Friday, 29 March 2019

चतुराई की जित - Chaturai ki jeet

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com में आप सभी का स्वागत है। दोस्तों आज के इस लेख में कैसे एक चाकाल लोमड़ी अपने चतुराई से आने वाले संकट से बचती है। और अपना जीवन भाग्य खुद लिखती है।

चतुराई की जित - Chaturai ki jeet

दोस्तों स्वाभाविक बात है अगर व्यक्ति चतुर या बुद्धिमान ना हो तो उसका इस संसार में केवल सिमित ही लेवल होता है। मनुष्य के जीवन में सबसे अनमोल मिलने वाला हिरा याने बुद्धिमत्ता और चतुराई है। क्योकि अगर किसी फिल्ड में जाना है या काम करके आगे बढ़ना है, तो आप के पास Education के साथ चतुराई और बुद्धिमत्ता होना जरुरी है। तभी वह व्यक्ति या मनुष्य अपने व्यवसाय में तरक्की कर सकता है। जिंदगी जीने के लिए सिर्फ पैसा मायने नहीं रखता क्योकि अगर बुद्धिमत्ता ना हो तो वह पैसा भी किसी काम का नहीं है। पैसे का सही इस्तेमाल करना है तो बुद्धिमत्ता की जरूरत है। इसलिए जो आप सकारात्मक भाव से सोचेंगे और सही बुद्धिमत्ता का उपयोग करेंगे तो दुनिया तुम्हे सरआंखों पर रखेगी।


चतुराई की जित - Chaturai ki jeet :-

एक जंगल में एक चालाक लोमडी रहती थी। उस जंगल में सभी जानवर बडे ही प्यार से रहते थे। बस लोमडी ऐसी थी जो सबको परेशान करती थी। सबके बिच मनमुटाव पैदा करती थी। जंगल के जानवर जंगल के राजा शेर के पास हमेंशा उसकी शिकायत करते थे। पर वह चतुराई से छुट जाती थी। शेर सोचता लोमडी भोली है, सब इसकी गलती बताते है। ऐसे मे शेर को लोमडी को माफ करना ही पडता है। लोमडी की चालाकी से सभी जानवर परेशान रहने लगे। सभी ने लोमडी के खिलाफ षड्यंत्र कर शेर की नजरों से गिराने का सोचा। जंगली बिल्ली, रीछ, भेडीया मौका पाते ही लोमडी की शिकायत शेर के पास करते थे। लोमडी की शिकायत सुन सुनकर शेर तंग आ चुका था।

शेर ने सोचा सभी जानवर एक लोमडी की ही शिकायत क्युं करते है। एक बुरा होता है लेकिन सभी बुरे नही होते। शेर ने सोचा लोमडी को उसके किये की सजा देंगे। जंगल के राजा शेर ने सुनवाई कर दी लोमडी को मेरे पास बुलाया जाय।

शेर ने सबसे पहले रीछ को लोमडी को बुलाने भेजा। रीछ लोमडी को बुलाने गई और बोली जंगल के राजा शेर ने तुम्हे फांसी की सजा सुनाई है। हो सके तो अपनी जान बचाकर भाग जा। रीछ मन ही मन बहुत खुश हो रहा था।

लोमडी फांसी की सजा सुनकर पहले तो बहुत डर गई। वह एक गुफा में जाकर छिप गई। रीछ ने इसका फायदा उठाया और शेर के पास जाकर बोला, कि लोमडी ने आने से मना कर दिया। यह सुनकर शेर गुस्से में आग बबुला हो गया। दुसरी बार शेर ने भेडीये को लोमडी को बुलाने भेजा। भेडिये ने भी कहा राजा शेर तुमसे बहुत नाराज है। लोमडी भेडीये की बातो में भी नहीं आई। शेर के बार बार बुलाने पर भी वह शेर से मिलने नही गई।

इस बार शेर ने जंगली बिल्ली को बुलाने भेजा, बिल्ली ने भी लोमडी से कहा कि शेर राजा तूमसे बहुत नाराज है तुम किसी दुर दुसरे जंगल में जाकर छिप जाओ। अब शेर ने सुनवाई कर दी की जो लोमडी को पकडकर लायेगा उसे इनाम दिया जायेगा। सभी जानवरो ने उसे घेरकर पकड लिया और शेर के पास ले गए।

लोमडी समझ गई अब शेर के गुस्से से बचना मुश्किल है। उसने देखा रीछ, भेडिया, जंगलि बिल्ली एक कोने मे मन ही मन हस रहे थे। वह समझ गई मुझे तिनो ने फसांया। शेर गुर्राते हुए बोला तुम्हारी इतनी हिम्मत तुमने मुझे मना किया। मेरे बुलावे पर भी नही आई। अभी हम तम्हारे लिए फांसी की सजा सुनाते है। लोमडी बोली माईबाप मुझे षडयंत्र कर फसांया गया। मै तो चार दिन से बिमार एक गुफा में भुखी प्यासी पडी थी। मुझे आपका संदेश नही मिला। लोमडी इतना बोलकर रोने का नाटक करने लगी। लोमडी की आंखो में आंसु देखकर शेर का गुस्सा शांत हो गया। शेर ने कहा ठिक है इन सबकी शिकायत के अनुसार मै तुझे सिर्फ दो दिन पेड पर उल्टा लटकाकर रखता हुं। सभी जानवरो के सामने लोमडी को पेड पर लटका दिया। रीछ, भेडीया, जंगली बिल्ली वह हंस रहे थे। सभी जानवर लोमडी की ऐेसी हालत देखकर मजा लेने लगे पर लोमडी महाराज की जय हो, महराज अमर रहे, ऐसे नारा लगाने लगी। इस बात से शेर पर बहूत अच्छा असर हुआ। शेर ने सोचा कुछ भी हो लोमडी स्वामिभक्त है।

दो दिन, दो रात पेड पर लटक कर रहने से जब उसको निचे उतारा गया लोमडी की हालत बहुत खराब हो गई थी। लोमडी शरीर से कमजोर थी पर मन ही मन रीछ, भेडीया, जंगली बिल्ली तीनों को सबक सिखाने के बारे में सोच रही थी।

चतुराई एक वरदान :-

दो दिन बाद रीछ जा रहा था। लोमडी ने रीछ को बुलाया और कहा रीछ भैया राम राम आओ शहद खाओ।शहद का नाम सुनते ही रीछ के मुंह में पानी आ गया। उसने कुछ भी सोचा नही और शहद की बर्तन पर टुट पडा। लोमडी ने खुजली वाले पत्तो को पिसकर उन पत्तो का अर्क बर्तन में रखा था। जैसे ही रीछ ने मुंह लगाया वह खुजली से इधर उधर भागने लगा। उसकी परेशानी देखकर लोमडी बहुत खुश हुई और झाडीयों में जाकर छिप गई। वह दौडता हुआ शेर के पास गया और लोमडी की शिकायत करने लगा।

दुसरे दिन लोमडी के हाथ एक शीसा था। वह बार बार शीसा देख रही थी। भेडिया ने पुछा क्या हुआ बहन बार बार शीसा क्युं देख रही हो ? लोमडी बोली मैने एक दवाई वाले पानी से मुंह धोया तो मेरे चेहरे के दाग चले गये और मेरा चेहरा भी निखर गया। भेडीया ने देखा सही मे उसका चेहरा निखर गया था। लोमडी ने चेहरे पर खडिया मल रखी थी। वह समझा नही और बोला दवाई वाला पानी है तो मै भी मुंह धोता हुं मेरे भी चेहरे पर दाग हो गये है।

लोमडी बोली ठिक है आंखे बंद करके लेट जाओ दवाई का पानी आंखो में नुकसान करता है। वह लेट गया लोमडी ने उसके उपर गरम गरम पानी लोमडी डाल दिया। भेडिये का चेहरा गरम पानी से झुलस गया। वह तडपता रहा और चिल्लाता रहा। तब तक लोमडी भाग गई। उसने भी शेर के पास जाकर शिकायत की।

अभी बिल्ली की बारी थी। एक दिन लोमडी, बिल्ली को देखकर जोर जोर से बडबडाने लगी। बोली, बाप रे खलिहान में कितने चुहे है कोई बिल्ली होती तो खा खाकर मोटी ताजी हो जाती। जंगली बिल्ली ने यह सब बाते सुन ली और बोली लोमडी बहन कहा है चुहे ? लोमडी बोली पास के खेत में बहुत चुहे है उस खेत का मालिक बहुत परेशान है। उसने मुझसे बात की चुहो को मारने की, लेकिन मै तो चुहे खाती नही।

बिल्ली बोली पर मैं तो खाती हुं। मुझे दिखाओ वह खेत, लोमडी बिल्ली को खेत में ले गई। खेत मे एक गोदाम था। वहा के दिवार में एक सुरंग था। वो सुरंग में लोमडी ने बिल्ली को जाने को कहा सुरंग के उस तरफ किसान ने फंदा लगाया था। बिल्ली फंदे में फंस गई। बिल्ली को बहुत डंडे पडे। बिल्ली लडखडाते हुये शेर के पास पहुंची और लोमडी की शिकायत करने लगी।

शेर गुस्से में पागल हुआ दहाडते हुआ बोला लोमडी को बुलाने भेजा। लोमडी बिना देर किये शेर के पास पहुंच गई।

तिनों जोर से चिल्लाये बोले यही है जिसने हमारी यह हालत कि है।

लोमडी शेर के पैरों में गिर गई और महाराज मुझे पता नही था। शहद में खुजली होती है, भेडिया ने अपने उपर बिना देखे पानी डाल दिया। और बिल्ली चोरी के इरादो से खेतों में गई थी। यह बेवकुफ है मै क्या करूं मेरी इसमें कोई गलती नही है।

लोमडी की बात सूनकर शेर खुब हसा, उसने तिनों से कहा, तुम निंदक हो पर मुर्ख भी। आज तुम्हारी मुर्खता की वजह से तुम्हारी यह हालत हुई है। मै तुम्हे अपने साथ नही रख सकता। फिर लोमडी से कहा तुम अगर मुझे वचन दो कि दोबारा ऐसे नही करोगी तो मै तूम्हे माफ कर दुंगा। लोमडी भी मान गई, और सभी चले गये। तीनो को अपनी करनी की सजा भी मिली और वो शर्मिंदा भी हुये।

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