है।

✦ धारण करने से ही प्रत्यक्ष होता है, और उसका सुख प्राप्त होता है। धारणा करने से ही हमारे अंदर गुण आते है। हमारा जिवन परिवर्तन होता है। हमारा जिवन परिवर्तन होने से दुसरों को भी ख़ुशी बांट सकते है। व्यवहार में सबंध में अपना पन आता है, दुसरों के लिए एक आदर का भाव जागृत होता है।

✦ आध्यात्मिकता से हमारा जिवन संतुलनमय होता है। आध्यात्मिकता जिवन में सत्यता लाता है। आध्यात्मिकता से दृष्टी, वृत्ती में शवना में श्रेष्ठता लाता है। नारायण अर्थात कोई दुसना नही तो श्रेष्ठ आचरण करने वाला। आध्यात्मिकता से हमारे अंदर पवित्रता, दिव्यता, श्रेष्ठता, डिवीनटी, रॉयल्टी, नम्रता, अंतर्मुखता, गभिंरता इन सब गुणां से हमारा जिवन होता हैं।

✦ आध्यात्मिकता से हम दुसरों के लिए भी शुभ भावना और शुभ कामना की दृष्टि बन जाती है। आध्यात्मिकता से हमारा जिवन धर्म श्रेष्ठ, कर्म श्रेष्ठ बनता है। आध्यात्मिकता आत्मा को परमात्मा से जोडती है। हमारा लक्ष्य सामने होता है, हमारे जिवन में एक उद्देस होता है।

✦ आध्यात्मिकता से हमारे संस्कार परिवर्तन होता है। आध्यामिकता से ही मुल्यनिष्ठ समाज का निर्माण का समाज होता है। आध्यात्मिकता का ज्ञान आत्मा से जूडा है।

आध्यात्मिकता से आत्मा के संस्कार अनूसार प्रकृती परिवर्तन होती है। हमारी दृष्टि, वृत्ति परिवर्तन होती है। उदाहरण के रूप में जैसा अन्न वैसा मन, जैसा मन होगा वैसा विचार, जैसा विचार वैसा बोल, जैसा विचार विचार वैसा माहौल, जैसा माहौल वैसा समाज, जैसा समाज वैसा देश। जैसे हमारी बुद्धी संकल्प, विचार करती है वैसा वायुमंडल बनता है।


भारत की महिमा - Glorification of India :

प्राचिन भारत सर्व सुखों से भरपुर था, वहां रहनेवाले सर्व मनुष्य दैवीगुणां से भरपुर थे। 33 कोटी देवीदेवताओं का गायन हैं। इसलिए भारत के लिए गाया जाता हैं जहां डाल डाल पर सोने की चिडीयॉ करती है बसेरा...... भारत देश पुरातन वर्ष में सभी संपन्न थे। किसी चिज की कमी नही थी, प्रकृती भी हमारी सहयोगी थी। मनुष्यों में आपसी भाईचारा और प्रेम था। भारत को ही देवभुमी कहा जाता हैं। भारत में ही साधुसंत महात्माओं का जन्म हुआ हैं। भारत में ही ऋषि मुनियां ने शस्त्र बनाये है और तपस्या भुमी कहा जाता है।

तात्पर्य ये है वर्तमान समय में आवष्यकता है आध्यात्मिकता को पहचानने की और उसको अपने जिवन में लाने की। आध्यात्मिकता न होने से हम पतन की और जा रहे है। आध्यात्मिकता से सर्वांगिण विकास किया जा सकता है। आपसी प्रेम भाईचारा को बढाकर सौहार्दमय वातावरण बनाकर देश की एकता को मजबुत कीया जा सकता है।

आज हम परमात्मा को पाने के लिए न जाने कितने जप, तप, व्रत नियम आदि किये पर अब तक हम उससे दूर रहे।
आध्यात्मिकता का रहस्य - The mystery of spirituality
आज हमारे अंदर आध्यात्मिकता को लाना बहोत जरूरी हैं। आध्यात्मिकता से ही एक नये सशक्त समाज का निर्माण होगा।

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                                                                                                                         Author By : BK गीता...
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