Saturday, 30 March 2019

नवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य क्या है - What is the spiritual secret of Navaratri

नवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य क्या है, नवरात्री कलश की स्थापना.navaratri me pooja kaise kare, navratri ka prachin itihas. What is the spiritual secret of Navaratri. भारत सबसे प्राचिन भुमि है, भारत में ही देवीदेवताओं का गायन होता.  नवरात्री कलश की स्थापना - Establishment of Navratri Kalash, विपरीत बुद्धि मनुष्य का विनाशकाल है.

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com में आप सभी का स्वागत है। प्रिय पाठकों, आज का लेख नवरात्रि के महत्व के साथ आध्यात्मिक रहस्यों की शुरूआत के बारे में अधिक जानकारी देने वाला है और यह कैसे विरोधी विचारों को नष्ट कर देगा जानिए पूरी जानकारी।

नवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य क्या है - What is the spiritual secret of Navaratri

भारत सबसे प्राचिन भुमि है, भारत में ही देवीदेवताओं का गायन होता है। भारत में ही साधुसंत महात्मायें होकर गये है। भारत में ही देवीदेवताओं की पुजा होती है। यही कारण है कि पष्चिमी देश आज भारतीय संस्कृती की और आकर्षित हो रही है। सबसे ज्यादा त्यौहार भारत में ही मनाये जाते है। सभी जाती और धर्मो के अनूसार सभी त्यौहार महत्त्वपुर्ण है। इसमें एक महत्त्वपुर्ण त्यौहार नवरत्री का त्यौहार है। इन दिनो लोंग श्रद्धा भाव से पुजा अर्चना करते है। मंदिरो में श्रद्धालओं की भिड लगी रहती है। नवरात्री में देवीयों की पुजा होती है। जिन्हे शिवशक्ति भी कहा जाता है। इनसे भक्त गण सिद्धी भी प्राप्त करती है। तथा इनकी मनोकामनायें भी पुर्ण की जाती है। दुर्गा, महाकाली, सरस्वती, लक्ष्मी, अम्बा, भवानी, चामूंडा, चंडिका और आद्यादेवी आदि अन्य कई नाम भी इन देवियोकि पूजा अर्चना की जाती है। उत्तर भारत में, दुर्गा को शाकुंभरी के नाम से जाना जाता है। यह नाम सभी गुणात्मक नाम है। ये सभी विषय थे, क्योंकि उन्होंने शिवशक्ति प्राप्त कर ली थी।



नवरात्री कलश की स्थापना - Establishment of Navratri Kalash :-

नवरात्री के पहले ही दिन कलश की स्थापना की जाती है और अखंड ज्योती भी जलाई जाती है। जागरण किया जाता है, गर्भा किया जाता, भक्ति भी धुमधाम से कि जाती है। इन सभी त्यौहारों का भारत में अपना-अपना आध्यात्मिक रहस्य है। देखाजाये तो सभी त्यौहारों के पिछे एक कथा है। इन कथाओं में देवीयों को हिसंक बताया गया है। जबकि धर्म का तो मुल ही अहिंसा है।

सच्ची नवरात्री और सच्चा दषहरा मनायें इसका आओं गहनता से विचार करें। आपको ज्ञात है तो पूरातन काल में कलियुग के अंत में जब शिव भगवान इस धरा पर आये थे उन्हे सृष्टि के परिवर्तन का कार्य करना था। कहते है कि परिवर्तन ही संसार का नियम है। जब भगवान शिव इस धरा पर आये तो संसार परिवर्तन के पावन कार्य के लिये उन्हे माताओं-कन्याओं को ज्ञान का कलश दिया अर्थात ज्ञान इसी की याद में कलश की स्थापना की जाती है।

जब भगवान इस धरा पर आये तो कुमारीयों ने ब्रहमचर्य का व्रत का पालन करते हुये उन्हे अत्याधिक सहयोग किया था। वरदान के रूप में शिव ने इन  कन्याओं, माताओं को शक्तिया दि थी। जिन अस्त्रों,शस्त्रों व असुरों का कथाओं में वर्णन है, वे हिंसक अस्त्र-शस्त्र नही बल्कि ज्ञान व योग के अलौकिक अस्त्र-शस्त्र थे। जैसे ज्ञान बाण, ज्ञान तलवार, योग का कवच आदि। और असुर भी कोई ऐसे मनुष्य नही थे। जो बडी-बडी दांतो वाले, काले, लंबे बालों वाले,डरावने। मनुष्य में जो वृत्ती है बुराई, व्यसन,लडना-झगडना यह सब वृत्ती अर्थात असुर। देवता, मनुष्य में या असुरां में क्या फर्क है ? आंखे, नाक, कान, मूंह, हाथ-पांव सब एक जैसे है फर्क है सिर्फ दैवीगुणों का। देवताओं में दैवीगुण है और मनुष्य में नही है इसिलिए उनको देवता कहा जाता है और मनुष्यों को मनुष्य। काम, क्रोध, अहंकार आदि को भी असुर कहा जाता है। तो इन देवीयों ने ज्ञान योग के दिव्य अस्त्रों से इन मनोविकारों रूपी असुरां का संहार किया।

हमेें इन देवीयां की पुजा करके ही हमें खुश नही होना है। बल्कि स्वंय को देवताओं जैसा बनाने का पुरूषार्थ करना है। अब स्वंय परमपिता परमात्मा शिव ने माताओं और कन्याओं को ज्ञान कलश देकर असुरों का नाश करने का महान कार्य सौंपा है। उनमें पवि़त्रता का बल भरा है। आज का युग मनुष्यों का है। मनुष्य तो बहुत कम रहे गये। तो अभी सच्ची नवरात्री मनाने का। स्वंय को भी रात्री के अज्ञान अंधकार से निकालकर आत्मज्योती जगाने की जरूरत है। अभी आवष्यकता है अपने अंदर की बुराईयां को खत्म करने की तब इस धरा पर पुनः सत्यधर्म की स्थापना करने की।


विपरीत बुद्धि मनुष्य का विनाशकाल है :-

वास्तव में नवरात्री को दशहरे को जोडना पुर्णतया उपयुक्त है। ये दशहरा अर्थात दस विकारों को हरण करने की यादगार। ये दस विकार कौन से है ? काम, का्रेध, लोभ, मोह, अंहकार, आलस्य, इर्ष्या, घृणा, बदले की भावना और छल कपट। जो इन्हे मार डाले वही महावीर है यही सच्चा दशहरा है। हर साल रावण को जलाने से हम अपने लक्ष्य को नही पा सकते।

बहुत ही सुंदर लक्ष्य है कि इन पवित्र देवीयां ने आंतरिक बुराईयों से युद्ध करके उन्हे नष्ट कर दिया। तब हो गई संपुर्ण विजया दशमी और संपुर्ण विजय। इस बार भी एक दिन की ख़ुशी मनाकर, रावण को जलाकर, क्या आप प्रसन्न हो जायेंगे। अंदर बैठे हुई बुराईयां का नाश करेंगें।

सचमुच ये रावण अर्थात दस विकार मानव के महान शत्रु है। इन्हे खत्म किये बिना हमस सुख-शांति भरा जिवन नही जि सकते। सर्वप्रथम अपने अंदर की बुराईयों को पहचानने की आवष्यकता है। रावण को पहचानने के लिए की जरूरत सर्वप्रथम दिव्य बुद्धी की। बुराईयों को पहचानकर उसे नष्ट करने की। ज्ञान व योग के बल से बुराईयों को खत्म किया जा सकता है।



सभी को पता है कि रावण मरता नही था। उसकी नाभी में अमृत था। उसको राम के सिवाए कोई भी मार नही सकता था। कभी वही हममें भी आ जाता है। कभी हम समझते कि हमने क्रोध व लोभ को जित लिया है परंतु वह पुनः जिवीत हो जाता है । इनका महत्त्वपुर्ण कारण है देह अभिमान। अर्थात खुद को आत्मा की बजाय देह समझना। जब तक हम इस देहभान से मुक्त नही होंगे अर्थात स्वंय को आत्मिक स्वरूप में स्थ्ति नही होंगे तब तक रावण का पुरी तरह से संहार नही कर पायेंगे।

इसलिए, पाठकों को अपनी विचार शक्ति इतनी सच्ची रखनी चाहिए कि आप ईश्वरीय गुणों का परिचय दें और गर्व के साथ जीवन जी सकें।

Tags :- Technology, Technical Study, Online job, Future Tech, Internet, Online Study, Computer, Health, Science, Fashion, Design, Solar System, पौराणिक रहस्य, महान व्यक्तित्व.

संबंधित कीवर्ड :

नवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य क्या है - What is the spiritual secret of Navaratri, नवरात्री कलश की स्थापना - Establishment of Navratri Kalash, विपरीत बुद्धि मनुष्य का विनाशकाल है। 


दोस्तों, उम्मीद है की आपको नवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य क्या है - What is the spiritual secret of Navaratri यह आर्टिकल पसंद आया होगा। यदि आपको यह आर्टिकल उपयोगी लगता है, तो निश्चित रूप से इस लेख को आप अपने दोस्तों एवं परिचितों के साथ साझा करें। और ऐसे ही रोचक आर्टिकल की जानकारी प्राप्ति के लिए हम से जुड़े रहे और अपना Knowledge बढ़ाते रहे।

हसते रहे - मुस्कुराते रहे।

                                                                                                                           Author By : BK गीता...
यह भी जरुर पढ़े 

Article By

He is CEO and Founder of www.apnasandesh.com. He writes on this blog about Tech, Automobile, Technology, Education, Electrical, Nature and Stories. He do share on this blog regularly. If you want learn more about him then read About Us page

हमें ट्विटर पर फॉलो करे

Popular Posts

नए लेख पाने के लिए अपना ईमेल यहाँ Free Submit करें