Thursday, 2 May 2019

साहसी बालक की कहानी - Story of a brave boy

नमस्कार दोस्तों APNASANDESH.COM में आप सभी का स्वागत करते है, आज के लेख में हम आपको एक साहसी बालक के बारे में जानकारी देंगे.

साहसी बालक की कहानी - Story of a brave boy

साहसी बालक की कहानी - Story of a brave boy :-

बात बहुत पुराणी है दोस्तों, एक गाव में एक बालक रहता था, उसे पढ़ने लिखने का बहुत शौक था. और वह पढाई में पूरी तरह निपुण था. पर आर्थिक तंगी के कारण उसे बहुत कठिनाइयो का सामना करना पड़ता था. वर्षा का मोसम था. एक दिन बहुत वर्षा हुई और गंगा नदी में बाढ़ आई हुई थी. बालक के स्कूल के सारे बच्चे स्कूल जाने को तैयार थे, इसलिए गाव के सभी बालक नाव व्दारा नदी पार विद्यालय जा रहे थे, पर एक बालक गंगा नदी के किनारे बैठा था. वह बहुत उदास था, उसे भी विद्यालय जाना था, पर वह जा नहीं सकता था. क्युकी नाववाले को देने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे.

कुछ समय पश्चात उसके मित्र बालक के पास आये और उसे उसकी उदासी का कारण पूछा. बालक ने कहा उसे विद्यालत जाना है पर उसके पास पैसे नहीं है नाववाले को देने के लिए, बालक के मुख से ये सब सुनकर उसके मित्र हस पड़े और बोले – इसमें उदास होने की क्या बात है. तू चुपचाप जाकर नाव में पीछे बैठ जा, इतने बच्चो में नाववाले को क्या पता चलेंगा की तूने पैसे दिए है या नहीं. मित्रो की ये सब बाते सुनकर बालक ने कहा, नहीं मैं किसी को धोका नहीं दूंगा, तभी उनमे से एक बच्चे की आवाज आई वह बोला- दोस्त तुम नाव में बैठ जाओ, तुम्हारे पैसे मैं दे दूँगा, पर बालक को यह मंजूर नहीं था. बालक ने कहा – धन्यवाद मित्र, किन्तु मैं कभी किसी का एहसान नहीं ले सकता, बालक ने बड़े ही दृढ़तापूर्वक कहा. उसके मित्रो ने बालक को बहुत समझाया किन्तु बालक नहीं माना. उसके सारे मित्र नाव में बैठकर विद्यालय चले गए, और बालक उनको देखते हुए अकेला रह गया.

बालक के मन में विचार आ रहा था की विद्यालय कैसे जाये, उसके पास नाववाले को देने के लिए पैसे नहीं है. वह अकेला ही नदी किनारे बैठ कर सोच विचार कर रहा था, थोड़ी देर सोच विचार करने के बाद उसके मन में एक विचार आया, और बालक ने विद्यालय जाने का पूरी तरह मन बना लिया था. आखिर उसने एक निश्चय किया की तहरकर नदी पार करके विद्यालय पंहुचा जाये. बालक ने अपने सारे कपडे उतारकर अपने बस्ते में रख दिए. अब उसने बस्ते को अपने सिर पर कस कर बांध लिया, और नदी में कूद गया. नदी पार करते करते वह थक भी रहा था, पर बालक ने हार नहीं मानी और देखते ही देखते बालक तहरकर नदी पार पहुच गया, नदी पार करने के बाद बालक ने अपने कपडे पहने और चेहरे पर जीत की ख़ुशी लिए वह विद्यालय की और दौड़ पडा.

दोस्तों क्या आप जानते हो की यह स्वाभिमानी और साहसी बालक कौन था, यह बालक था नन्हे, जो आगे चलकर लालबहादुर शास्त्री के नाम से प्रसिद्ध हुए और यह बालक हमारे भारत का दूसरे प्रधानमंत्री बने,

लालबहादुर शास्त्री का जन्म २ अक्टूम्बर, १९०४ को हुआ था, इनके बचपन में ही पिता का देहांत हो गया जिसके कारण इनका जीवन बड़ी ही कठिनाइयो में बिता। पर इन्होने कभी भी हार नहीं मनी, वह शरीर से दुबले पतले होने के बाद भी इनमे साहस, निडरता, और ईमानदारी जैसे गुण कूट कूट कर भरे थे. हमारे भारत देश को स्वतंत्र दिलाने में इन्होने महात्मा गांधीजी का साथ दिया, ऐसे महान व्यक्ति जिनका निधन ११ जनवरी, १९६६ को हुआ था, किन्तु आज भी हम उनका नारा “जय जवान, जय किसान” सुनकर एसा लगता है की ये हमारे बिच में आज भी है, एसे महापुरुष को हम सब शत-शत नमन करते है,

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                                                                                 Author By :- Prashant Sayre Sir 
                                                                                  
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