Thursday, 25 April 2019

इंजन की परिभाषा क्या है - What is the definition of engine

नमस्कार दोस्तों, APNASANDESH.COM में आप सभी का स्वागत करते है। आज के लेख में हम आपको इंजन के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे। इंजन किस तरह कार्य करता है, इंजन क्या है ? और इसका क्या उपयोग है ?

इंजन की परिभाषा क्या है - What is the definition of engine

इंजन की परिभाषा क्या है - What is the definition of engine :-

सबसे पहले हम आपको बता दें कि इंजन एक उपकरण है और इससे ऊर्जा प्राप्त होती है। इंजन रासायनिक ऊर्जा को एक यांत्रिक शक्ति बनाता है।

इससे पहले कि हम इंजन की संरचना और उसके काम करने के तरीके को समझेंगे। हम जानते हैं कि इंजन के अंदर क्या है और यह कैसे काम करता है। एक, दो, या बारह सिलेंडर इंजन, हर एक सिलेंडर उसी तरह काम करेगा जैसे की एक सिलेंडर इंजन काम करता है। दोस्तों आज के लेख में हम आंतरिक दहन के आधार पर चलने वाले पेट्रोल और डीजल इंजनों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे, और यह भी जानते हैं कि पेट्रोल इंजन के तुलना में डीजल इंजन कैसे कार्य करता है।



इंजन के प्रकार - Types Of Engine :-

पेट्रोल इंजन :- 
पेट्रोल इंजन या गैसोलीन इंजन में गैसोलीन और वायु का मिश्रण तैयार करके कार्बोरेटर के माध्यम से इंजन तक पहुँचाया जाता है। पेट्रोल इंजन में पहला स्ट्रोक सक्शन स्ट्रोक होता है। जिसमें हवा और ईंधन को मिलाया जाता है, इसी सिस्टिम में दूसरा स्ट्रोक याने कंप्रेशन स्ट्रोक है, कम्प्रेशन स्ट्रोक के माध्यम से सिलेंडर के अंदर बने हवा और ईंधन के मिश्रण को दबाया जाता है। तीसरा स्ट्रोक याने पावर स्ट्रोक है, जिसमें स्पार्क प्लग की मदद से स्पार्क किया जाता है, और पावर बनाई जाती है। अंतिम स्ट्रोक में जिसे निकास स्ट्रोक कहा जाता है और इस स्ट्रोक से जली हुई गैस को बहार निकाला जाता है।

डीजल इंजन :-
डीजल इंजन में पहला स्ट्रोक सक्शन स्ट्रोक होता है। शुद्ध हवा को इनलेट वॉल्व की सहायता से डीजल इंजन या संपीड़न इग्निशन इंजन सिलेंडर में भेजा जाता है। दूसरा स्ट्रोक याने कंप्रेशन स्ट्रोक है, यहाँ तापमान में वृद्धि होती है और हवा पर दबाव बढ़ने से दबाव बढ़ता है, इसका तापमान 1000 * F (538 *C) तक बढ़ जाता है, जिसे कॉम्प्रेशन स्ट्रोक कहा जाता है। फिर इंजन सिलेंडर का उपयोग डीजल स्प्रेयर इंजेक्टर द्वारा किया जाता है, जिसमें डीजल के कण कण शामिल होते हैं। उसी वक्त पावर स्ट्रोक निर्माण होता है। जिसे तीसरा स्ट्रोक याने पावर स्ट्रोक कहते है, जिससे इंजन के क्रैन्कशाफ्ट को शक्ति मिलती है। और इंजन शुरू रहता है। इंजिन का आखरी स्ट्रोक याने एग्जॉस्ट स्ट्रोक जिसे निकास स्ट्रोक कहा जाता है। जिसमे जली हुई गैसेस एग्जॉस्ट वॉल्व के माध्यम से बाहर निकाली जाती है। डीजल इंजन को कम्प्रेशन इंजन भी कहा जाता है, क्योंकि प्रेशर के दबाव से ईंधन भर जाता है। इसीलिए इसे कम्प्रेशन इंजन के नाम से भी जानते है।

इंजिन में स्थित वाल्व के प्रकार - Types of valves located in the engine :-

इनलेट वाल्व  - आउटलेट वाल्व :-

सिलेंडर हेड के अंदर दो वाल्व लगे होते हैं, जो पूरी तरह से अपनी सीट पर बैठते हैं। जब वाल्व पूरी तरह से अपनी सीट पर बैठा होता है, तो हम उन्हें बंद वाल्व कहते हैं और जब वाल्व अपनी सीट से ऊपर उठता है तो यह खुले वाल्व का संकेत है कि ये दोनों वाल्वों में एक इनलेट वाल्व और दूसरा आउटलेट वाल्व होता है। इन दोनों वाल्वों को इस तरह से लगाया जाता है कि सही समय पर, खुले और बंद हो सके, इनलेट वाल्व का आकार एक्सस्ट वाल्व के तुलना में आकार में बड़ा होता है। जब हवा को हवा में खींचा जाता है तो यह केवल अतिरिक्त होता है ताकि इंजन को अधिक शक्ति प्राप्त हो। इसी तरह आउटलेट वाल्व इनलेट वाल्व से छोटा होता है, जो जली हुई गैस को हटा सकता है और इ.जी.आर. की मदद से जली हुई गैस को शुद्ध हवा में 25 प्रतिशत परिवर्तित कर देता है, जिससे इंजन की शक्ति बढ़ जाती है।

सिलेंडर और पिस्टन - Cylinder and piston :-

सिलेंडर यह इंजन के अंदर होता है। यह अंदर से खोखली होती है, इसके उपर वाले भाग को अन्दर से बंद किया जाता है जिसे हम सिलेंडर हेड कहते है। इस सिलेंडर के अंदर पिस्टन फिट किया जाता है, और पिस्टन के उपर तिन पिस्टन रिंग होती है। जब पिस्टन सिलेंडर के अंदर आसानी से उपर निचे होता है तब यह पिस्टन रिंग अपना काम करती है। पिस्टन के साइड में एक छेद होता है जहा हम गजन पिन के सहायता से कनेक्टिंग रॉड को फिट किया जाता है और उपर से Cir-clip लगाई जाती है।


कनेक्टिंग रॉड और क्रैंक शाफ्ट - CONNECTING ROD AND CRANK SHAFT :-

सिलेंडर के अंदर जब पिस्टन उपर निचे होता है उसे हम रेसिप्रोकेटिंग मोशन कहते है। गाड़ी के पहिये को चलाने के लिए रेसिप्रोकेटिंग मोशन को रोटरी मोशन में बदलना पड़ता है। कनेक्टिंग रॉड पिस्टन और क्रैंक शाफ्ट को जोडती है, जिसका उपर वाला भाग गजन पिन की सहायता से पिस्टन को जोडती है और निचे वाला भाग क्रांक शाफ्ट को जोडती है। और जब पिस्टन उपर निचे होता है तब कनेक्टिंग रॉड का उपर वाला भाग भी उपर निचे होता है, और इसी तरह निचे वाला भाग भी क्रैंक शाफ्ट को लेकर घूमता है। यह उसी तरह है जिस तरह सायकिल का पहिया पैडल मारने पैर घूमता है। जब पिस्टन दो स्ट्रोक पूरा करता है, तब क्रैंक शाफ्ट का एक सायकल पूरा होता है। पिस्टन जब सिलेंडर के अंदर उपर निचे होता है और जो Distance पे उपर निचे होता है उसे स्ट्रोक कहते है।

टॉप डेड सेंटर - top dead center (T.D.C.)

जब पिस्टन सिलेंडर के सबसे उपर होता है, मतलब उससे उपर नहीं जा सकता तब उसे top dead center कहते है।

बाटम डेड सेंटर - Bottom dead center (B.D.C)

जब पिस्टन सिलेंडर के सबसे नीचे की और होता है, मतलब उससे नीचे नहीं जा सकता तब उसे Bottom dead center कहते है।

स्ट्रोक - STROKE :-

जब पिस्टन TDC से BDC और BDC से TDC की और जाता है मतलब जब पिस्टन सिलेंडर की दुरी को उपर नीचे होता है, उस दूरी को स्ट्रोक कहते है।

इंजन के ऊपर इनलेट वाल और आउटलेट वाल्व होते है ये दोनों वाल्व इस तरह से बैठाया जाता है की ठीक समय पर खुले और बंद हो। इनलेट वाल्व साइज़ में बड़ा होता है क्युकी जब शुद्ध हवा अंदर खिंची जाये तो उसकी मात्र जादा हो ताकि इंजन को और जादा शक्ति मिले, उसी तरह आउटलेट वाल्व ये इनलेट वाल्व से छोटा होता है जो जली हुए गैसेस को बहार निकाल सके और वेंचुरिमीटर की सहायता से जली हुए गैसेस को Recycling करके उसका २५ प्रतिशत शुद्ध हवा में कन्वर्ट करता है, जो इंजन की शक्ति को और बढ़ता है।

क्लियरन्स वोलूम - CLEARANCE VOLUME :-

टॉप डेड सेंटर यानि जब पिस्टन सिलेंडर के अंदर top dead center पर होता है, उस समय Combustion चेम्बर में कितनी हवा है यह बताता है, उसे क्लीयरेंस वोलूम कहते है।

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                                                                                                           Author By :- Prashant Sayre Sir 

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