Wednesday, 3 April 2019

सच्चाई की ताकत - Strength of truth

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com पर आप सभी का स्वागत है। दोस्तों आज के लेख में सच्चाई की शक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं। आशा है कि यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा।

सच्चाई की ताकत - Strength of truth

"Really speak the truth, the right thing to walk /

Many people believe that you will get "Sant Ramdas

संत रामदास या संत तुकाराम, कोई ही भी हो सभी संतों ने सत्य की महानता को गाया है। इतना ही नहीं, सभी धर्मों में, सत्य की मिठास गाईजाती है। आधुनिक दुनिया में सभी अनुष्ठान और न्यायिक प्रणाली, आज नागरिकों से सच्चे व्यवहार के लिए तत्पर हैं।

लेकिन सच्चाई क्या है ?

सत्य यह शब्द सत् से बना है। सत् याने सदाचरण जो दो शब्द से बना है सत् + आचरण या व्यवहार हैं, जिसका अर्थ है अच्छा व्यवहार।



सच्चाई की ताकत - Strength of truth :-

सच्चाई की ताकत बुराई का अंत :-

बुद्ध अपनी तपस्या की बल से चहु और चर्चा में थे। उनकी ख्याती चहु और बढ रही थी। उनके पास आनेवाले भिक्षु दिनोंदिन बढते जा रहे थे। कुछ नगरवासियां को उनकी प्रसिद्वी पर जलते थे। नगर के प्रमुख तथाकथित पंडीत, ब्राम्हण, पुरोहित धर्म के नाम पर बुद्ध को साजिस कर बदनाम करने का षडयंत्र बनाने लगे। इन पंडित, पुरोहितों ने एक सुंदर यति अर्थात परिव्राजिका को धन का लालच देकर उसे साजिस में शामिल कर बुद्ध की ख्याती को चहु और फैलने से रोकने को कहा। यति भी धन के लालच में आ गई, बुद्ध को बदनाम करने की साजिस में शामिल कर लिया। वह रोज जेतवन की और जाती, सन्यासीयों के समुह में प्रातः काल राज्य में प्रवेश करती थी।

जब नगरवासी उसको पुछते कि रात भर कहां थी तो वह कहती रातभर श्रमण गौतम को रति में रमण कराकर जेतवन से आ रही हुं। इस तरह गौतम बुद्ध की बाते नगर में फैलने लगी। बुद्ध चुप रहे और कुछ भी नही बोले। गौतम बुद्ध के भीक्षु इसके बारे में पुछते वह कुछ नही बोलते मुस्कुराते और चुप रहते। जैसे उन्होंने ध्यान ही नही दिया। पुरे नगर में धिरे-धिरे यह बात सबके जुबांन पर थी। लोग फिर बढा-चढाकर इस बात का रस ले लेकर यह बातें करने लगे। गौतम बुद्ध के पास आने वाले लोगो की संख्या धिरे-धिरे कम होने लगी। हजारों भिक्षुओं से सौ रह गये, सौ से अभी उंगलियों पर गिने जाने लगे इतने ही रह गये। बद्ध हसते वह देखो सुंदर यति का कमाल जो कच्चे थे वह चले गये। जिन्हे निखरना था, विष्वास पक्का था वह निखर गये।

गौतम बुद्ध को अचल अडोल देख तथाकथित पुरोहित ने गुंडो को रूपये देकर सुंदर यति को मारकर फुलों के जेतवन में ही उसकी छिपा दिया। बुद्ध को शांत देख यति को अपने कर्मो से पछतावा हो रहा था। अपने कृत्य पर शर्म आने लगी। उसका अंर्तमन उसे धिक्कारने लगा। इसी कारण पंडितो ने उसकी हत्या करवा दी। कही यह हमारा राज न खोल दें। इसकी हत्या कर लोंगो को यह दिखाना कि गौतम बुद्ध ने ही इसकी हत्या कर दी। बुद्ध के बारे में यति सभी नगरवासियों को बता देगी इसी डर से बुद्ध ने ही उसको मरवाया। ऐसे षडयंत्र पुरे नगर में यह बात फैला दी, अपने पाप को खत्म कर बुद्ध ने यति को खत्म किया।

बुरा सोचने वाले के साथ हमेशा बुरा होता है :-

इतना घिनौना षडयंत्र तथाकथित पंडितों ने रचा। पंडितो ने राजा के पास जाकर सन्यासी यति के बारे में बताया। वह कुछ दिनों से दिख नहीं रही है, जरूर कूछ गडबड है। वह अपनी राते जेतवन में ही गुजारती थी। यह सुनते ही राजा ने अपने सैनिक चारों और जेतवन में भेजे यति की तलाश में। थोडे ही समय पश्चात यति की लाश जेतवन में मिली। धर्मगुरूओं ने कहा महाराज देखिये यह महापाप। मुख से भगवान का नाम लेते है और कर्म इतने घिनौने। धर्मगुरू ब्राम्हण नगर में सबके साथ मिलकर बढा-चढाकर बुद्ध के बारे में बाते करने लगे। बौद्ध भिक्षुओं को नगरवासी भिक्षा के लिये मना करने लगे। बूद्ध पर जिसको पुरा निष्चय था वही उनके पास जाने का दुस्साहस करते थे। भिक्षुओं के चेहरे पर चिंता और भय दिखाई देने लगा।

बुद्ध शांतचित्त होकर सब देख रहा थे। कुछ समय पश्चात बोला तुम चिंता न करो, सत्य की नांव हिलती-डुलती है पर डुबती कभी नही। स्वंय सत्य अपनी रक्षा करेगा। सत्य के स्वयं को उजागर करने के मार्ग ही निराले है। तुम बस धैर्य धरो और निश्चिंत रहो, चिंता नही करो। सहनशील बनो, तपस्या करो। कठिण परिस्थिती ही हमें मजबुत बनाती है। विश्वास कम नही करो इन सब बातों से हमारा विश्वास और पक्का होगा। निश्चय की परिक्षा होती है और जिसको निश्चय है वही विजयी बनता है। यही साधना है।

कहते है न की तपस्वी, महात्माओं के वाक्यों में ताकत होती है। सच्चाई है वहा जित निश्चित है। एक सप्ताह भी नही हुआ था और जिन गुंडो ने यति की हत्या की थी उन्होंने शराब के नशे में सारी बाते सब के सामने बता दी। धर्मगुरू और पंडितों के कहने पर हमने यह सब किया। इन सबका षडयंत्र नगरवासियों के सामने आया। बुद्ध की किर्ती, महनता हजारों गुणा बढकर चहु और फैली।

पंरतु याद रहे बुद्ध पर न जाने आरोप लगाये फिर भी वह शांत रहे, स्थिर रहे, डगमग नही हुये। सब बाते सामने आइे तो बुद्ध बोले सत्य स्वंय सामने आता है। पर असत्य और झुठ से सदा सावधान रहना। असत्य की कभी जित नही हुई है और न कभी होगी। जिनका निश्चय पक्का था वह है और जिनका निश्चय पक्का नही था वह चले गये।

सारी बाते सामने आने पर राजा ने धर्मगुरू, पंडितो को बंदी बनाया गया।

कहानी से सिख मिलती है :-

जहां सत्यता है वहा हमेशा जित है। सत्य की नांव हिलती-डुलती है पर डुबती कभी नही। जित उसी की होती है जो सत्य की राह पर चलता है। मुस्किले हमेशा उसीके पास आती है जिसमें हिम्मत हो और कार्य पुरा होने तक असंभव ही प्रतित होता है।

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संबंधित कीवर्ड :-

सच्चाई की ताकत - Strength of truth, सत्य की जित हमेशा होती है, बुराई पर हमेशा सच भरी पड़ता है, सत्य कठोर है, सत्य को समझने के लिए सतगुण होना चाहिए। 


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                                                                                                                           Author By : BK गीता...
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