Thursday, 25 April 2019

राजा का सपना - King's of dream

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com पर आप सभी का स्वागत है। आज के लेख में, हम एक राजा के रूप में कैसे रहें, उसके बारे में विस्तार से जानकारी लेंगे, जो दयालु होने के बाद अविनाशी सपने में आने वाले विचारों को ध्यान में रखे बिना अपने कर्तव्य को पूरा करने की क्षमता रखते हैं। राजा का सपना - King's of dream

राजा का सपना - King's of dream

राजा का सपना - King's of dream :-

राजा वर्मन विराट नगर का राजा था। वह दयालु था। प्रजा उससे बहुत खुश थी। प्रजा के हित के बारे में वह हमेशा सोचता था। मुसिबत के समय जैसे की अकाल पडा हो, फसल कम हो, प्रजा को अन्न धान्य देता था। किसी के पास काम न हो, तो काम देता था। वह बहोत ही धार्मिक वृत्ति का था। उसके राज्य में पंडितो, ब्राम्हण का आना जाना था। कोई भी राजा के दरबार से खाली हात वापस नही जाता था। राजा बहुत प्रतापी था। त्यौहारों में वह अपनी प्रजा में दान धर्म करता था। साधु-सन्यासी उसके यहां भोजन करके या उन्हें दान देकर ही भेजता था। उसी तरह वह अपनी प्रजा का ध्यान रखता था।



एक दिन राजा अपने शयनकक्ष में सोया था। उसने सपने में देखा उसकी प्रजा में विद्रोह किया। और राजा को देश निकाल दे दिया। वह जंगलो में गांवो में भुख प्यास से बेहाल भटकता रहा। उसको किसीने भी खाना नही दिया। बच्चे की वर्षगांठ पर किसी सेठ के घर पर गरिबो को और भुखो को भोजन और दान देने का कार्य चल रहा था। राजा ने भी गरिबों की लाइन में ख्रडे होकर भोजन लिया।

भोजन लेने के पश्चात राजा ने भोजन करना प्रांरभ हि किया जानवरों की भागदौड़ मच गई। उस भागदौड़ में राजा का खाना मिटटी में गिर गया। वह खाना खाने के लायक नही रहा। राजा बहुत निराश हुआ और दुःखी होकर रोने लगा।

कूछ समय पश्चात राजा की आंख खुल गई। सवेरा हो गया था। राजा अपने शयनकक्ष में शैया पर लेटा हुआ था। महल के बाहर प्रजा उनके जयजयकार के नारे लगा रहे थे। राजा गंभीर होकर सोचने लगा। इस सपने का अर्थ क्या है? मैं अपनी प्रजा का बहोत ख्याल रखता हुं और किसी को भी भुखा नही सोने देता हुं। मेरा व्याकूल होकर रोटी के लिए तडपना, बेहाल होकर भुखा प्यासा भटकना इन सब बातों का मतलब क्या है? राजा का सपना - King's of dream

राजा ने आपातकालिन दरबार बुलाया, राजा जल्दि ही तैयार होकर दरबार पहुंचा। दरबार में राज-ज्योतीषी, पंडितो ऋषि-मुनियां को खासतौर पर बुलाया गया। राजा ने सभी को अपने सपने के बारे में बताया और उसका अर्थ पुछा। किसी को भी राजा के सपने का अर्थ समझ में नही आया। राजा के गुरू परमानंद भी वहां मौजुद थे जो हाल ही मे तपस्या कर वापस लौटे थें राजा को उन्हे देख्कर बहोत ख़ुशी हुई। गुरू परमानंद को अपने सपने के बारे में बताया व चिंता जताई। गुरू परमानंद ने कहा, राजन चिंता ना करो यह सपना सच्चा नही है, और अपना राजा होना भी सच्चा नही है। दोनो ही एक जाल है जिसमें हम उलझे हुए है और उलझते जा रहे है। इस दूनिया में कुछ भी अविनाशी नही है। कुछ भी शास्वत नही है। गुरू परमानंद की बाते सूनकर राजा की चिंता समाप्त हुई।

और अपने काम के प्रति सतभावना जागृति दिखते हुए अपने गुरुदेव की कहि बात को ध्यान में रखकर अपने कर्तव्य को पूरा करने में लगे।

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                                                                                                                         Author By :- BK Geeta 
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