तुलसी एक वनस्पति वरदान है , तुलसी के गुणकारी लाभ - Basil is a botanical boon, Beneficial of Basil - अपना संदेश - Apna Sandesh तुलसी एक वनस्पति वरदान है , तुलसी के गुणकारी लाभ - Basil is a botanical boon, Beneficial of Basil

तुलसी एक वनस्पति वरदान है , तुलसी के गुणकारी लाभ - Basil is a botanical boon, Beneficial of Basil

तुलसी एक वनस्पति वरदान है , तुलसी के गुणकारी लाभ - Basil is a botanical boon, Beneficial of Basil

तुलसी एक वनस्पति वरदान है , तुलसी के गुणकारी लाभ - Basil is a botanical boon, Beneficial of Basil :


तुलसी भारतवर्ष की देह में आत्मा के समान है। लोग तुलसी को माता समान मानकर जल चढ़ाते है , सभी व्यक्ति तुलसी की पूजा करते है। तुलसी एक महत्वपूर्ण औसधी है , तुलसी में ऑक्सीजन सबसे अधिक होता है। तुलसी कुछ अन्य प्रकारों में भारत में पाई जाती है , जैसे राम तुलसी , स्वेत तुलसी , वन तुलसी , नीबू तुलसी और श्याम तुलसी ,आदि।


तुलसी के गुणकारी लाभ - Beneficial of Basil :

■  भोजन के बाद एक बूंद तुलसी सेवन करने से पेट सम्बन्धी बीमारिया बहुत कम होती है।

■  तुलसी अंग - प्रत्यंग को स्पुर्तिवान बनाती है।

■  तुलसी स्मरणशक्ति को तेज करती है। शरीर के लाल रक्त सेल्स को बढाने में अत्यंत लाभकारी है।

■  तुलसी की दिन में 4 - 5 बुँदे पिने से महिलाओ को गर्भवस्था में बार बार होने उल्टी की शिकायत ठीक हो जाती है।
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■  आग के जलने व किसी जहरीले कीड़े के काटने पर तुलसी अर्क को लगाने से विशेष राहत मिलती है।

■  सर दर्द , बाल झड़ना , बाल सफेद होना - तुलसी की 8 - 10 बुँदे मी.ली.एलो हर्बल हेअर ऑइल के साथ मिलकर सिर एव बालो की जड़ो में लगाए।

■  कान के रोग जाने के लिए तुलसी को हलका सा गरम करके एक -एक बुँदे कान में टपकाए।

■  नाक में पीनस रोग हो जाता है। इसके अतिरिक्त फोड़े फुसिंया भी निकल जाती है। दोनों रोगों में रोगी को बहुत तकलीफ होती है। तुलसी को हल्का सा गरम करके एक - एक बूंद नाक में टपकाए राहत मिलेगी।

■  दांत का दर्द , दांत में कीड़ा लगना , मसूडो से खून आना तुलसी की 4 - 5 बुँदे पानी में डालकर कुल्हा करना चाहिए। तुलसी एक वनस्पति वरदान है , तुलसी के गुणकारी लाभ - Basil is a botanical boon, Beneficial of Basil
■  यदि मुह में किसी प्रकार की दुर्गन्ध आती है तो तुलसी के पत्ते का सेवन करे दुर्गन्ध कुछ समय बाद चला जाएगा।

■  गले में दर्द , गले व मुह में छाले , आवाज बैठ जाना , आदि तुलसी की 4 -5 बुँदे गरम पानी में डालकर कुल्हा करे।


■  दमा व खासी में तुलसी की 4 -5 बुँदे थोड़े अदरक के साथ तथा शहद के साथ मिलाकर सुबह - दोहपहर - शाम सेवन करे।

■  तुलसी की 8 - 10 बुँदे बॉडी ऑइल में मिलाकर शरीर पर मलकर रात्रि में सोए , मछर नही काटेंगे।

■  गुप्त अंग रोग वैसे तो गुप्त रोग अनेक प्रकार के होते है। जिसके बारे में सभी स्त्रिया को पता रहता है उन रोगों में कुछ है, समय पर रजाधर्म न होना , गुप्त अंग की पीड़ा इसका कठोर हो जाना भीतर घाब बन जाना , चीटी रेंगने की तरह पीड़ा आदि रोग अधिक रहते है।
लक्षण : - स्त्री को हर समय बेचैनी रहना , गुप्त अंग से मवाद भी निकलना , कभी कभी रक्त भी निकलना आदि। तुलसी की 10 बुँदे 100 मी.ली पानी में डाल कर उसे घोलकर हल्का सा गरम करके  घोल कर गुप्त अंग में डाले राहत मिलेगी।

■  तुलसी के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रोल का स्तर कम होने लगता है ,स्तर के थक्के जमने कम होते है और हार्ट अटैक और स्ट्रोक की रोकवान होती है।

■  निरोगी जीवन जीने के लिए प्रत्येक व्यक्ति ने दिन प्रतिदिन तुलसी के 4 - 5 पत्ते सेवन करना चाहिए।  स्वास्त अच्छा रहेगा।


                                                                                                                               Author by Laxmi...
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