Sunday, 24 March 2019

अच्छा कर्म मनुष्य का विश्वास है - Good karma is the faith of man

नमस्कार दोस्तों, आप सभी का apnasandesh.com पर स्वागत है। दोस्तों, हमारे साथ जुड़े रहें और नई चीजों को जानें। दोस्तों, आज के लेख में आप कर्म की परिभाषा जानने वाले हैं। अगर कर्म अच्छा है तो खुशी आपके पास आती है।

अच्छा कर्म मनुष्य का विश्वास है - Good karma is the faith of man

संसार में प्रकृति के नियम को किसीने नहीं रोका है। क्योकि जब भी इस प्रकृति में बदलाव होते है तो वह इस सृष्टि को बचाने के लिए ही होते है। मनुष्य प्राणी जो अपने अच्छे या बुरे कर्मो से जाना जाता है। किसी महान व्यक्ति ने भी खूब लिखा है की मनुष्य के पाप - पुण्य उसे इसी जनम में भुगतने पड़ते है। जैसा आप कर्म करेंगे जो अच्छा भी हो सकता है या बुरा भी हो सकता है। जिस तरह आप अपने मन को विश्वास दिलाएंगे की वह अच्छा कार्य कर रहा है, वह सबकी मदत कर रहा है। यह जो बात है, आपका आत्मविश्वास बढ़ाएगी। निस्वार्थ से अगर आप किसी की मदत करते है और उस किये हुए मदत के बदले आप किसी वस्तु की लालच नहीं करते तो आप एक अच्छे व्यक्तिमत्व वाले इंसान के नाम से जाने जा सकते है।



अच्छा कर्म मनुष्य का विश्वास है - Good karma is the faith of man :-

एक राज्य में बहुत बडा सेठ था। पर वह बहुत कंजुस था, वह कभी किसी को भीख नही देता था। कभी किसी को दान धर्म नही करता था। नौकरों को भी उनके काम के पैसे बराबर नही देता था। किसी न किसी बहाने से उनका पैसा काटता था। सारे नौकर परेशान थे। वह सेठ बहुत गुस्सेवाला था बात-बात पर नौकरों पर गुस्सा करता था।

एक भिखारी रोज एक-एक दरवाजे जाता भिख मांगता था। सेठ के घर भी रोज भीख मांगता था। सेठ रोज उसको गंदी-गंदी गाली देता था। उसको धक्के मारकर निकाल देता था। ताने मारत था, काम क्यूं नही करते, मर जाओ कहीं जाकर, शर्म नही आती क्या भीख मांगते हो तो ? कभी गुस्से से उसको धकेल देता था। लेकिन भीखारी हमेशा ऐसे ही कहता था ईश्वर तूम्हारे पापों को माफ करें, इतना बोलकर वह वहां से चला जाता था।

गुस्सा यह मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है :-

एक दिन सेठ बहूत गुस्से में था। उसको धंदे में बहोत नुकसान हुआ था। भीखारी उसी समय भीख मांगने आ पहुंचा जब वह गुस्से में था। भीखरी भी उसी समय आवाज देने लगा। सेठ ने कुछ भी नही सोचा आंगन में पडा हुआ पत्थर उठाकर उसके सिर पर दे मारा। भिखारी के सिर पे बहूत चोट आई। उसके सिर से खुन भी बहने लगा। फिर भी भिखारी ने कहा ईश्वर तूम्हारे पापों को माफ करें, और वह वहां से जाने लगा। उसकी ऐसी हालत होने पर भी वह ईश्वर तूम्हारे पापों को माफ करें, यह दुवा देकर जा रहा है। सेठ को बडा अजीब लगा। और उसको गुस्सा कम हो गया। सोचा मैंने उसे पत्थर मारा फिर भी दुवा ही दिया। इसकी क्या वजह है यह जानने के लिए सेठ भिखारी के पिछे-पिछे उसके घर चुपचाप गया।


सेठ भिखारी जहा जाता वहा उसके पीछे पीछे जाता। कोई भीखारी को भीख देता तो कोई गुस्से से मार देता, कोई दरवाजा पटक देता। फिर भी भिखारी इतना ही बोलकर चला जाता था। अब अंधेरा होता चला था भिखारी अब अपने घर के तरफ लौट रहा था। एक टुटी फुटी झोपडी में वह भिखारी पहुंचा, एक टुटी खटीया पर एक बुढीया सोई थी। वह बुढीया जरूर उस भिखारी की पत्नि होगी। बुढीया की हालत बहुत खराब थी। जैसे ही उसने भिखारी को देखा वह उठकर चलने लगी, उसकी हालत बहुत खराब थी। और भिखारी का कटोरा देखने लगी। उसके भीख के कटोरे में सिर्फ आधी बासी रोटी थी। रोटी देख बुढीया बोली आधी रोटी बस और कुछ नही। आपका सिर कहा फुटा किसने मारा ?

दयावान होना यह महान व्यक्तिमत्व की निशानी है :-

भिखारी बोला हां किसीने गाली दिया, किसीने पत्थर मारा, जली कटी सूनाई इसिलिए सिर फुटा गया। पर खाना इतना ही दिया। याद है ना यह सब हमारे हि किये हुये कर्मो का, पापों का परिणाम है। भिखारी बोला कुछ सालों पहले हम बहुत अमिर हुआ करते थे। सब कुछ था हमारे पास हमने कभी किसी को भीख नही दिया, दान नही दिया। किसी को खाना नही दिया। पडोसीयो से भी कभी अच्छे से बात नही की, अपने घमंड में चुर थे। एक अंधा भिखारी हमारे घर हमेंशा भिख मांगने आता था। तुम्हे याद है ? यह सूनकर बुढीया फुटफुटकर रोने लगी। उसने कहा उसे मै कैसे भुलुंगी उसका हम बहोत मजाक उडाते थे। उसके भिख के कटोरे में रोटी की जगह खाली कागज डाल देते थे। ऐसे करके हम बहोत खुश होते थे। हम उसका बहुत मजा लेते थे। कभी-कभी उसको धकेल भी देते थे। सब याद है। मैने उसे घर के बाहर बने नाले में एक बार गिरा दिया। उसे कभी रास्ता नही बताती थी। रोटी मांगने आता था उसके कटोरे में कागज डाल देती थी और हम बहुत हसते, मैं उसका कटोरा तक फेंक देती थी और उसे गाली देती थी। मैं उसे कैसे भुल सकती हुं ? यह हमारे ही पाप कर्मो का परिणाम है। अंधा भिखारी रोते रोते हमको बद्दुवा देते हुए वहा से जाता था। कहता तुम्हारे पापों का किया ईश्वर करेंगे। उसकी हाय हमें लगी।

भिखारी ने कहा मैं किसी को बद्दुवा नही देता हुं। मैं नही चाहता हमारे तरह कोई भुखा रहे, दाने दाने को तरसे, अभी हमको पता चला के भुख क्या होती है। भिखारी बन चाहे मेरे साथ कितना भी गलत व्यवहार क्यें न करें मै कभी बद्दुवा नही देता। मेरे साथ अन्याय करने वालों को भी मै दुवा ही देता हूं। मेरे जैसे बुरे दिन किसी के न आए। क्यूंकी वह क्या पाप कर रहे है उन्हे मालुम नही है। इसलिए मेरे दिल से यही निकलता। जो मै सह रहा हुं वह कोई और न भुगते।


सेठ वहा चुपके से सब सुन रहा था। उसे सब समझ आ गया था। बुढीया ने आधी रोटी के दो टुकडे किये। दोनो ने एक एक टुकडा खाया पानी पिकर ईश्वर का शुक्रिया अदा कर सो गये।

दुसरे दिन भिखारी जब सेठ के घर भिख मांगने गया तो सेठ ने पहले ही दो रोटीयां निकालकर रखी थी। उसने भिखारी के बर्तन में रोटीयां डाला और हल्की मुस्कान से बोला माफ कर दो भाई गलती हो गई। भिखारी ने कहा ईश्वर तुम्हारा भला करें और वो वहां से चला गया।

सेठ समझ चुका था हम तो कर्म करते है और हमारे कर्मा के अनुसार ही ईश्वर हमें फल देते हैं। असली जादुगर तो वो है जो सबका लेखाजोखा रखता है। वो किसी को दिखता नही पर हमेशा सबका हिसाब रखता है।

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एक बूढ़े भिखारी की कहानी - अच्छा कर्म मनुष्य का विश्वास है - गुस्सा यह मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है - दयावान होना यह महान व्यक्तिमत्व की निशानी है - हमारे कर्मो के अनुसार हमे फल मिलता है। 



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                                                                                                                           Author By : BK गीता...
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