Tuesday, 21 May 2019

प्लास्टर कैसे करते है - How do plaster

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com पर आप सभी का स्वागत है. दोस्तों आज के लेख में हम Plastering और Painting के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे.

प्लास्टर कैसे करते है - How do plaster

प्लास्टर कैसे करते है - How do plaster, घर बनाने से पहले ली जाने वाली सावधानियां - Precautions taken before building a house, प्लास्टर याने क्या है - What is plaster?, प्लास्टर ऑफ़ पेरिस कैसे करें - How to make pop, नया मकान बनाते समय इस प्रकार सावधानी बरते - Careful when creating a new house, प्लास्टरिंग का महत्व - Importance of plastering, प्लास्टरिंग कैसे करते है - How do plastering,  Plastering के फायदे - Benefits of Plastering, प्लास्टरिंग के प्रकार - Types of plastering, प्लास्टारिंग करते समय ली जाने वाली सावधानी - Cautiousness while plastering सभी जानकारी हिंदी में.


प्लास्टर कैसे करते है - How do plaster :-

यदि आप किसी भी प्रकार का बांधकाम करते है तो उसे पेंटिंग करना ज़रुरी है. प्लास्टरिंग, पेंटिंग, वॉर्नीशिंग आदि प्रकार से बांधकाम को पूरा फिनिशिंग किया जाता है. फाइनल फिनिशिंग का मुख्य उद्दयेश यह है की वातावरण का तापमान, बारिश, वायु, धुल, मिटटी इन सभी घटकों से घर तथा इमारत का बचाव करना है. Plastering, पेंटिंग प्रक्रिया के माध्यम से किसी भी बांधकाम को सुरक्षित किया जा सकता है. इसलिए आज के इस लेख में हम इमारत का काम पूरा होने पर की जाने वाली फिनिशिंग और प्लास्टरिंग के बारे में सभी प्रकार की जानकारी देने जा रहे है.

जब भी आप अपना घर तथा ईमारत का बांधकाम करते है तो आपको निम्नलिखित जानकारी का अभ्यास होना जरुरी है.

प्लास्टर - Plaster :-

इमारत अथवा घर का बांधकाम करते समय दीवार को अंदर और बहार से सरेखा बनाने के लिये प्लास्टर की आवश्यकता होती है. तो सबसे पहले जानते प्लास्टर याने क्या है? इसके बारे में जानकारी प्राप्त करते है. "प्लास्टर यह सीमेंट, पानी और रेत का एक मजबूत मिश्रण होता है जिसे दीवार के अंदर और बाहर रखा जाता है"

दीवार या ढलान के लिए प्लास्टर की दो परतें देना आवश्यक है. पहली परत 9-15 मिमी चौड़ी है और दूसरी परत 2-15 मिमी दी जाती है. इन दो स्तरों में रेत और सीमेंट का मिश्रण 1: 3 - 1: 6 और 1: 4 - 1: 6 के प्रमाण में लिया जाता है. प्लास्टर का पहला स्तर अधिक कॉम्पैक्ट मिश्रण होता है. पहली परत पर, लकड़ी की पट्टी को याने "रंदा" के साथ सूखने से पहले चपटा किया जाता है, और फिर तुरंत दूसरी परत दी जाती है.

कई अलग-अलग प्रकार के प्लास्टर होते हैं, जैसे कि सीमेंट प्लास्टर, मिटटी और रेत मिश्रित प्लास्टर, विशेष रूप के जलरोधक प्लास्टर, स्टुको प्लास्टर, आदि। वर्तमान युग में, हम सामान्य रूप में सीमेंट प्लास्टर का उपयोग करते हैं. लेकिन अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से मिट्टी और शेन मिश्रित प्लास्टर का उपयोग किया जाता है. इसके अलावा, वर्तमान युग में, प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग शहरी क्षेत्रों में किया जाता है.


Plastering के फायदे :-

➢ घर की दीवार को उबड़-खाबड़ भाग से एकजैसा बनाना.

➢ बंधकाम करते समय प्लास्टर का उपयोग करते हुए विभिन्न भागों को छिपाना.

➢ वातावरण के हानिकारक वस्तु से दीवार को बचाना जैसे बारिश का पानी, धुल, आदि.

➢ बांधकाम करते समय बाहर निकलने वाले अनवांटेड मटेरियल को छुपाना.

➢ बांधकाम करते समय वीटो के बिच रहने वाली जगह को फिनिशिंग देना.

➢ प्लास्टस्रिंग के माध्यम से घर को फिनिशिंग दिया जाता है. जिससे घर और ईमारत का सौन्दर्य और भी निखर जाता है. तथा Plastering से फिर दीवार रंगीन बनाने में सहायता मिलती है.

➢ प्लास्टर किसी भी हवामान में परिवर्तन नहीं होता है, इसलिए यह सुरक्षित है.

Plastering साहित्य का चयन करते समय ली जाने वाली सावधानी :-

☛ प्लास्टर यह हर समय मुलायम, non absorbent, अग्नि विरोधक (washable) तापमान में बदलाव न होने वाले होना.

☛ सुकने के बाद या पूर्णता: दीवार पर लगाने के बाद वह प्लास्टर किसी प्राणी के शरीर को नुकसान पहुँचने वाला ना हो.

☛ दीवार तथा ढलान लो प्लास्टर पकड़ के रखने वाला होना.


प्लास्टरिंग के प्रकार :-

✤ चिखल प्लास्टर :-

इस प्रकार का प्लास्टर यह सबसे सस्ता तरीका है, मुख्यता इस प्रकार के प्लास्टर का उपयोग ग्रामीण क्षेत्र में होता है, दोस्तों आपने शायद ग्रामीण क्षेत्र में देखा होगा की मिटटी की दीवार तथा घर पुराने जमाने में से, रेत, पानी, मिट्टी, आदि का उपयोग कर इस प्रकार का प्लास्टर तयार किया जाता था.

✤ सीमेंट प्लास्टर :-

किसी भी इमारत तथा घर के दीवारों को एकजैसा बनाना है तो सीमेंट प्लास्टर का उपयोग होता है, सीमेंट प्लास्टर से दीवार को समान बनाकर उसे आकर्षित बनाते है.

✤ लाइम प्लास्टर :-

लाइम प्लास्टर में चुना, रेती 1:1 प्रमाण में मिश्रित मोटर मिल में एक साथ बारीक़ किया जाता है.

✤ POP - Plaster of Paris :-

इस प्रकार का प्लास्टर जिप्सम से बनाया जाता है. जिप्सम को गरम करने पर उसमे से वाफ बाहर निकलती है और जो सेस बचता है उसे POP कहते है. इसमे पानी का मिश्रण किया जाने वाला प्लास्टर दीवार पर लगाने के लिए आसान है.

प्लास्टारिंग करते समय ली जाने वाली सावधानी :-

✦ प्लास्टरिंग करते समय जिस जगह पर प्लास्टर करना है उसे अच्छेसे साफ करना आवश्यक है.

✦ जिस दीवार पर प्लास्टर करना है उस दीवार को योग्य प्रमाण में गिला और स्वच्छ रखना है.

✦ जिस जगह प्लास्टर करना है उस जगह पर ग्रीस , ऑयल तथा अन्य प्रकार की ऑईलिंग वस्तु ना हो यह सुनिश्चित करे.

✦ प्लास्टर करते समय दीवार पर प्लास्टर के 2 से 3 level भरे जाते है. यह सुनिश्चित करे की यह स्तर 12 mm से ज्यादा न हो.

✦ दीवार बांधकाम करते समय किये गये छेद प्लास्टर करने से पहले भर दे.

✦ दीवार पर प्लास्टर का स्तर देने पर वह एक समान है या नहीं यह निरिक्षण करने के लिए plumb bob का उपयोग करे.

✦ सबसे महत्वपूर्ण बात जब भी किसी दीवार या घर का प्लास्टर होता है तो प्लास्टर किये गये जगह पर नियमित पानी दे जिससे वह दीवार मजबूत होगी.

दोस्तों, उम्मीद है की आपको प्लास्टरिंग का महत्व - Importance of plastering यह आर्टिकल पसंद आया होगा। यदि आपको यह लेख उपयोगी लगता है, तो इस लेख को अपने दोस्तों और परिचितों के साथ ज़रूर साझा करें। और ऐसे ही रोचक लेखों से अवगत रहने के लिए हमसे जुड़े रहें और अपना ज्ञान बढ़ाएँ।

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