Wednesday, 24 April 2019

टूटे मटके की कहानी - Story of broken mats

नमस्कार, apnasandesh.com पर आप सभी का स्वागत है। आज के लेख में, हम इस लेख के माध्यम से मानवता के लक्षणों और विशेषताओं को सीखेंगे।

टूटे मटके की कहानी - Story of broken mats

टूटे मटके की कहानी - Story of broken mats :-

किसी गांव में एक हरिनाम का किसान रहता था। वह रोज प्रातः काल में पास की नदी का जल लाता था। उसने नदी से पानी लाने के लिये बांस को दो तरफ दो मटके बांध के रखे थे। उनको भरकर वह रोज नदी से बांस को कंधे पर रखकर जल लाता था। दोनो मटको में से एक मटका फुटा था। दुसरा मटका फुटा नही था। वह सही सलामत था। किसान जब जल भरके मटके लाता था तो फुटे मटके से पानी आधा रह जाता था। कई साल ऐसे ही चलता रहा। पर जो घडा टुटा हुआ नही था उसको बडा घमंड था। वह उस मटके का पानी गिरता नही था। उसमें कोई कमी नही थी। टुटे घडे को इस बात पर बहुत नाराजी थी कि वह किसान की मदद पुरी तरह नही कर पाता था। वह बहुत दुःखी रहता था सोचसोचकर परेशान रहने लगा। अब टुटे घडे से रहा नही गया, तो टुटा घडा किसान से माफी मांगने लगा। बोला कि मैं आपकी पुरी तरह मदद नही कर सकता, जब भी आप जल भरके लाते है घर तक आधा घडा पानी रहता है, मुझे माफ कर दो। किसान आष्चर्य से बोला तुम क्यों शर्मिंदा हो भाई बोलो ? टुटा मटका बोला आप नही जानते पर मैं एक जगह से थोडा फुटा हुं। इसलिए मटके का पानी आधा ही रह जाता है। पिछले कुछ सालों से जितना पानी मुझे घर पहुंचाना था, मैं वह नही कर सका। और ये मेरी कमजोरी हैं। और मेरी वजह से आपकी मेहनत पुरी तरह सफल नही होती है। टुटे घडे ने दुःखी होते हुये बोला।

किसान हसते हुये बोला तुम दुःखी नही हो। आज लौटते वक्त रास्ते में जो छोटे छोटे पौंधो में जो फुल खिले है उनको देखना। घडा मुस्कुराया और पुरे रास्ते से आते हुये छोटे छोटे पौंधा को देखा, खिले हुये फुलों को देखकर उसकी उदासी थोडी कम हुई। घर पहुचते समय रोज की तरह कुछ पानी गिर चुका था। घडा आधा हुआ यह देखकर फिर माफी मांगा और फिर उदास हुआ। जो सही सलामत घडा था उसको अपने काबीलीयत पर गरूर था।

ऐसे हर दिन का सफर चलने लगा। टुटा हुआ घड़ा आधा हुआ यह देखकर फिर माफी मांगा और फिर उदास हुआ। इसपर किसान बोला तुमने उन पेडो को ध्यान से नही देखा जो तुम्हारे रास्ते में पडते है। तुम्हारे मटके से गिरता हुआ पानी उन पेडों को मिलता है। वह पौंधे हरे भरे थे और तुम्हारे रास्ते में फुल खिले हुये थे, जो टुटा हुआ था उस तरफ फुल नही खिले थे। मैने तुम्हारी मटके से गिरते हुये पानी को सफल किया। अर्थात तम्हारे अंदर जो कमी थी उसको मैने एक गुण के रूप में देखा और उसका फायदा लिया। जो सही मटका है उसकी रास्ते मे वह फुल क्यों नही है? क्योंकी वह टुटा नही है उसकी रास्ते में फुल नही है। आज रास्ते में जो रंगी बेरंगी फुल खिले है उन फुलों के बीजों को मैने ही बोया था। पानी गिरने से वह सिंचते रहे पुरा रास्ता हरा भरा रंगी बेरंगी फुलो से भरा हुआ है। उनको देखकर मन प्रसन्न होता है। अगर तूम फुटे नही होते तो मै कुछ नही कर सकता।

भावार्थः-

कभी भी अपने अच्छाई व गुणों पर घमंड नही करना चाहीये। क्योंकी गुण व विषेषता तो मानवता की देंन है। सभी के अंदर कुछ न कुछ कमिया होती है बस हमे उन कमियों को अपनी शक्ति बनाकर जित हाशिल करना है।


दोस्तों, उम्मीद है की आपको टूटे मटके की कहानी - Story of broken mats यह आर्टिकल पसंद आया होगा। यदि आपको यह लेख उपयोगी लगता है, तो इस लेख को अपने दोस्तों और परिचितों के साथ ज़रूर साझा करें। और ऐसे ही रोचक लेखों से अवगत रहने के लिए हमसे जुड़े रहें और अपना ज्ञान बढ़ाएँ।

धन्यवाद।

हसते रहे - मुस्कुराते रहे।

 Tags :- TechnologyTechnical Study, Online job, Future Tech, Internet, Online Study, Computer, Health, Science, Fashion, Design, Solar System, पौराणिक रहस्य, महान व्यक्तित्व.

संबंधित कीवर्ड :-

टूटे मटके की कहानी - Story of broken mats, अच्छाई व गुणों पर घमंड नही करना चाहीये, कमियों को अपनी शक्ति बनाकर जित हाशिल करना है।

                                                                                                                       Author By :- BK Geeta 

यह भी जरुर पढ़े 

Article By

He is CEO and Founder of www.apnasandesh.com. He writes on this blog about Tech, Automobile, Technology, Education, Electrical, Nature and Stories. He do share on this blog regularly. If you want learn more about him then read About Us page

हमें ट्विटर पर फॉलो करे

Popular Posts

नए लेख पाने के लिए अपना ईमेल यहाँ Free Submit करें