Monday, 6 May 2019

ऑटोमोबाइल वाहनों की स्टार्टिंग सिस्टम - Automobile Vehicle's Starting System

नमस्कार, आप सभी का फिर से एक बार हमारे Web Portal www.apnasandesh.com पर स्वागत है. आज के Automobile के युग में हम आप को एक-एक करके सभी सिस्टम के बारे में जानकारी देंगे. इसीलिए हमसे जुड़े रहे.

ऑटोमोबाइल वाहनों की स्टार्टिंग सिस्टम - Automobile Vehicle's Starting System

आज का हमारा आर्टिकल Starting System के आधार पर है. दोस्तों आपने देखा ही होगा की कुछ साल पाहिले सभी दो पहिया गाड़ी Kick Start होती थी. Kick से ही इंजन स्टार्ट करते थे, लेकिन अभी लगभग सभी गाड़ियों में Self Starter है. तो यह Self Starter क्या है, वाहनों में स्टार्टिंग सिस्टम कैसे काम करती है, Starter क्या है और स्टार्टिंग सिस्टम के मुख्य घटक कौन से है. सभी जानकारी हिंदी में.

 

ऑटोमोबाइल वाहनों की स्टार्टिंग सिस्टम - Automobile Vehicle's Starting System :-

Battery से Engine को स्टार्ट करने के लिए Starting System का उपयोग किया जाता है. इसके लिए गाड़ी में एक Starter Motor फिट किया जाता है. जब Starting Motor से विद्युत् करेंट फ्लो होता है. तब मोटर का Rotar घूमने लगता है. यही Rotor, Drive Pinion को Connect होता है, और Drive Pinion द्वारा ही Flywheel को घुमाया जाता है. यहां मुख्य काम सोलेनॉइड व्हॉल्व का रहता है. क्योकि जब हम सेल्फ (Self Button) देते है तो Electrical Current बैटरी से स्टार्टर सोलेनॉइड के तरफ जाता है और फिर सोलेनॉइड का प्लंजर बाहर आकर सोलेनॉइड स्विच से बैटरी और स्टार्टर मोटर के Connection को जोड़ा जाता है. जैसेही Self Button छोड़ दिया जाता है तो तुरंत सोलेनॉइड का प्लंजर पीछे की और जाकर स्टार्टर मोटर और बैटरी का Connection तोड़ देता है.

Starter Motor :-

इंजन स्टार्ट करने के लिए Cranck shopt के कम से कम 100 RPM (100 फेरे प्रति मिनट) होना ज़रुरी है. इस Process को हम Cranking कहते है. हात से या लिवर से इतनी गति देना कठिन काम है, इसलिए हम Starter Motor का Use करते है.

ऑटोमोबाइल वाहनों की स्टार्टिंग सिस्टम - Automobile Vehicle's Starting System

Starter Motor की जगह :-

इंजन के पिछले हिस्से में Starting Motor फिट किया जाता है. जब स्टार्टर मोटर ऑन किया जाता है तब स्टार्टर मोटर के पिनियन फ्लाईव्हील के रिंग Gear से Mesh होकर Flywheel को घुमाता है.

स्टार्टिंग सिस्टिम के पार्ट :-

Battery, cable, start-up switch, starter motor, engine drive unit आदि.

सेल्फ स्टार्टर क्या होता है :-

यह एक ऐसा यंत्र है, जो बैटरी से Electrical Power लेके उसको Mechanical Energy में कन्वर्ट करता है. जिससे की Flywheel को घुमाके इंजन स्टार्ट किया जाता है. Hand Cranking System बड़े इंजिन को स्टार्ट करने के लिए बहुत कठिन है, इसलिए स्टार्टिंग मोटर के द्वारा इंजन ऑन करने के लिए ज्यादा ताकद लगाने की जरुरत नहीं है, और इंसान को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होता है.

तो दोस्तों यहां तक जाना है स्टार्टिंग सिस्टम के बारे में और उसके मुख्य घटक तथा उसका उपयोग, अब जानेगे स्टार्टिंग सिस्टम के Problem तथा Problem किस वजह से निर्माण होते है और उन Problem पर Solution क्या है, यह भी जानकारी जानेंगे.

स्टार्टर मोटर का पिनियन घूमने लगता है लेकिन flywheel गिअर से Contact नहीं होता है, इसका कारण बहुत हो सकते है, लेकिन इसके कुछ अन्य कारण इस प्रकार है,

☛ स्टार्टिंग सिस्टिम का वायर कनेक्शन लूज होना,

☛ Flywheel गिअर का पिनियन गिअर के दाते याने तिथ (Teeth) का झिज (wear) होना,

☛ सोलेनॉइड स्विच ख़राब होना,

☛ आर्मेचर शॉफ्ट का बेंड होना,

☛ Flywheel गिअर और पिनियन अलाइमेंट का गलत होना.

स्टार्टर मोटर की पिनियन Foreword होने के बाद Return क्यों नहीं आ पाती, इसके कुछ अन्य कारण इस प्रकार है,


☛ पिनियन का ख़राब होना,

☛ आर्मेचर शॉफ्ट ख़राब होना, आदि.

स्टार्टर मोटर इंजन को स्टार्ट नहीं कर पाती, इसके कुछ अन्य कारण इस प्रकार है,

☛ इंजिन के पिस्टन में खराबी,

☛ बैटरी का डिसचार्ज होना,

☛ वायरिंग का ख़राब होना,

☛ सोलेनॉइड स्विच ख़राब होगी टी इंजन स्टार्ट नहीं हो पायेगा,

स्टार्टिंग की कोनसी देखरेख करनी चाहिए, इसके कुछ प्रकार,

☛ इंजिन चालू होते ही सॉर्टिंग स्विच बंद करना चाहिए,

☛ सेल्फ स्टार्टिंग की क्रिया 30 Second से ज्यादा नहीं करना चाहिए,

☛ कार्बन बुश, कनेक्शन, बुश बेअरिंग अच्छी कंडीशन में होनी चाहिए,

गाड़ियों में स्टार्टिंग सिस्टिम के साथ साथ वायरिंग सिस्टिम भी बहुत जरुरी है, तो हमे पता रखना चाहिए की वाहनों में वायरिंग किस प्रकार होती है,

वाहनों में वायरिंग सर्किट लगाना बहुत जरुरी है, क्योकि वाहनों का इंजन स्टार्ट करने के लिए स्टार्टिंग सर्किट, चार्जिंग सर्किट, इग्निशन सर्किट, वायपर मोटर, पावर विंडो, इंडिकेटर, हेड लाइट, टेल लाइट, पेनल बोर्ड, फ्यूज बॉक्स इस सबको कनेक्ट करने के लिए सर्किट वाहनों में जरुरी होती है.


वाहनों के सभी तार एक जगह पे बॉक्स में बंधे होते है. इसे वायरिंग हारनेस कहते है, वायरिंग बॉक्स में बहुत से वायर जमा रहते है. इसलिए वायरिंग हारनेस में किसी सर्किट का Problem सर्च करते समय हम कंफ्यूज नहीं हो इसलिए वायरिंग में कलर कोड दिया जाता है.

लाल कलर :- फॉल लाइट, साइड इंडिकेटर लाइट, डिप्पर लाइट,

काला कलर :- अर्थिंग वायर,

सफ़ेद कलर :- इग्निशन स्विच से इग्निशन coil, इलेक्ट्रिकल फ़्यूल पम्प.

नीला कलर :- टेल लाइट, हेड लाइट, और इनसाइड लाइट के लिए,

हरा कलर :- वायपर मोटर, स्टाप लाइट,

तपकिरी रंग :- एम्पियर मोटर, इग्निशन स्विच और हार्न के लिए,

वाहनों में दो प्रकार की वायरिंग कि जाती है,

✦ सिंगल पोल वायरिंग,
✦ डबल पोल वायरिंग,


साधारण सभी प्रकार के वाहनों में सिंगल पोल वायरिंग का उपयोग किया जाता है, सिंगल पोल वायरिंग सिस्टिम में निगेटिव वायर यह वाहन के बॉडी को अर्थ किया जाता है, और एक ही वायर से अन्य विद्युत उपकरणोंको जोड़ा जाता है.

डबल पोल वायरिंग में बैटरी में से ही निगेटिव और पॉज़िटिव ऐसे दोनों प्रकार के कनेक्शन विद्युत उपकरणोंको को जोड़ा जाता है. डबल पोल वायरिंग ज्वालाग्राही पदार्थो के परिवहन वाहनों में रहता है.

दोस्तों, उम्मीद है की आपको ऑटोमोबाइल वाहनों की स्टार्टिंग सिस्टम - Automobile Vehicle's Starting System यह आर्टिकल पसंद आया होगा। यदि आपको यह लेख उपयोगी लगता है, तो इस लेख को अपने दोस्तों और परिचितों के साथ ज़रूर साझा करें। और ऐसे ही रोचक लेखों से अवगत रहने के लिए हमसे जुड़े रहें और अपना ज्ञान बढ़ाएँ।

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                                                                                                                 Author By :- सचिन कोठे सर

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