Thursday, 28 March 2019

एकता में सुंदर गुणों का संचार - Communicating beautiful qualities in unity

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com आप सभी का स्वागत है। दोस्तों आज के इस लेख में हम एकता की शक्ति के बारे में जानने वाले है।

एकता में सुंदर गुणों का संचार - Communicating beautiful qualities in unity

एकता में शक्ति यह वर्तमान और भविष्य बदलने वाली बात है। क्योकि दुनिया के बदलते रूप को देखकर सोचा जा सकता है की मनुष्य में एकता का होना बहुत ही जरुरी है। आप जानते ही है की छोटी सी चींटी का समूह बहुत बड़ा कार्य कर जाती है। वह कभी हार नहीं मानते, क्योकि समूह से कोई भी कार्य करो तो वह कार्य जल्द और आसानी से हो जाता है। मनुष्य यही बात को नहीं समज पाया है की वह समूह से काम करे तो आसानी से जित हासिल कर सकता है। मनुष्य और प्राणी की तुलना की जाये तो, एकता के मामले में सबसे आगे प्राणी ही है। क्योकि वह समूह से कार्य करते है। यदि कोई व्यक्ति आपके क्षेत्र में एकता के साथ काम करता है, तो वह अपनी राशि को यथासंभव प्राप्त कर सकता है। और वर्तमान का विकास हो सकता है। इसी तरह दोस्तों आज हम एक कहानी के माध्यम से एकता की शक्ति को पहचानेंगे, जो आपके जीवन को बदल सकती है।



एकता में सुंदर गुणों का संचार - Communicating beautiful qualities in unity :- 

एक गांव में एक किसान रहता था। किसान बहुत अमीर था। उसके पास बहुत सारी खेती थी, एक भरापुरा परिवार था। किसान बहुत सुलझा हुआ और समझदार व्यक्ती था और वह मेहनती था। उसकी पत्नि नही थी। किसान को चार बेटे थे, वह आपस में बहुत लडते झगडते रहते थे। लडते लडते आपस में मारपिट भी करते थे। गांव में तरह तरह कि बाते होने लगी कि किसान के बेटे आपस में बहुत लडते है। किसान को चिंता लगी रहती थी कि, उसके मरने के बाद उसके बेटों का क्या होगा ? क्योंकी उन चारों में एकता नही थी।

एक दिन किसान ने चारों बच्चों को बुलवाया। और कहा आप चारों भाई आपस में ऐसे लडो नही। मिल जुलकर रहोगे तो सभी काम आसानी से होंगे, और मनमुटाव नही होगा। एक दुसरे को मदद किया करो, खेत खलिहान चारों मिलकर संभाला करो। तो सभी कामो में आसानी होगी। पर किसान के बेटे मानते ही नही थे वह एक दुसरे का मुंह भी देखना पसंद नही करते थे।

किसान को अपने बेटों के व्यवहार में कोई परिवर्तन नही दिखा तो उसको बडी चिंता हुई। क्या किया जाय ? किसान बुढा हो चला था। अपने बच्चों की चिंता में किसान बिमार रहने लगा। किसान ने बिस्तर पकड लिया था। उसकी अब जादा दिन बचने की उम्मिद नही थी।

एकता की शक्ति :-

किसान ने एक दिन एक युक्ति रची अपने चारों बेटो को एक साथ बुलाया और चारों बेटो को किसान ने कहा पास के खेत से कुछ लकडियां रखी हुई है वहा से दो दो लकडियां उठाकर लाओ। किसान के बेटो ने वैसा ही किया। किसान ने एक एक लकडि तोडने के लिये कहा। सभी ने एक एक लकडि आसानी से तोड दी। फिर किसान ने कहा चारों लकडिया एक साथ मिलाकर तोडो। लडको ने वही किया पर चारो लकडिया एक साथ कोई भी नही तोड पाया। बहुत जोर लगाकर लकडियां तोडने की कोशिस की पर वह कोई भी लकडियां नही तोड पायें। किसान के लडको ने कहा कि यह तो नही टुट रही। एक लकडी आसानी से तोड दिया पर चारों भाई इस कार्य में असफल रहें। किसान अपने लडकों को समझाने लगा आप चारों ने लकडियां नही तोड पायें इसे कहते है एकता कि शक्ति। मैं तुमको इस कार्य के द्वारा यही समझाना चाहता था। वैसे ही तुम चारों भाई एकसाथ मिलकर रहोगे तो तुम्हे कोई जित नही सकता। एक दुसरे की मदद करोगे, मिलकर रहोगे तो तुम्हे कोई जित नही सकता।


एकसाथ मिलकर रहोगे तो सफलता मिलती है, बरकत आती है। कोई भि परिस्थिती का मिलकर सामना करोगे तो उस पर सहज सफलता मिलती है। एकता में बढि ही शक्ति होती है।

किसान के बेटो को अपने पिता की बात समझ में आई। अब सभी आपस में बडे ही प्यार से रहने लगे। वह अब झगडते भी नही थे। सब काम मिल जुलकर करते थे। किसान बिमार बिस्तर पर ही पडा था। पर उसको अपने बेटो की चिंता नही थी। उनकी एकता देखकर वह बडा खुश था। ऐसे करते करते कुछ साल बित गये और एक दिन किसान मर गया। किसान के मरने पर भी किसान के बेटे मिल जुलकर रहते है।

इस कहानी से हमे यह सीखने मिलता है की एकता की शक्ति सबसे सुरवीर बनाती है। मुश्किल से भी मुश्किल काम को बड़े ही आसानी से एकता के शक्ति से जिताया जा सकता है। Team work जरुरी है यह लेख आपने पढ़ा ही होगा। दोस्तों यह थी हमारी एकता के शक्ति के बारे में कहानी लेकिन अगर मनुष्य में अच्छे गुणों का संचार ना हो तो वह बरबादी का कारण हो सकता है। इसलिए हम गुणों की पहचान करने वाले है। एक सुंदर कहानी के माध्यम से।

सुंदरता गुणों की पहचान :- 

चंद्रगुप्त के जिवन की एक छोटी सी लेकिन शिक्षा भरी कहानी है। चंद्रगुप्त इसका जन्म पाटलीपुत्र मे हुआ था। वह पहला राजा था जो अखंड भारत पर राज्य करने वाला था। वह एक पराक्रमी राजा था। वह जन्म से ही गरिब था। चंद्रगुप्त राजा के मां का नाम मुरा था। उसके पिता की मृत्यु जन्म से पहले ही हो गई थी। तब चाणक्य नाम के ब्राम्हण ने चद्रंगुप्त को पाला।

एक बार चंद्रगुप्त मौर्य ने आचार्य चाणक्य से पुछा आप सुंदर होते तो बहोत अच्छा होता। चाणक्य इस बात पर हंसते हुए बोला राजन् इंसान की पहचान उसके किये हुये अच्छे कर्मो से होती है। सम्राट बोले हर जगह गुण और कर्म ही नही रूप भी काम में आता है। क्या आप मुझे इसका कोई उदाहरण दे सकते है। जो गुण के सामने रूप छोटा पड गया हो।

चाणक्य ने कहा क्युं नही बहुत सहज है, चाणक्य ने दो गिलास पानी लाने को कहा, पर एक ग्लास पानी सोने के बर्तन का और एक ग्लास मिटटी के बर्तन का पानी मंगाया। फिर दोनो ग्लास का पानी सम्राट मौर्य को पिने को कहा गया। सम्राट ने दोनो घडे का पानी पिया। चाणक्य ने सम्राट से पुछा आपको कौन से घडे का पानी अच्छा लगा या फिर कौन से घडे पानी पिकर प्यास बुझी। यह सब बाते सम्राट की पत्नि सून रही थी। सम्राट ने कहा की मिटटी के घड़े का पानी पीकर प्यास बुझी। इसपर चाणक्य बोला वो घडा ही किस काम का जो प्यास न बुझा सके। इस उदाहरण से सम्राट की पत्नी बहुत खुश हुई।


व्यक्ति की पहचान उसके गुणों से होती है :- 

मटकी भले ही कुरूप हो आकर्षित न करती हो परंतु मटके के पानी से ही प्यास तृप्त होती है। सोने का मटका कितना भी चमकिला हो और सुंदर हो पर प्यास बुझाने में असमर्थ है। वैसे ही सुंदर इन्सान पर उसके गुण अच्छे न हो। क्रोध करना, लडना, झगडना उसके व्यवहार से सब दुखी होते है। वही सुंदरता कुछ दिन तक ही आाकर्षित करती है। पहले हमें वह सुंदरता बहुत आकर्षित करती है उसका स्वभाव मालुम होने पर वह हमें चेहरे से ही सुंदर दिखती है, गुणो से नही। वह सुंदरता किस काम की।

काला कलुटा एक कुरूप इन्सान दिखने में वह भले सुंदर न हो पर उसका आचरण गुणकारी हो, किसी को दुख न देता हो। सबकी मदद करता हो, वैसे इन्सान की तरफ हम स्वत-ही आकर्षित होते है। सुंदरता हमेशा कायम नही रहती, व्यक्ती के गुण हमेशा कायम रहते है। सुंदरता आज है तो कल नही, पर व्यक्ती के गुण हमेशा कायम रहते है। इस कारण इन्सान हमेशा गुणों के कारण पहचाना जाता है, रूप के कारण नही।

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                                                                                                                           Author By : BK गीता...
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