Wednesday, 24 April 2019

तीन अनमोल शिक्षाए - Three precious education

सभी को नमस्कार, apnasandesh.com पर आपका स्वागत है। आज के लेख में, अच्छे आज्ञाकारी छात्रों और शिक्षा के महत्व के बारे में कहानी के माध्यम से इस बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

तीन अनमोल शिक्षाए - Three precious education

तीन अनमोल शिक्षाए - Three precious education :-

राजा भागिरथ को बचपन से ही संसार सिंहासन में कोई मोह नही था। पिता की मुत्यू के पश्चात उसने सिंहासन संभाला। राजा भागिरथ का कही मन नही लगता था। इसिलिए उसने अपने छोटे भाई को सिंहासन पर बिठाकर खुद अपने राजगरू के आश्रम में योग की शिक्षा लेने चले गए। और उनके आश्रम में रहने लगे।


गुरू जी के पहले आश्रम के नियम के अनुसार किसी भी शिष्य को अपनी माता से सबसे पहले भिख मांगनी पडती थी। इसिलिए गुरू ने राजा को अपनी माता लिलावती के पास भिख मांगने महल में भेजा। राजा गुरू की आज्ञा नुसार महल में अपनी मां से भीख मांगने गया।

राजा भागिरथ महल के सामने जाकर माता आवाज देते हुए बोला माते भिक्षांदेही। राजा की माता अपने पुत्र को भिक्षुक के रूप में देखकर बोली मैं तुम्हारे जैसा पुत्र पाकर धन्य हो गई। भागीरथ बोला माते भिक्षांदेही, माता लिलावती बोली मैं तुम्हे तिन अनमोल शिक्षाए भिक्षा के रूप में देती हुं।

पहली शिक्षा :-

एक-एक शिक्षा बहोत अनमोल है और बहोत धारणायुक्त है। पहली शिक्षा जो उसकी मां ने दिया वह है किहमेशा किल्ले के अंदर ही रहना जिससे कोई भी दुष्मन वार न कर सके। भागिरथ अपनी माता से बोला, यह शिक्षा का अर्थ क्या है ? मेरी कुछ भि समझ में नही आया। स्पष्ट करें, माता बोली ब्रहमचर्य ही मनुष्य के जिवन का किला है। जहा रोग, भय, दुःख, दरिद्रि, चिंता,शोक, व्याधि यह सब नही आ सकते। हम अपनी मर्यादा की लकीर के अंदर रहे। योगी जिवन की यही सबसे पहली शिक्षा है। जिसके जिवन में मर्यादा नही वह योगी जिवन खुषी के अनुभव नही कर सकता। और योगी का जिवन अर्थात पवित्रता की मर्यादा ब्रह्मचर्य है। पवित्र मन में भगवान निवास करता है। तो मर्यादा की लकीर के अंदर रहने से हम सुरक्षित रहते है यह है पहली शिक्षा।

दुसरी अनमोल शिक्षा :-

सर्वदा भोजन को छप्पन भोग समझ स्विकार करना। अर्थात दिन और रात मिलाकर अर्थात 24 घंटो में एक हि बार जोंरो की भुख लगती है। उस समय उबला हुआ भी छप्पन भोग प्रतित होता है। अगर भुख नही तो छप्पन भोग भी उबला चना प्रतित होता है। इसिलिए दिन-रात में एक ही बार हमें एक हि बार तिव्र भुख लगती है।



मेरी तिसरी अनमोल और आखरी शिक्षा :-

जब नींद लगे तब मखमल के शैया पर सोना। अर्थात जो सो जाते है और वह निंद नही आती वह निंद का आव्हान करते क्योंकी निंद उनके भाग्य में नही है। सोते है मखमल के शैया पर कि सोने का समय हूआ सोने का समय हुआ, पर रात भर वह करवटें बदलतें रहते है। पर जब दिन भर कि थकान से हम थक जाते है तब हमें चटाई बिछाकर सोने पर भी गहरी निंद आती है। निंद को आव्हान करने की जरूरत नही। खुब निंद आये तभी सोना है। हर समय आलस्य में सोये पडे नही रहना।

भावार्थ :-
शिक्षा जिवन मे हमें वर्तमान में जो हमें खाने को मिले, वही खाना, जो हमे पहनने को मिले वही पहनना। जो हमें मिलता है उसे अच्छे भावपूर्व अपनाना चाहिए। जब हम अपने मर्यादा के लकीर के अंदर रहकर काम करते है तो विद्यार्थी जीवन में सफल होते है।

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तीन अनमोल शिक्षाए - Three precious education, शिक्षा का महत्व - जीवन में गुरु का आदर ही अच्छे छात्र को निर्माण करती है। 

                                                                                                                         Author By :- BK Geeta 
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