Tuesday, 19 March 2019

हमारे सौरमंडल की जानकारी - Information about our solar system

नमस्कार दोस्तों, आशा करता हु की आप सभी अच्छे होंगे। Engineering और Medical के युग में हमारा भौगोलिक ज्ञान कम होते जा रहा है। इस लिए मैंने तय किया की कुछ आर्टिकल भौगोलिक पर लिखूंगा तो आज हम जानेंगे सौरमंडल के बारे में और ग्रहो के बारे में, तो चलिए शुरू करते है सौर मंडल की जानकारी।

हमारे सौरमंडल की जानकारी - Information about our solar system

सूर्य के चारो और चक्कर लगाने वाले विभिन्न गृह, क्षुदग्रह, धूमकेतु, उल्काओ तथा अन्य आकाशीय पिंड के समूह को ही सौरमंडल कहते है। सौरमंडल में सूर्य का प्रभुत्व है, सौरमंडल के समस्त ऊर्जा का स्त्रोत भी सूर्य ही है। प्लेनेट्स सौरमंडल के बाहर बिल्कुल एक जैसे दिखने वाले जुड़वाँ पिंडो का समूह है।


हमारे सौरमंडल की जानकारी - Information about our solar system :-

सूर्य :-

➢ सूर्य सौरमंडल का प्रधान है। यह हमारी मंदाकिनी ( Galaxy ) Milky Way के केंद्र से लगभग 36000 प्रकाश वर्ष की दुरी पर एक कोने में स्थित है।

➢ यह Milky Way मंदाकिनी के केंद्र के चारों और 250 km/sec की गति से परिक्रमा कर रहा है। इसका परिभ्रमण काल 25 करोड़ वर्ष है। सूर्य एक गैसीय गोला है, जिसमे हायड्रोजन 71 %, हीलियम 26. 5 % एवं अन्य तत्व 2. 5 % होता है।

➢ सूर्य का केंद्रीय भाग क्रोड़ ( Core ) कहलाता है, जिसका तापमान 1. 5 * 10⁷ ⁰c होता है, तथा सूर्य के बाहरी सतह का तापमान 6000 ⁰c है। सूर्य की उम्र 5 बिलियन वर्ष है। भविष्य से सूर्य द्वारा ऊर्जा देते रहने का समय 10 ¹¹ वर्ष लगभग हो सकता है।

➢ सूर्य के प्रकाश वर्ष को पृथ्वी तक पहुंचने का समय 8 मी. 16. 6 से. का समय लगता है।

➢ सूर्य का व्यास 13 लाख 92 हजार किमी. है, जो पृथ्वी के व्यास का लगभग 110 गुणा अधिक है।

ब्रह्मांड के बारें में हमारा बदलता दृष्टिकोण :-

प्रारंभ में पृथ्वी को ब्रह्मांड का केंद्र माना जाता था, जिसकी परिक्रमा सभी आकाशीय पिंड ( Celestial body ) विभिन्न कक्षाओं ( Orbit ) में करते थे। इसे भूकेंद्रीय सिद्धांत ( Geocentric Theory ) भी कहा जाता है।

इसके बाद फेलॉड के खगोलशास्त्री निकोलस कॉपरनिकस ( 1475 - 1543 ई. ) ने यह दर्शाया की सूर्य ब्रह्मांड के केंद्र में है, तथा ग्रह इसकी परिक्रमा करते है। अंतः सूर्य विश्व का ब्रह्मांड का केंद्र बना, इसे सूर्यकेन्द्रिय सिद्धांत ( Heliocentric theory ) कहा गया। लेकिन 20 वी शताब्दी के आरंभ में जाकर हमारी मंदाकिनी Milky Way की तस्वीर सफल हुई, सूर्य को इस मंदाकिनी के एक सिरे पर अंतस्थित पाया गया। इस प्रकार सूर्य का ब्रह्मांड का केन्द्रक होने का अस्तित्व समाप्त हो गया।


सौरमंडल के पिंड :-

सौरमंडल में मौजूद पिंडो को तीन भागो में बाटा गया है।

➢ परंपरागत ग्रह :- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनी, अरुण एवं वरुन।
➢ बोने ग्रह :- प्लूटो, चेरोंन, सेरस, 2003 यूबी 313
➢ लघु सौरमंडलीय पिंड :- धूमकेतु, उपग्रह एवं अन्य छोटे खगोलीय पिंड।

ग्रह :- 

ग्रह वे खगोलीय पिंड है, जो निम्न शर्तो को पूरा करता है। जो सूर्य के चारों और परिक्रमा करता है। उनमे पर्याप्त गरूत्वाकर्षण बल हो जिससे वह गोल स्वरूप ग्रहण कर सके। उसके आस-पास का क्षेत्र साफ़ हो, यानि उसके आस-पास अन्य खगोलीय पिंडो की भीड़ भाड़ न हो।

ग्रह के इस परिभाषा के आधार पर Pluto को ग्रह के श्रेणी से निकाल दिया है। फलस्वरूप परम्परागत ग्रहो की संख्या 9 से होकर 8 पर रह गयी है। यम को याने Pluto को बोने ग्रह की श्रेणी में रखा गया है।

बुध, शुक्र, शनि, बृहस्पति एवं मंगल इन पांच ग्रहो को खुली आँखों से देखा जा सकता है।

आकार के अनुसार ग्रहो का क्रम ( घटते क्रम में ) :-

➦ बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण, पृथ्वी, शुक्र, मंगल एवं बुध अर्थात सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति, एवं सबसे छोटा ग्रह बुध है।

घनत्व के अनुसार ग्रहो का क्रम ( बढ़ते क्रम में ) :-

➦ शनि, अरुण, बृहस्पति, नेप्चून, मंगल एवं शुक्र आदि।
➦ शुक्र एवं अरुण को छोड़कर अन्य सभी ग्रहो के प्ररिक्रमण की दिशा एक ही होती है।

बुध - Mercury :-

✦ यह सूर्य का सबसे नजदीकी ग्रह है, जो सूर्य निकलने के दो घंटे पहले दिखाई देता है। यह सबसे छोटा ग्रह है, जिसके पास कोई उपग्रह नहीं है।

✦ इसका सबसे विशिष्ट गुण है की इसमें चुंबकिय क्षेत्र का होना।

✦ यह सूर्य की परिक्रमा सबसे कम समय में पूरी करता है। अर्थात यह सौरमंडल का सर्वाधिक कक्षीय गति वाला ग्रह है।

✦ यह दिन में अति गर्म व रात में बर्फीला होती है, इसका तापमान रात में 184 ⁰c व दिन में 427 ⁰c हो जाता है।

शुक्र - Venus :-

✦ यह पृथ्वी का निकट, सबसे चमकीला एवं सबसे गर्म ग्रह है।

✦ इसे साँझ का तारा या भोर का तारा कहा जाता है। क्योकि यह शाम में पच्छिमी दिशा में तथा सुबह पूरब की दिशा में दिखाई देता है।

✦ इसे पृथ्वी का भगिनी ग्रह भी कहते है, यह आकार एवं व्यास से पृथ्वी के समान दिखता है।

✦ इससे पास कोई उपग्रह नहीं।

बृहस्पति - Jupiter :-

✦ यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है.इसे अपने धुरी के चक्कर लगाने में 10 घंटा और सूर्य की परिक्रमा के लिए 12 वर्ष लगते है।

✦ इसका उपग्रह ग्यानीभीड़ सभी उपग्रहों में सबसे बड़ा है और इसका रंग पीला है।

मंगल - Mars :-

✦ इसे लाल ग्रह भी खा जाता है। इसका रंग लाल, आयरन ऑक्साइड के कारण है।

✦ यह पृथ्वी के सामान दो ध्रुव है तथा इसका कक्षावली 25 ⁰ कोण पर झुका हुआ है, जिसके कारण यहां पर ऋतु परिवर्तन होता है।

✦ यह अपनी दुरी पर 24 घंटे में एक बार पूरा चक्कर लगाता है।

✦ इसके दो उपग्रह है, फ़ोबस और डीमोस।

✦ सौरमंडल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी ओलिंपस मेसी इसी ग्रह पर है। और सबसे बड़ा पर्वत जो माउन्ट एवरेस्ट से तीन गुना ऊँचा है, वह पर्वत इसी ग्रह पर स्थित है और उसका नाम है निकस ओलम्पिया।

✦ पृथ्वी के अलावा यह एकमात्र ग्रह है, जिसपर जीवन की संभावना व्यक्त की है।

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शनि - Saturn :-

✦ यह आकार में सबसे दूसरा बड़ा ग्रह है। इसकी विशेषता यह है की इसके तल के चारो और वलय का होना ( मोटी प्रकाश वाली कुंडली ) वलय की संख्या 7 है।

✦ यह आकार में पिले तारो के सामान दिखाई पड़ता है, जो सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह है।

✦ इसका घनत्व सभी ग्रहो से और जल से भी कम है, यानि इसे जल में रखने पर यह तैरने लगेगा।

दोस्तों यह था आज का आर्टिकल जो हमारे सौरमंडल के तारो की निम्लिखित जानकारी, और भी इसके बारे में जानकारी पढ़ने के लिए हमसे जुड़े रहे। क्योकि जल्द ही इसके बारे विस्तार में जानकारी देने वाले है तब तक के लिए धन्यवाद दोस्तों,

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                                                                                                                        Author By : Sachin Sir...
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